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अगर टैक्स की जानकारी छिपाई तो होगा नुकसान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 27 May 2018 01:31 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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टैक्सेशन बार एसोसिएशन आगरा एवं ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर की ओर से शनिवार आयोजित टैक्स कॉन्फ्रेंस में जीएसटी की जटिलताओं के बारे में बताया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस कर प्रणाली को जटिल मानकर खारिज करने से काम नहीं चलेगा। इसमें लगातार संशोधन और सुधारों का दौर जारी है। लगातार नजर रखने की जरूरत है।
फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आयोजित सेमिनार में वीपी गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में ई-असिसमेंट शुरू होने वाला है। इसमें असेसिंग अफसर और असेसी अलग-अलग क्षेत्रों के होंगे। यदि असिसमेंट आगरा के व्यापारी का है तो असेसिंग दूसरे जिले के अफसर पर रहेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
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विशेषज्ञों ने कहा कि इस कर प्रणाली को जटिल मानकर खारिज करने से काम नहीं चलेगा। इसमें लगातार संशोधन और सुधारों का दौर जारी है। लगातार नजर रखने की जरूरत है।
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फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आयोजित सेमिनार में वीपी गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में ई-असिसमेंट शुरू होने वाला है। इसमें असेसिंग अफसर और असेसी अलग-अलग क्षेत्रों के होंगे। यदि असिसमेंट आगरा के व्यापारी का है तो असेसिंग दूसरे जिले के अफसर पर रहेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
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सेमिनार में मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
कपिल गोयल ने बताया कि आयकर अधिनियम में विभिन्न प्रकार की पेनल्टी का प्रावधान है। अगर विभाग द्वारा मांगी जाने वाली सूचनाओं में कमी करेंगे तो इसका खामियाजा भी करदाता को ही भुगतना होगा। इसलिए किसी भी तरह की सूचना देने में कोताही नहीं बरतें।
दिल्ली के सीए एचएल मदान ने वर्क कॉन्फ्रेंस और वैट के बीच के अंतर को समझाया। उन्होंने बताया कि दोनों ही अलग हैं। जयपुर के कर अधिवक्ता पंकज घिया ने बताया कि अभी आईटीसी में दिक्कतें आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि अगर विक्रेता टैक्स जमा नहीं करता है तो क्रेता को परेशानी उठानी पड़ेगी। तीसरे सत्र में ई-वे बिल और एडवांस रुलिंग पर सीए गौरव गुप्ता एवं विमल जैन ने चर्चा की। ई-वे बिल के प्रावधानों को बताते हुए कहा कि इसमें हेराफेरी का कोई गुंजाइश नहीं है।
सेमिनार में पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, एमपी के अधिवक्ताओं ने भी हिस्सा लिया। इसके पहले सेमिनार का उद्घाटन कानपुर परिक्षेत्र के मुख्य आयकर आयुक्त अभय कुमार तायल ने किया।
दिल्ली के सीए एचएल मदान ने वर्क कॉन्फ्रेंस और वैट के बीच के अंतर को समझाया। उन्होंने बताया कि दोनों ही अलग हैं। जयपुर के कर अधिवक्ता पंकज घिया ने बताया कि अभी आईटीसी में दिक्कतें आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि अगर विक्रेता टैक्स जमा नहीं करता है तो क्रेता को परेशानी उठानी पड़ेगी। तीसरे सत्र में ई-वे बिल और एडवांस रुलिंग पर सीए गौरव गुप्ता एवं विमल जैन ने चर्चा की। ई-वे बिल के प्रावधानों को बताते हुए कहा कि इसमें हेराफेरी का कोई गुंजाइश नहीं है।
सेमिनार में पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, एमपी के अधिवक्ताओं ने भी हिस्सा लिया। इसके पहले सेमिनार का उद्घाटन कानपुर परिक्षेत्र के मुख्य आयकर आयुक्त अभय कुमार तायल ने किया।