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पूर्वजों को तर्पण तो कहीं अपनों को किया बेघर
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मैनपुरी। पितृपक्ष आज से शुरू हो रहा है। शहर में कहीं तर्पण होगा तो कहीं अपनों की वजह से बुजुर्ग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। तर्पण स्वर्गवासी हो चुके अपनों को तृप्त करने के लिए किया जाता है। वहीं कुछ ने तो अपनों को ही बेघर कर दिया।
वृद्धाश्रम से लेकर सड़कों तक ऐसे कई बुजुर्ग हैं, जो अपनों द्वारा दिया दर्द झेल रहे हैं।
शहर के जेल रोड पर संचालित वृद्धाश्रम में रहने वाले लगभग एक सैकड़ा बुजुर्गों में से अधिकांश की कहानी कुछ ऐसी ही है। घर है परिवार है, लेकिन फिर भी वे बेघर हैं। जिंदगी भर की कमाई जिसे देते वक्त उनके हाथ न कांपे वे बेटे उन्हें दो वक्त की रोटी भी नहीं दे सके। दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं जो अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेंगे।
अपनों ने छीनी जमीन जिला अस्पताल की रसोई से मिल रहा भोजन
दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव चौरासी निवासी रघुनंदन शाक्य के नाम से 12 बीघा जमीन है। आरोप है कि माता-पिता की मौत के बाद चाचा ने रघुनंदन की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। 60 वर्षीय रघुनंदन को कुछ दिनों तक चाचा और उनके बेटों ने भोजन और खर्चा दिया। इसके बाद उन्होंने भी साथ छोड़ दिया। पिछले दो साल से रघुनंदन का घर जिला अस्पताल है। वह अस्पताल की रसोई से मरीजों के लिए बनने वाले भोजन से ही अपने पेट की भूख मिटाते है। रात में अस्पताल के ही किसी कोने में अपना गमछा बिछाकर सो जाते हैं।
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एक मां को रोटी न दे सके दो बेटे
पुरानी मैनपुरी निवासी 70 वर्षीय ऊषा देवी स्टेशन रोड पर घर-घर जाकर लोगों से दो जून की रोटी मांगती हैं। ऊषा देवी से जब उनके परिवार के बारे में पूछा गया तो वह भावुक हो गईं। उनका कहना था कि उनके दो पुत्र हैं। 20 साल पहले पति की मौत के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया।
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वृद्धाश्रम से लेकर सड़कों तक ऐसे कई बुजुर्ग हैं, जो अपनों द्वारा दिया दर्द झेल रहे हैं।
शहर के जेल रोड पर संचालित वृद्धाश्रम में रहने वाले लगभग एक सैकड़ा बुजुर्गों में से अधिकांश की कहानी कुछ ऐसी ही है। घर है परिवार है, लेकिन फिर भी वे बेघर हैं। जिंदगी भर की कमाई जिसे देते वक्त उनके हाथ न कांपे वे बेटे उन्हें दो वक्त की रोटी भी नहीं दे सके। दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं जो अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेंगे।
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अपनों ने छीनी जमीन जिला अस्पताल की रसोई से मिल रहा भोजन
दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव चौरासी निवासी रघुनंदन शाक्य के नाम से 12 बीघा जमीन है। आरोप है कि माता-पिता की मौत के बाद चाचा ने रघुनंदन की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। 60 वर्षीय रघुनंदन को कुछ दिनों तक चाचा और उनके बेटों ने भोजन और खर्चा दिया। इसके बाद उन्होंने भी साथ छोड़ दिया। पिछले दो साल से रघुनंदन का घर जिला अस्पताल है। वह अस्पताल की रसोई से मरीजों के लिए बनने वाले भोजन से ही अपने पेट की भूख मिटाते है। रात में अस्पताल के ही किसी कोने में अपना गमछा बिछाकर सो जाते हैं।
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एक मां को रोटी न दे सके दो बेटे
पुरानी मैनपुरी निवासी 70 वर्षीय ऊषा देवी स्टेशन रोड पर घर-घर जाकर लोगों से दो जून की रोटी मांगती हैं। ऊषा देवी से जब उनके परिवार के बारे में पूछा गया तो वह भावुक हो गईं। उनका कहना था कि उनके दो पुत्र हैं। 20 साल पहले पति की मौत के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया।