पड़ोसियों के लिए ताजमहल बन रहा मुसीबतों का सबब, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
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विश्वप्रसिद्ध स्मारक ताजमहल एक ओर जहां पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बना है, वहीं इसके 500 मीटर दायरे में रहने वालों के लिए मुसीबतों का सबब बना हुआ है। इस ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण को देखते हुए इसके दायरे में तमाम प्रतिबंध लगे हुए हैं।
नया निर्माण तो दूर, घर की मरम्मत कराने के लिए भी अनुमति लेने में पसीना छूट जाता है। ऐसे में यहां के लोग अब कई मामलों में रियायत की मांग उठा रहे हैं। इनको लेकर वह सुप्रीम कोर्ट भी जाने की तैयारी में हैं। ताजमहल और इसके आसपास के क्षेत्र को एतिहासिक दृष्टि से संरक्षित करने के लिए यहां के लोगों पर तमाम बंदिशें हैं।
इसके तहत ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में नया निर्माण तो हो ही नहीं सकता, मरम्मत के लिए भी पुरातत्व विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। वह भी आसानी से नहीं मिलती। इस दायरे में रहने वालों को आवागमन के लिए अपने वाहन की परिवहन विभाग की विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।
ऐसे में बाहर से आने वाले रिश्तेदारों काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उन्हें अपना वाहन कहीं दूर छोड़कर आना पड़ता है। इस क्षेत्र के लिए कोई ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान नहीं है। पुलिस प्रशासन जब चाहता है तब वाहन रोक देता और कभी अनुमति दे देता है। इन हालातों में यहां के लोगों को जेल की तरह से कैद होकर रहना पड़ता है।
ऐसे में क्षेत्रीय लोग शहर के अन्य क्षेत्रों के लोगों की तुलना में कई मामलों में रियायत की मांग कर रहे हैं। क्योंकि यहां रहने पर उन्हें तमाम समझौते करने पड़ रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
ये हैं मांगें
. जब निर्माण या मरम्मत नहीं कर सकते तो गृह कर में छूट दी जाए।
. जलकर में उन्हें छूट दी जाए।
. वाहनों की अनुमति की प्रक्रिया और सरल की जाए।
. ताजगंजवासियों को वरीयता के आधार पर पीएनजी गैस कनेक्शन दिए जाएं।
. क्षेत्र को हेरिटेज सिटी के रूप में घोषित किया जाए।
- मांगों के संबंध में मसौदा तैयार कर लिया है। इसके लिए अधिवक्ताओं की राय भी ली गई है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
संदीप अरोरा, पर्यटन व्यवसायी
- ताज के 500 मीटर दायरे में रहने वालों को तमाम समझौते करने पड़ते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उन्हें कुछ रियायतें भी दी जाएं।
सुमित उपाध्याय, क्षेत्रीय निवासी