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Agra News: 42 साल बाद ताजमहल का केस नंबर 13381 खत्म

Sat, 18 Apr 2026 03:07 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 03:07 AM IST
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Taj Mahal case number 13381 ends after 42 years
आगरा। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने, पर्यावरण की रक्षा के लिए वर्ष 1984 से सुप्रीम कोर्ट में चला आ रहा केस नंबर 13381/1984 अब खत्म हो गया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित बेंच में शामिल न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली ने एमसी मेहता की 42 साल पुरानी याचिका को समाप्त कर दिया। इस याचिका से जुड़ी 150 आईए को चार श्रेणियों में बांटकर नए नाम से सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 13381 केस में जारी आदेश प्रभावी रहेंगे।
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इस याचिका की शुरुआत ताजमहल के संगमरमर पर पड़ रहे पीले और काले धब्बों की समस्या से हुई थी। आगरा और इसके पास के जिलों को ताज ट्रेपेजियम जोन के तौर पर तय किया गया था। इस क्षेत्र में फाउंड्री, रासायनिक उद्योग, ईंट-भट्ठे, वाहनों का धुआं और मथुरा रिफाइनरी से निकलने वाले प्रदूषण को ताज के पीलेपन के लिए जिम्मेदार माना गया। इसी याचिका से 150 अंतरिम आवेदन जुड़ गए थे।
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वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि टीटीजेड में अब पर्यावरणीय मुद्दों पर अलग-अलग और अधिक प्रभावी न्यायिक निगरानी होगी। डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि कोर्ट के फैसले से अब पर्यावरण मामलों में जल्दी फैसले आएंगे। पुराने फैसलों की व्याख्या के नाम पर अफसर उलझाते थे।
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इन चार श्रेणियों में होगी सुनवाई
- विजन डॉक्यूमेंट – दीर्घकालिक विकास और संरक्षण योजना।
- हरित आवरण और वृक्ष संरक्षण – पेड़ों और हरियाली से जुड़े मुद्दे
- उद्योगों का विनियमन – औद्योगिक गतिविधियों का नियंत्रण।
- जल निकाय और सीवेज प्रबंधन – नदियों, नालों का संरक्षण।

आवेदन की प्रासंगिकता बतानी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित आवेदनों के निपटान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय की। 15 मई तक अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) को बताना होगा कि आवेदन प्रासंगिक है या नहीं। समय सीमा तक सूचना न मिलने पर आवेदन स्वतः निष्प्रभावी माना जाएगा। जिन मामलों पर सहमति होगी, उन्हें रजिस्ट्रार कोर्ट में अंतिम निपटान के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। विवादित मामलों की अलग से जांच होगी।


पेड़ों की कटाई पर सख्त शर्तें लागू
पेड़ काटने या स्थानांतरित करने से जुड़े मामलों के लिए कोर्ट ने कहा है कि 30 अप्रैल तक चार्ट पेश करना होगा। इसमें परियोजना विवरण, पेड़ों की संख्या, प्रजाति और क्षतिपूर्ति पौधरोपण शामिल होगा। बिना चार्ट के याचिका सूचीबद्ध नहीं होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमसी मेहता की याचिका 13381 के समाप्त होने के बाद भी पूर्व में दिए गए सभी आदेश और निर्देश प्रभावी बने रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर नई याचिकाओं में संशोधन या स्पष्टीकरण किया जा सकेगा।
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