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ताज: क्राउड मैनेजमेंट पर एएसआई-नीरी में माथापच्ची
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Sep 2016 12:27 AM IST
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दो घंटे में छह हजार सैलानियों की मौजूदगी की सिफारिश की
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल पर क्राउड मैनेजमेंट का खाका तैयार कर रहे नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने दो घंटे के शेड्यूल में मुख्य गुंबद पर छह हजार सैलानियों की मौजूदगी की सिफारिश की है। नई दिल्ली में एएसआई अधिकारियों के सामने नीरी के विशेषज्ञों ने ताज पर कैरिंग कैपेसिटी और क्राउड मैनेजमेंट पर अपनी सिफारिशों को प्रजेंटेशन के जरिए पेश किया। मुख्य गुंबद पर ज्यादा लोगों के कारण कार्बन डाई आक्साइड से संगमरमर को नुकसान होने का तर्क दिया गया है।
ताज पर भीड़ से हो रहे नुकसान के मद्देनजर एएसआई ने दो साल पहले नीरी से अध्ययन कराया। इसकी पहली रिपोर्ट एएसआई को दी जा चुकी है। फाइनल ड्राफ्ट से पहले नीरी विशेषज्ञों ने एएसआई महानिदेशक राकेश तिवारी के साथ एडीजी, डायरेक्टर के साथ बैठक कर प्रजेंटेशन दिया। नीरी के केवी जार्ज ने तीन घंटों के स्लैब बनाकर पर्यटकों की संख्या 6000 तक सीमित करने के सुझाव पर चर्चा की। इस पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन सीआईएसएफ के कमांडेंट ने सुरक्षा को लेकर नई प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए और व्यवहारिक दिक्कतें गिनाईं। मुख्य गुंबद में लोगों की मौजूदगी से कार्बन डाईआक्साइड ज्यादा होने का तर्क एएसआई केमिकल ब्रांच के गले नहीं उतरा। रसायन शाखा ने नीरी से गैस की रिपोर्ट मांगी है। आगरा से एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद भुवन विक्रम और रसायन शाखा अधीक्षण पुरातत्वविद डा. एमके भटनागर भी बैठक में शामिल हुए।
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ताज पर भीड़ से हो रहे नुकसान के मद्देनजर एएसआई ने दो साल पहले नीरी से अध्ययन कराया। इसकी पहली रिपोर्ट एएसआई को दी जा चुकी है। फाइनल ड्राफ्ट से पहले नीरी विशेषज्ञों ने एएसआई महानिदेशक राकेश तिवारी के साथ एडीजी, डायरेक्टर के साथ बैठक कर प्रजेंटेशन दिया। नीरी के केवी जार्ज ने तीन घंटों के स्लैब बनाकर पर्यटकों की संख्या 6000 तक सीमित करने के सुझाव पर चर्चा की। इस पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन सीआईएसएफ के कमांडेंट ने सुरक्षा को लेकर नई प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए और व्यवहारिक दिक्कतें गिनाईं। मुख्य गुंबद में लोगों की मौजूदगी से कार्बन डाईआक्साइड ज्यादा होने का तर्क एएसआई केमिकल ब्रांच के गले नहीं उतरा। रसायन शाखा ने नीरी से गैस की रिपोर्ट मांगी है। आगरा से एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद भुवन विक्रम और रसायन शाखा अधीक्षण पुरातत्वविद डा. एमके भटनागर भी बैठक में शामिल हुए।
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