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आगरा के छात्रों ने बनाई मशीन, बोरवेल में फंसे बच्चे को निकालना होगा आसान
Mon, 29 Jul 2019 09:36 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 29 Jul 2019 09:36 AM IST
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छात्रा द्वारा बनाई गई मशीन का मॉडल
- फोटो : अमर उजाला
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बोरवेल में बच्चों के गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटना के समय राहत कार्य में संसाधनों की कमी सामने आती है। बोरवेल से बच्चे को निकालने के लिए कोई विशेष उपकरण नहीं हैं। ऐसे में इसमें काफी समय लग जाता है। आगरा के आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस, बिचपुरी के छात्रों ने बोरवेल से बच्चों को निकालने के लिए मशीन का प्रोटोटाइप तैयार किया है।
संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के चतुर्थ वर्ष के छात्रों हितेश सिंघल, शुभम त्यागी, शोभित यादव, विशालदीप पाठक ने प्रोटोटाइप तैयार किया है। मीडिया समन्वयक डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि मशीन में एडजस्टेबल आर्म्स, डिजिटल इंटीग्रेटेड कैमरा, ऑडियो कम्युनिकेशन, ऑक्सीजन सप्लाई, रस्सी और पुली ड्राइव आदि लगी है।
इसका आकार सामान्य बोरवेल से थोड़ा छोटा है। जिससे यह बोरवेल में आसानी से उतारी जा सकती है। बच्चे को एडजस्टेबल आर्म्स से पकड़कर पुली व रस्सी की मदद से ऊपर खींचा जा सकता है। बच्चे को देखने और उसे पकड़ने के लिए मशीन में लाइट और डिजिटल कैमरा है।
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मॉडल को और विकसित किया जाएगा
विभागाध्यक्ष डॉ. दुष्यंत सिंह का कहना है कि यह प्रोटोटाइप है। इसे अभी और विकसित करने की जरूरत है। इसे विकसित करके व्यावसायिक रूप से बाजार में भी उपलब्ध कराएंगे। संस्थान के निदेशक अकादमिक डॉ. बीएस कुशवाह, निदेशक वित्त एवं प्रशासनिक डॉ. पंकज गुप्ता ने प्रोटोटाइप बनाने वाले छात्रों को बधाई दी है।
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संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के चतुर्थ वर्ष के छात्रों हितेश सिंघल, शुभम त्यागी, शोभित यादव, विशालदीप पाठक ने प्रोटोटाइप तैयार किया है। मीडिया समन्वयक डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि मशीन में एडजस्टेबल आर्म्स, डिजिटल इंटीग्रेटेड कैमरा, ऑडियो कम्युनिकेशन, ऑक्सीजन सप्लाई, रस्सी और पुली ड्राइव आदि लगी है।
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इसका आकार सामान्य बोरवेल से थोड़ा छोटा है। जिससे यह बोरवेल में आसानी से उतारी जा सकती है। बच्चे को एडजस्टेबल आर्म्स से पकड़कर पुली व रस्सी की मदद से ऊपर खींचा जा सकता है। बच्चे को देखने और उसे पकड़ने के लिए मशीन में लाइट और डिजिटल कैमरा है।
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मॉडल को और विकसित किया जाएगा
विभागाध्यक्ष डॉ. दुष्यंत सिंह का कहना है कि यह प्रोटोटाइप है। इसे अभी और विकसित करने की जरूरत है। इसे विकसित करके व्यावसायिक रूप से बाजार में भी उपलब्ध कराएंगे। संस्थान के निदेशक अकादमिक डॉ. बीएस कुशवाह, निदेशक वित्त एवं प्रशासनिक डॉ. पंकज गुप्ता ने प्रोटोटाइप बनाने वाले छात्रों को बधाई दी है।