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यमुना में जहर घोल रहे एसटीपी
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 20 Jan 2016 02:22 AM IST
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यमुना ऐसे ही दम नहीं तोड़ रही। जिनके कंधों पर इसे बचाने की जिम्मेदारी है, वही इसकी बदहाली का कारण बन रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संयुक्त टीम ने हाल ही में निरीक्षण कर इसका खुलासा किया है। टीम ने पाया कि शहर से निकलने वाला सीवेज सीधे यमुना में जा रहा है। इस संबंध में टीम ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है जोकि जल्द ही एनजीटी को सौंपी जाएगी।
बता दें कि पर्यावरणविद डीके जोशी ने यमुना को मूल स्वरूप में लाने के लिए पिछले साल के मध्य में एनजीटी में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर पिछले महीने सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने सीपीसीबी, यूपीपीसीबी को संयुक्त रूप से जगनपुर और बूढ़ी का नगला स्थित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के संचालन और रखरखाव की जांच कर, रिपोर्ट सौंपने को कहा था। इस पर अमल करते हुए 14 जनवरी को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वैज्ञानिक डा. एके गुप्ता, सीपीसीबी से कमल कुमार और यूपीपीसीबी से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी निंरजन शर्मा ने दोनों एसटीपी का निरीक्षण किया। इस दौरान डब्ल्यूएसपी (वेस्ट स्टेबलिशन पॉड्स) पर आधारित बूढ़ी का नगला स्थित एसटीपी के पॉड्स से ओवरफ्लो होने वाला सीवेज सीधा यमुना में जा रहा था। शेष सीवेज ऑक्सीडेशन के बाद शोधन की दूसरी प्रक्रिया से गुजरने की बजाय सीधे नदी में जा रहा था। इतना ही नहीं यहां सीवेज के प्रवाह को नापने का कोई यंत्र भी नहीं था। टीम ने पाया कि बिजली कटौती की स्थिति में प्लांट के संचालन के लिए 62.5 केवीए का जेनरेटर तो था लेकिन चालू हालत में नहीं था। जगनपुर एसटीपी पर भी सीवेज के प्रवाह को नापने का कोई सिस्टम नहीं था। टीम ने दोनों एसटीपी से निकलने वाले सीवेज के नमूने लिए हैं। इसकी जांच रिपोर्ट जल्द आने की संभावना है। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी।
इनसेट
कालिंदी विहार का एसटीपी ठप
इससे पूर्व यूपीपीसीबी ने कालिंदी विहार स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया था। इस दौरान यह प्लांट पूरी तरह से ठप पाया गया। कालिंदी विहार सहित इसके आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाला सीवेज नदी में जा रहा था। यह प्लांट भी जल निगम संचालित कर रहा है। मगर, आगरा विकास प्राधिकरण से बजट न मिलने के अभाव में यह ठप पड़ा है। इसके लिए जल निगम एडीए को कई बार पत्र भी लिख चुका है।
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इनसेट
...तो ताज पर बढ़ेगी बदबू
यमुना में पानी की कमी को दूर करने के लिए सिंचाई विभाग नदी में दो रबर चेकडैम बनाने की तैयारी कर रहा है। इनमें से एक चेकडैम ताज के पास होगा। यदि एसटीपी काम नहीं करेंगे तो सीवेज सीधे नदी में जाएगा। ऐसी स्थिति में डैम की वजह से ताज के पीछे नदी में गंदा पानी एकत्रित होगा, जिसकी बदबू ताज देखने आने वाले पर्यटकों को परेशान कर सकती है।
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बता दें कि पर्यावरणविद डीके जोशी ने यमुना को मूल स्वरूप में लाने के लिए पिछले साल के मध्य में एनजीटी में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर पिछले महीने सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने सीपीसीबी, यूपीपीसीबी को संयुक्त रूप से जगनपुर और बूढ़ी का नगला स्थित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के संचालन और रखरखाव की जांच कर, रिपोर्ट सौंपने को कहा था। इस पर अमल करते हुए 14 जनवरी को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वैज्ञानिक डा. एके गुप्ता, सीपीसीबी से कमल कुमार और यूपीपीसीबी से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी निंरजन शर्मा ने दोनों एसटीपी का निरीक्षण किया। इस दौरान डब्ल्यूएसपी (वेस्ट स्टेबलिशन पॉड्स) पर आधारित बूढ़ी का नगला स्थित एसटीपी के पॉड्स से ओवरफ्लो होने वाला सीवेज सीधा यमुना में जा रहा था। शेष सीवेज ऑक्सीडेशन के बाद शोधन की दूसरी प्रक्रिया से गुजरने की बजाय सीधे नदी में जा रहा था। इतना ही नहीं यहां सीवेज के प्रवाह को नापने का कोई यंत्र भी नहीं था। टीम ने पाया कि बिजली कटौती की स्थिति में प्लांट के संचालन के लिए 62.5 केवीए का जेनरेटर तो था लेकिन चालू हालत में नहीं था। जगनपुर एसटीपी पर भी सीवेज के प्रवाह को नापने का कोई सिस्टम नहीं था। टीम ने दोनों एसटीपी से निकलने वाले सीवेज के नमूने लिए हैं। इसकी जांच रिपोर्ट जल्द आने की संभावना है। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी।
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कालिंदी विहार का एसटीपी ठप
इससे पूर्व यूपीपीसीबी ने कालिंदी विहार स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया था। इस दौरान यह प्लांट पूरी तरह से ठप पाया गया। कालिंदी विहार सहित इसके आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाला सीवेज नदी में जा रहा था। यह प्लांट भी जल निगम संचालित कर रहा है। मगर, आगरा विकास प्राधिकरण से बजट न मिलने के अभाव में यह ठप पड़ा है। इसके लिए जल निगम एडीए को कई बार पत्र भी लिख चुका है।
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...तो ताज पर बढ़ेगी बदबू
यमुना में पानी की कमी को दूर करने के लिए सिंचाई विभाग नदी में दो रबर चेकडैम बनाने की तैयारी कर रहा है। इनमें से एक चेकडैम ताज के पास होगा। यदि एसटीपी काम नहीं करेंगे तो सीवेज सीधे नदी में जाएगा। ऐसी स्थिति में डैम की वजह से ताज के पीछे नदी में गंदा पानी एकत्रित होगा, जिसकी बदबू ताज देखने आने वाले पर्यटकों को परेशान कर सकती है।