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Agra News: आईसीयू में मानक नहीं किए पूरे, 20 अस्पतालों के लाइसेंस पर रोक
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आगरा। अस्पतालों में चिकित्सकीय मानकों की अनदेखी की जा रही है। नोटिस देने पर भी मानक पूरे नहीं किए। ऐसे 20 अस्पतालों के लाइसेंस नवीनीकरण पर स्वास्थ्य विभाग ने रोक लगा दी है। दो सप्ताह में मानक पूरे कर रिपोर्ट नहीं देने पर इनके लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग में 1317 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हैं। इसमें से 577 क्लीनिक, 487 अस्पताल, 150 पैथोलॉजी लैब, 103 डायग्नोस्टिक सेंटर हैं। इनमें से 22 अस्पतालों में अब तक अग्निशमन, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मचारी समेत अन्य मानकों में कमी हैं।
यहां तक कि आईसीयू में 24 घंटे के लिए क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट की नियुक्ति भी नहीं है। चिकित्सकों के नाम भी नहीं दिए गए हैं। पर्याप्त जीवनरक्षक उपकरण भी नहीं हैं। इससे गंभीर मरीजों की जान पर खतरा है। आरोप है कि नोटिस देने के बाद भी कमियां दूर नहीं की गईं। इन्हें रिमाइंडर देकर 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
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सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 20 अस्पतालों के लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक लगाई है। इनमें चिकित्सकीय मानकों में कमी थी। आईएमए अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच का कहना है कि बीते दिनों बैठक करते हुए सभी चिकित्सकों को मानक पूरा करने के लिए कहा गया था, कुछ ही अस्पताल रह गए होंगे। उन्हें फिर सचेत किया जाएगा।
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चिकित्सक और रेट लिस्ट भी नहीं दर्ज
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल-पैथोलॉजी लैब के लिए दिशा निर्देश जारी किए थे, जिसमें अस्पताल का नाम, स्वीकृत बेड, चिकित्सक का नाम, उनकी डिग्री, अस्पताल-लैब में मिलने वाली चिकित्सकीय सुविधा, उसकी कीमत दर्ज करनी थी। प्रवेश द्वार और चिकित्सक के चैंबर में सीसीटीवी कैमरे, डॉक्टर की ओर से संबंधित अस्पताल में सेवाएं देने का शपथ पत्र, स्वयं को फोन नंबर समेत अन्य का पालन करना है। इनमें अधिकांश ऐसा नहीं कर रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि इनके अस्पतालों का सर्वेक्षण भी कराया जाएगा।
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स्वास्थ्य विभाग में 1317 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हैं। इसमें से 577 क्लीनिक, 487 अस्पताल, 150 पैथोलॉजी लैब, 103 डायग्नोस्टिक सेंटर हैं। इनमें से 22 अस्पतालों में अब तक अग्निशमन, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मचारी समेत अन्य मानकों में कमी हैं।
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यहां तक कि आईसीयू में 24 घंटे के लिए क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट की नियुक्ति भी नहीं है। चिकित्सकों के नाम भी नहीं दिए गए हैं। पर्याप्त जीवनरक्षक उपकरण भी नहीं हैं। इससे गंभीर मरीजों की जान पर खतरा है। आरोप है कि नोटिस देने के बाद भी कमियां दूर नहीं की गईं। इन्हें रिमाइंडर देकर 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
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सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 20 अस्पतालों के लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक लगाई है। इनमें चिकित्सकीय मानकों में कमी थी। आईएमए अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच का कहना है कि बीते दिनों बैठक करते हुए सभी चिकित्सकों को मानक पूरा करने के लिए कहा गया था, कुछ ही अस्पताल रह गए होंगे। उन्हें फिर सचेत किया जाएगा।
चिकित्सक और रेट लिस्ट भी नहीं दर्ज
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल-पैथोलॉजी लैब के लिए दिशा निर्देश जारी किए थे, जिसमें अस्पताल का नाम, स्वीकृत बेड, चिकित्सक का नाम, उनकी डिग्री, अस्पताल-लैब में मिलने वाली चिकित्सकीय सुविधा, उसकी कीमत दर्ज करनी थी। प्रवेश द्वार और चिकित्सक के चैंबर में सीसीटीवी कैमरे, डॉक्टर की ओर से संबंधित अस्पताल में सेवाएं देने का शपथ पत्र, स्वयं को फोन नंबर समेत अन्य का पालन करना है। इनमें अधिकांश ऐसा नहीं कर रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि इनके अस्पतालों का सर्वेक्षण भी कराया जाएगा।