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स्वस्थ नवजात को आईसीयू में भर्ती कर लगाई गलत ड्रिप, संक्रमण फैला, काटना पड़ेगा हाथ
Tue, 28 Jan 2020 11:41 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 28 Jan 2020 11:41 AM IST
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नवजात के हाथ में फैला संक्रमण
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के निजी अस्पताल में नवजात को गलत ढंग से ड्रिप लगाने से उसके हाथ में संक्रमण फैल गया। उसका इलाज अभी दिल्ली के निजी अस्पताल में चल रहा है। यहां चिकित्सकों ने शिशु का हाथ काटने की बात कही है। पीड़ित ने स्वास्थ्य विभाग के यहां शिकायत की है। सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
फिरोजाबाद के नगला भाड़ा निवासी नरेश कुमार की पत्नी प्रतिभा का प्रसव दयालबाग रोड स्थित नोबेल मेटरनिटी नर्सिंग होम में बीते वर्ष 19 दिसंबर को हुआ। यहां डॉ. ममता सक्सेना की देखरेख में प्रसव कराया गया।
दंपती का आरोप है कि स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। इसके बावजूद नवजात सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कर दिया। ड्रिप चढ़ाने के साथ हाथ पर पट्टी कसकर बांध दी। अगले दिन शिशु का हाथ नीला पड़ गया। इसकी शिकायत डॉक्टर को दी तो उन्होंने फटकारते हुए चुप करा दिया।
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फिरोजाबाद के नगला भाड़ा निवासी नरेश कुमार की पत्नी प्रतिभा का प्रसव दयालबाग रोड स्थित नोबेल मेटरनिटी नर्सिंग होम में बीते वर्ष 19 दिसंबर को हुआ। यहां डॉ. ममता सक्सेना की देखरेख में प्रसव कराया गया।
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दंपती का आरोप है कि स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। इसके बावजूद नवजात सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कर दिया। ड्रिप चढ़ाने के साथ हाथ पर पट्टी कसकर बांध दी। अगले दिन शिशु का हाथ नीला पड़ गया। इसकी शिकायत डॉक्टर को दी तो उन्होंने फटकारते हुए चुप करा दिया।
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गलत सुई के इस्तेमाल से फैला संक्रमण
सूजन कम करने का मलहम दे दिया गया। पांच दिन तक यहां भर्ती रखा और डिस्चार्ज कर दिया। नरेश कुमार ने कहा कि इसका हाथ अभी ठीक नहीं है तो कहा कि मलहम लगाते रहना, ठीक हो जाएगा। 29 दिसंबर को फिर दिखाने लाया और फिर भर्ती कर लिया।
पांच जनवरी को शिशु को ठीक बताते हुए डिस्चार्ज कर दिया। घर पहुंचा तो शिशु की हालत बिगड़ गई और छह जनवरी को आगरा के दूसरे अस्पताल दिखाया तो यहां दिल्ली ले जाने के लिए कहा। दिल्ली के निजी अस्पताल में इलाज से भी फायदा नहीं हुआ।
वहां के चिकित्सक का कहना है कि ड्रिप के लिए सुई गलत लगा दी और कसकर पट्टी बांधने से रक्त संचार नहीं हो पाया। इसका हाथ काटने की संस्तुति करते हुए एम्स रैफर कर दिया गया है।
सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि शिकायत मिली है, इसकी एसीएमओ को जांच करने के लिए कहा गया है। अस्पताल संचालक डॉ. संजय सक्सेना का कहना है कि नवजात को पैदाइशी सेप्टीसीमिया था, मां भी पीड़ित थी। प्रसव और इलाज में कोई लापरवाह नहीं बरती गई।
पांच जनवरी को शिशु को ठीक बताते हुए डिस्चार्ज कर दिया। घर पहुंचा तो शिशु की हालत बिगड़ गई और छह जनवरी को आगरा के दूसरे अस्पताल दिखाया तो यहां दिल्ली ले जाने के लिए कहा। दिल्ली के निजी अस्पताल में इलाज से भी फायदा नहीं हुआ।
वहां के चिकित्सक का कहना है कि ड्रिप के लिए सुई गलत लगा दी और कसकर पट्टी बांधने से रक्त संचार नहीं हो पाया। इसका हाथ काटने की संस्तुति करते हुए एम्स रैफर कर दिया गया है।
सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि शिकायत मिली है, इसकी एसीएमओ को जांच करने के लिए कहा गया है। अस्पताल संचालक डॉ. संजय सक्सेना का कहना है कि नवजात को पैदाइशी सेप्टीसीमिया था, मां भी पीड़ित थी। प्रसव और इलाज में कोई लापरवाह नहीं बरती गई।