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अब नहीं बदलेंगे आईवीएफ में शुक्राणु और अंडाणु, दंपति को मिलेगा आरएफ आइडी नंबर
Sat, 17 Aug 2019 10:20 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 17 Aug 2019 10:20 AM IST
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आईवीएफ
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आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित होटल में शुक्रवार से शुरू हुई तीन दिवसीय इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन (इसार) की कार्यशाला में पहले दिन महत्वपूर्ण निर्णय हुआ। अब आईवीएफ कराने वाले दंपति को आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन) आइडी नंबर दिया जाएगा। इससे शुक्राणु और अंडाणु बदल जाने की घटनाएं नहीं हो सकेगी।
कार्यशाला की अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि इसी साल अप्रैल में चीन के दंपति ने अमेरिका में आइवीएफ पद्धति से बच्चे को जन्म दिया था। इस दौरान किसी अमेरिकी के शुक्राणु बदल जाने पर संतान का रंग-रूप उस अमेरिकी पर गया था। आइवीएफ कराने वाले दंपति को पंजीकरण होते ही आरएफ आइडी नंबर दे दिया जाएगा। किसी के शुक्राणु-अंडाणु बदल भी गए तो सॉफ्टवेयर तत्काल पकड़ लेगा और प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा।
कार्यशाला अध्यक्ष डॉ. अनुपम गुप्ता ने आईवीएफ की नई तकनीकी और बेहतर परिणामों पर व्याख्यान दिए। डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. एरियल विसमैन, प्रो. सुजैन जार्ज, डॉ. महेंद्र पारीख, डॉ. वरुण सरकार, डॉ. अमित टंडन, डॉ. निहारिका, डॉ. शैली गुप्ता, डॉ. राखी सिंह, डॉ. राजुल त्यागी, डॉ. साधना गुप्ता, डॉ. एस. कृष्ण कुमार समेत 40 चिकित्सकों ने व्याख्यान दिए।
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कैंसर रोगी भी करा सकते हैं आइवीएफ
स्तन कैंसर से जूझ रहीं निसंतान महिलाएं आईवीएफ पद्धति से संतान पापा चाहती हैं, लेकिन इनमें भ्रांतियां रहती हैं। लेकिन ऐसी महिलाएं भी आइवीएफ कराके मां बन सकती हैं। कार्यशाला में आस्ट्रेलिया के डॉ. डी. मैरो ने बताया कि ऐसी मरीज संतान पा सकती हैं, इसके लिए चिकित्यकीय निगरानी की जरूरत रहती है। कैंसर रोगी महिलाएं अंडाणुओं को प्रिजर्व करा सकती हैं। इससे आगे की प्रक्रिया चिकित्सक जारी रख सकते हैं।
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कार्यशाला की अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि इसी साल अप्रैल में चीन के दंपति ने अमेरिका में आइवीएफ पद्धति से बच्चे को जन्म दिया था। इस दौरान किसी अमेरिकी के शुक्राणु बदल जाने पर संतान का रंग-रूप उस अमेरिकी पर गया था। आइवीएफ कराने वाले दंपति को पंजीकरण होते ही आरएफ आइडी नंबर दे दिया जाएगा। किसी के शुक्राणु-अंडाणु बदल भी गए तो सॉफ्टवेयर तत्काल पकड़ लेगा और प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा।
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कार्यशाला अध्यक्ष डॉ. अनुपम गुप्ता ने आईवीएफ की नई तकनीकी और बेहतर परिणामों पर व्याख्यान दिए। डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. एरियल विसमैन, प्रो. सुजैन जार्ज, डॉ. महेंद्र पारीख, डॉ. वरुण सरकार, डॉ. अमित टंडन, डॉ. निहारिका, डॉ. शैली गुप्ता, डॉ. राखी सिंह, डॉ. राजुल त्यागी, डॉ. साधना गुप्ता, डॉ. एस. कृष्ण कुमार समेत 40 चिकित्सकों ने व्याख्यान दिए।
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कैंसर रोगी भी करा सकते हैं आइवीएफ
स्तन कैंसर से जूझ रहीं निसंतान महिलाएं आईवीएफ पद्धति से संतान पापा चाहती हैं, लेकिन इनमें भ्रांतियां रहती हैं। लेकिन ऐसी महिलाएं भी आइवीएफ कराके मां बन सकती हैं। कार्यशाला में आस्ट्रेलिया के डॉ. डी. मैरो ने बताया कि ऐसी मरीज संतान पा सकती हैं, इसके लिए चिकित्यकीय निगरानी की जरूरत रहती है। कैंसर रोगी महिलाएं अंडाणुओं को प्रिजर्व करा सकती हैं। इससे आगे की प्रक्रिया चिकित्सक जारी रख सकते हैं।