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जिले में नहीं मिल पा रही उच्च स्तरीय चिकित्सा की सुविधाएं
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कासगंज। इंटरनेशनल यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे हर साल 12 दिसंबर को मनाया जाता है, ताकि जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो। लेकिन जिले में लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो पाती। जिले में डाक्टरों के 127 पद हैं, लेकिन केवल 40 डाक्टर ही ड्यूटी कर रहे हैं। आपातकालीन चिकित्सा भी यहां नहीं मिलती। ज्यादातर मरीजों को इन अस्पतालों से बाहर रेफर किया जाता है।
कोरोना काल में भी पीड़ितों को उचित चिकित्सा नहीं मिल सकी। जिला चिकित्सालय में रखे 24 वेंटिलेटर में से किसी का भी संचालन आपात स्थिति में भी नहीं हो सका। इसका कारण रहा कि इन वेंटिलेटर के संचालन के लिए न विशेषज्ञ की तैनाती थी और न ही किसी कर्मी की। चिकित्सकों की कमी भी जिले में लगातार बनी हुई है, लेकिन शासन के स्तर से उदासीनता का रवैया बना हुआ है।
- जिले में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। दुर्घटना के घायलों को भी समुचित इलाज नहीं मिल पाता। तमाम मौतें हो जाती हैं- सुधीर शर्मा, कारोबारी।
- जिले में आंखों का भी कोई चिकित्सक सरकारी अस्पताल में नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की जरूरत है- मयंक बिंदल, कारोबारी।
वर्जन-
- जिले में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। चिकित्सकों की कमी के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। लगातार संसाधन भी बढ़ाए जा रहे हैं। -अनिल कुमार, सीएमओ।
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कोरोना काल में भी पीड़ितों को उचित चिकित्सा नहीं मिल सकी। जिला चिकित्सालय में रखे 24 वेंटिलेटर में से किसी का भी संचालन आपात स्थिति में भी नहीं हो सका। इसका कारण रहा कि इन वेंटिलेटर के संचालन के लिए न विशेषज्ञ की तैनाती थी और न ही किसी कर्मी की। चिकित्सकों की कमी भी जिले में लगातार बनी हुई है, लेकिन शासन के स्तर से उदासीनता का रवैया बना हुआ है।
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- जिले में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। दुर्घटना के घायलों को भी समुचित इलाज नहीं मिल पाता। तमाम मौतें हो जाती हैं- सुधीर शर्मा, कारोबारी।
- जिले में आंखों का भी कोई चिकित्सक सरकारी अस्पताल में नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की जरूरत है- मयंक बिंदल, कारोबारी।
वर्जन-
- जिले में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। चिकित्सकों की कमी के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। लगातार संसाधन भी बढ़ाए जा रहे हैं। -अनिल कुमार, सीएमओ।
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