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हिंदी हैं हम: आगरा में हिंदी की सेवा में जुटे दक्षिण के अफसर, पढ़ाई के दौरान बनाई भाषा पर पकड़

Mon, 23 Aug 2021 10:39 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 23 Aug 2021 10:39 AM IST
सार

आगरा के एसएसपी मुनिराज जी., एसपी आरए पूर्वी अशोक वेंकट के. और मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ऐसे ही अधिकारी हैं, जो गैर हिंदी क्षेत्रों से आकर भी भाषा की सेवा में जुटे हैं।

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South Indian officers doing work in Hindi in Agra
आगरा के अफसर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण भारत के जिन राज्यों में हिंदी लिखने वाले ही नहीं, बल्कि बोलने वालों की भी तादाद न के बराबर है, वहां के अफसर अब हिंदी भाषा में पारंगत हो चुके हैं। जनता से संवाद से लेकर मीडिया को जानकारी देने तक का काम सरलता से कर रहे हैं। आगरा के एसएसपी मुनिराज जी., एसपी आरए पूर्वी अशोक वेंकट के. और मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ऐसे ही अधिकारी हैं, जो गैर हिंदी क्षेत्रों से आकर भी भाषा की सेवा में जुटे हैं।

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जनता से संवाद और लिखापढ़ी, सब हिंदी में करता हूं: मुनिराज जी
वर्ष 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी एसएसपी मुनिराज जी. मूलरूप से तमिलनाडु के धर्मपुरी के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनके राज्य में स्कूलों में शुरुआत से ही तमिल और अंग्रेजी भाषा पढ़ाई जाती है। हिंदी निजी कॉलेज में सीखनी होती है। इस कारण उनका कभी हिंदी से नाता नहीं रहा। वह तमिल और अंग्रेजी ही जानते थे। 
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स्नातक करने के बाद वह हरियाणा के हिसार में पोस्ट ग्रेजुएशन करने आए थे। तब हिंदी को सीखने का मौका मिला। शुरुआत में बोलने और लिखने में दिक्कत आई थी। आईपीएस बनने के बाद दस महीने की ट्रेनिंग में हिंदी बोलना सीख लिया। इसके बाद नौकरी पर आने के बाद जनता के लोगों से संवाद और समाचार पढ़ने से पूरी तरह से हिंदी लिखने और बोलने लगे। अब दिक्कत नहीं होती है।

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सीखने के लिए उत्तर भारत के छात्र बनाए साथी : अशोक वेंकट
एसपी आरए अशोक  वेंकट के.ने बताया कि वो आंध्र प्रदेश के तिरुपति के निवासी हैं। वर्ष 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। प्रदेश में मुख्य भाषा के रूप में तेलगू है, जबकि पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक दूसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाई जाती है। स्कूलों में हिंदी व्याकरण सिखाई जाती है। इससे लिखना तो सीख सकते थे लेकिन बोलना नहीं आ पाता। उनके हिंदी में 90 प्रतिशत तक अंक आते थे। 

एग्रीकल्चर में बीएससी करने के लिए जिस कॉलेज में प्रवेश लिया, उसमें उत्तर भारत के छात्रों की संख्या अधिक थी। हिंदी बोलना सीखने के लिए उनसे दोस्ती की। पुणे में एमबीए के दौरान भी ऐसा किया। अब हिंदी बोलने और लिखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। वह प्रशिक्षण के बाद से ही मीडिया को जानकारी खुद ही देने लगे हैं।

लोगों को आपस में जोड़ने वाली भाषा है हिंदी: ए मनिकन्डन 
तमिलनाडु जैसे गैर हिंदी भाषी राज्य से आने वाले 2017 बैच के आईएएस अधिकारी ए मनिकन्डन आगरा में मुख्य विकास अधिकारी हैं। तमिल उनकी क्षेत्रीय भाषा है, परंतु अब वह हिंदी में रच-बस गए हैं। उन्होंने बताया कि मैं मलयालम को समझता हूं। तेलगू, अंग्रेजी और हिंदी बोलता हूं। हिंदी लोगों को आपस में जोड़ने वाली भाषा है।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को हिंदी जरूर समझनी चाहिए। साहित्य का जो भंडार हिंदी में है वह अन्य भाषाओं में अधिक नहीं। समय और संस्कृति से भाषा में बदलाव आया है। जो हिंदी दो हजार साल पहले बोली जाती थी अब वह परिष्कृत हो गई है। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे हिंदी की सेवा करने का अवसर मिला।

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