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आगरा: 'अपनों' को खोने वाले दो-ढाई महीने से काट रहे चक्कर, नहीं मिल रहा मृत्यु प्रमाणपत्र
Sun, 03 Jan 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 03 Jan 2021 12:03 AM IST
सार
- एसएन मेडिकल कॉलेज में हर रोज 10-15 मृतकों के परिजनों को होना पड़ रहा परेशान
- परिजन बोले- बीमा, खतौनी समेत अन्य कार्यों में इसकी पड़ती है जरूरत
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एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में अपनों को खोने वाले लोगों को मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज में परेशान होना पड़ रहा है। एक सप्ताह बाद प्रमाणपत्र ले जाने की बात कहकर बुलाते हैं और लोग दो-ढाई महीने से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहा। इस कारण लोगों के बीमा, खेती के खसरा-खतौनी, समेत अन्य कार्य रुके हुए हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज में कोविड अस्पताल, मेडिसिन विभाग, बाल रोग विभाग, सर्जरी विभाग, इमरजेंसी, कैंसर रोग विभाग, टीबी एवं क्षय रोग और स्त्री रोग विभाग में मौत होने पर एसआईसी कार्यालय रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके आधार पर प्रमाणपत्र तैयार होता है। लेकिन, इन विभागों से रिपोर्ट भेजने में ही 15-20 दिन लग रहे हैं। इससे रिपोर्ट की फीडिंग नहीं हो पा रही। इसके चलते दूरदराज से आने वाले परिजनों को परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे रोजाना 10 से 15 मामले हैं।
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विभागों से रिपोर्ट आने में देरी से काम प्रभावित हो रहा
एसएन कॉलेज के एसआईसी डॉ. राजेंद्र सिंह मौर्य ने कहा कि उनके यहां पर रिपोर्ट आते ही 24 घंटे में फीडिंग कर दी जाती है, लेकिन विभागों से ही संबंधित मरीज की रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। इससे प्रमाणपत्र बनाने का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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दो महीने से चक्कर कटवा रहे हैं
मलपुरा के रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि मेरे ससुर की एसएन मेडिकल कॉलेज में 17 सिंतबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जरूरी है। दो महीने से चक्कर कटवा रहे हैं।
बहाना बनाकर लौटा देते हैं
बरहन के सुनील कुमार ने बताया कि मेरे भाई के मृत्यु प्रमाणपत्र की बीमा लेने के लिए जरूरत पड़ रही है। सेंटर पर आने पर कभी इंटरनेट नहीं, कभी स्टाफ नहीं की बात कहते हुए लौटा देते हैं।
परेशान कर रहे हैं
मथुरा निवासी कैलाश चंद्र ने बताया कि भाई की मौत एसएन मेडिकल कॉलेज में 10 दिसंबर को हो गई थी। सात दिन बाद मृत्यु प्रमाणपत्र लेने के लिए कहा, लेकिन अभी तक प्रमाणपत्र नहीं बन पाया है। परेशान कर रहे हैं।
मलपुरा के रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि मेरे ससुर की एसएन मेडिकल कॉलेज में 17 सिंतबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जरूरी है। दो महीने से चक्कर कटवा रहे हैं।
बहाना बनाकर लौटा देते हैं
बरहन के सुनील कुमार ने बताया कि मेरे भाई के मृत्यु प्रमाणपत्र की बीमा लेने के लिए जरूरत पड़ रही है। सेंटर पर आने पर कभी इंटरनेट नहीं, कभी स्टाफ नहीं की बात कहते हुए लौटा देते हैं।
परेशान कर रहे हैं
मथुरा निवासी कैलाश चंद्र ने बताया कि भाई की मौत एसएन मेडिकल कॉलेज में 10 दिसंबर को हो गई थी। सात दिन बाद मृत्यु प्रमाणपत्र लेने के लिए कहा, लेकिन अभी तक प्रमाणपत्र नहीं बन पाया है। परेशान कर रहे हैं।