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छह टीमें करेंगीं जिले के 837 उर्वरक विक्रेताओं की जांच
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मैनपुरी। उर्वरक विक्रेताओं के पास उपलब्ध उर्वरक के स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका पर शासन के आदेश के बाद जिलाधिकारी ने छह जांच समितियों का गठन कर जांच करने के लिए पत्र जारी किया है। ये जांच टीमें कुल 837 उर्वरक विक्रेताओं की जांच करेंगी। कहीं भी गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस निरस्त कर कार्रवाई की जाएगी।
कृषि प्रधान जिला होने के चलते मैनपुरी में उर्वरकों की खपत भी अधिक है। उर्वरकों की कालाबाजारी और ओद्यौगिक प्रयोग रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके चलते ई-पॉस मशीन से ही उर्वरकों की बिक्री अनिवार्य की गई है। लेकिन जिले में इसका उल्लंघन किया जा रहा है। इससे उर्वरकों का स्टॉक वास्तविक से अधिक प्रदर्शित हो रहा है। इसकी जांच के लिए अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने आदेश दिए थे। आदेश पर जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने जांच के लिए छह टीमें गठित की हैं।
ये टीमें जिले के 837 उर्वरक विक्रेताओं की दुकान पर जाकर जांच करेंगे। वे दुकान पर उपलब्ध वास्तवित स्टॉक और ई-पॉस मशीन में उपलब्ध स्टॉक की जांच करेंगे। इसमें अगर गड़बड़ी मिलती है तो विक्रेता का लाइसेंस निरस्त कर कार्रवाई की जाएगी। जांच शुरू होने से उर्वरक विक्रेताओं में खलबली मची है।
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ये हैं जांच टीमें
जिलाधिकारी मजहेंद्र बहादुर सिंह ने तहसीलवार जांच के लिए तीन सदस्यी समितियों का गठन किया है। मैनपुरी तहसील के लिए उप कृषि निदेशक डीवी सिंह, भोगांव तहसील के लिए जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह, कुरावली के लिए जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉॅ. गगनदीप सिंह, घिरोर तहसील के लिए जिला उद्यान अधिकारी अनीता सिंह, करहल के लिए सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता विवेक यादव और किशनी तहसील के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। सभी जांच समितियों में क्षेत्रीय सहायक विकास अधिकारी कृषि और क्षेत्रीय सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा को भी शामिल किया गया है।
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पहले भी मिली थी गड़बड़ी
पहले भी एक बार उर्वरक के स्टॉक में गड़बड़ी मिल चुकी है। इसके लिए शासन ने जनवरी में अवगत कराया था। इसमें उर्वरक विक्रेताओं ने उर्वरक का स्टॉक तो बेच दिया था, लेकिन उसकी बिक्री ई-पॉस मशीन से नहीं की थी। इसके चलते शासन के पास उर्वरक की उपलब्धता दिखाई दे रही थी, जबकि जिले में उतना स्टॉक था ही नहीं।
शासन के पत्र पर जिलाधिकारी ने उर्वरक के स्टॉक जांचने के लिए छह टीमें गठित की हैं। ये टीमें दुकानों पर जाकर पॉस मशीन का स्टॉक और वास्तविक स्टॉक की जांच कर रिपोर्ट देंगी। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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कृषि प्रधान जिला होने के चलते मैनपुरी में उर्वरकों की खपत भी अधिक है। उर्वरकों की कालाबाजारी और ओद्यौगिक प्रयोग रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके चलते ई-पॉस मशीन से ही उर्वरकों की बिक्री अनिवार्य की गई है। लेकिन जिले में इसका उल्लंघन किया जा रहा है। इससे उर्वरकों का स्टॉक वास्तविक से अधिक प्रदर्शित हो रहा है। इसकी जांच के लिए अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने आदेश दिए थे। आदेश पर जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने जांच के लिए छह टीमें गठित की हैं।
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ये टीमें जिले के 837 उर्वरक विक्रेताओं की दुकान पर जाकर जांच करेंगे। वे दुकान पर उपलब्ध वास्तवित स्टॉक और ई-पॉस मशीन में उपलब्ध स्टॉक की जांच करेंगे। इसमें अगर गड़बड़ी मिलती है तो विक्रेता का लाइसेंस निरस्त कर कार्रवाई की जाएगी। जांच शुरू होने से उर्वरक विक्रेताओं में खलबली मची है।
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ये हैं जांच टीमें
जिलाधिकारी मजहेंद्र बहादुर सिंह ने तहसीलवार जांच के लिए तीन सदस्यी समितियों का गठन किया है। मैनपुरी तहसील के लिए उप कृषि निदेशक डीवी सिंह, भोगांव तहसील के लिए जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह, कुरावली के लिए जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉॅ. गगनदीप सिंह, घिरोर तहसील के लिए जिला उद्यान अधिकारी अनीता सिंह, करहल के लिए सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता विवेक यादव और किशनी तहसील के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। सभी जांच समितियों में क्षेत्रीय सहायक विकास अधिकारी कृषि और क्षेत्रीय सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा को भी शामिल किया गया है।
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पहले भी मिली थी गड़बड़ी
पहले भी एक बार उर्वरक के स्टॉक में गड़बड़ी मिल चुकी है। इसके लिए शासन ने जनवरी में अवगत कराया था। इसमें उर्वरक विक्रेताओं ने उर्वरक का स्टॉक तो बेच दिया था, लेकिन उसकी बिक्री ई-पॉस मशीन से नहीं की थी। इसके चलते शासन के पास उर्वरक की उपलब्धता दिखाई दे रही थी, जबकि जिले में उतना स्टॉक था ही नहीं।
शासन के पत्र पर जिलाधिकारी ने उर्वरक के स्टॉक जांचने के लिए छह टीमें गठित की हैं। ये टीमें दुकानों पर जाकर पॉस मशीन का स्टॉक और वास्तविक स्टॉक की जांच कर रिपोर्ट देंगी। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।