आगरा: परिवार परामर्श केंद्र में मिटे पति-पत्नी के मतभेद, छह परिवारों में लौटीं खुशियां
शक में बिखरे छह और परिवारों में रविवार को खुशियां लौट आईं। परिवार परामर्श केंद्र में पति-पत्नी के गिले शिकवे मिट गए। इसके बाद वे सभी खुशी-खुशी घर लौट गए।
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आगरा के परिवार परामर्श केंद्र में रविवार को छह दंपतियों के जीवन में फिर खुशियां लौटीं। पुलिस लाइन स्थित परिवार परामर्श केंद्र पर पति-पत्नी में समझौता हो गया और दोनों साथ में घर गए। आठ मामलों में समझौता नहीं हो सका। इन मामलों में एफआईआर की गई।
परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी कमर सुल्ताना ने बताया कि रविवार को 40 मामले आए। छह समझौते होने के साथ ही आठ मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। दस मामलों में दूसरा पक्ष केंद्र नहीं पहुंचा, जबकि 16 मामलों की सुनवाई अगली तिथि के लिए टाल दी गई। पांच ऐसे मामले भी पहुंचे, जिनमें फैसले होने में देर हो रही है।
काउंसिलिंग से शक हुआ दूर
दो साल पहले श्रद्धा और अजय (काल्पनिक नाम) का प्रेम विवाह हुआ। शक के चलते दोनों कुछ महीनों बाद ही एक-दूसरे से अलग हो गए। रविवार को समझौते के बाद श्रद्धा की आंखों में आंसू थे। बोलीं कि दोनों ही एक-दूसरे से दूर रहने के बाद खुश नहीं थे। केंद्र पर हुई काउंसिलिंग के बाद शक दूर होने से खुशियां लौट आई हैं।
ससुर का व्यवहार ठीक नहीं
मोनिका और सुरेश (काल्पनिक नाम) के बीच समझौता नहीं हो पाया। मोनिका का कहना था कि ससुर का व्यवहार ठीक नहीं है। काउंसलर ने समझाया लेकिन बात नहीं बनी। काउंसलर ने उनको दोबारा बुलाया है। उनका कहना था कि एक-दो बार की बैठक में मामले में समझौता होने की उम्मीद है।
काउंसलर डॉ. अमित गौड़ ने बताया कि कई मामलों में एक घंटे में शक दूर कर दिया जाता है। कई मामलों में चार-पांच बार के बाद ही हम लोग समझौता कराने की स्थिति में पहुंच पाते हैं। शादी के कुछ महीनों बाद ही विवाद के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा आ रही है।
50 प्रतिशत मामलों में फिर जुड़ जाते हैं रिश्ते
केंद्र की काउंसलर प्रतिभा जिंदल ने बताया कि परामर्श केंद्र पर एक महीने में औसतन 150 मामले आ रहे हैं। करीब पचास प्रतिशत मामलों में काउंसिलिंग के बाद समझौता हो जाता है। हमारी कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा मामलों में समझौता हो जाए। कोई पक्ष नहीं मानता तो एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।