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कोलकाता रेप-मर्डर केस: हड़ताल से हालात बिगड़े, जांच-भर्ती सब बंद; नहीं मिल रहा इलाज...मरीज बीमार आए-बीमार लौटे

Thu, 22 Aug 2024 09:01 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 22 Aug 2024 09:01 AM IST
सार

कोलकाता रेप-मर्डर केस को लेकर आगरा में डॉक्टरों की हड़ताल से हालात बिगड़ गए हैं। जांच-भर्ती सब बंद है। मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। वह बीमार अस्पचाल पहुंचे और बीमार ही लौट गए। 

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situation has worsened due to 10-day strike of junior doctors of SN Medical College in Agra
बारिश में डॉ धरने पर एसएन मेडिकल कॉलेज ओपीडी। - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की 10 दिनों से चल रही हड़ताल से हालात बिगड़ गए हैं। ओपीडी बंद रहने से बुधवार को भी मरीजों को इलाज नहीं मिला, जांचें भी नहीं हो सकीं। घंटों इंतजार कर मरीज लौट गए। नए मरीज भर्ती नहीं हो रहे हैं। करीब 50 फीसदी बेड खाली हो गए हैं।

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एसएन में सर्जरी, मेडिसिन, हड्डी, बाल रोग, टीबी एवं वक्ष रोग विभाग, ईएनटी समेत अन्य विभाग में 976 बेड हैं। सामान्य दिनों में 70-80 फीसदी बेड भरे रहते हैं। कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से दुष्कर्म, हत्या के विरोध में 10 दिनों से ओपीडी बंद है। औसतन ओपीडी के जरिए एक दिन में 60-65 मरीज भर्ती होते थे।

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प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि नए मरीज भर्ती नहीं होने और पुराने मरीज डिस्चार्ज हाेने से बेड खाली हो रहे हैं। अभी 976 में से करीब 500 बेड पर ही मरीज हैं। सुप्रीम कोर्ट की दखल से उम्मीद है कि हड़ताल जल्द खत्म हो जाएगी।
 

इमरजेंसी, जिला अस्पताल में बढ़े मरीज

हड़ताल के चलते इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या डेढ़ गुना है। गंभीर मरीजों को 8-10 घंटे में संबंधित वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं। इमरजेंसी प्रभारी डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि हड़ताल के चलते दूसरे जिलों के से भी गंभीर मरीज आ रहे हैं। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि एसएन में हड़ताल के चलते ओपीडी में 40-50 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
 
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डॉक्टर साहब...बुखार आ रहा है, दवा लिख दो

डॉक्टर साहब... तेज बुखार है, दूर से आए हैं। किराया भी खर्च हुआ, देख लेंगे तो मेहरबानी होगी। धरना दे रहे डॉक्टरों से मरीजों ने गुहार लगाई। इस पर डॉक्टरों ने धरना स्थल पर ही कई मरीजों को देखा। 
 

फिरोजाबाद की सुनीता अपनी सास की आंख दिखाने आई, कहा कि दर्द और जलन हो रही है। धरने पर बैठे डॉक्टर से विनती की तो उन्होंने देखा और कुछ दवा भी दिलवाई। दहतौरा के रमेश चंद ने बुखार, छाती में जकड़न और मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बताई। इनको भी सादा पर्चे पर दवाएं लिख दीं।

आंकड़े एक नजर में...

  • 2500: मरीज औसतन रोजाना आते।
  • 500: मरीज जांच कराने वाले होते।
  • 976: बेड हैं एसएन के विभागों में।
  • 500: बेड पर मरीज हैं भर्ती।
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