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सिख धर्म के चार गुरुओं के इतिहास से जुडे़ हैं आगरा के गुरुद्वारे, सहेजी जाएगी शौर्यगाथा
Sun, 19 Jan 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 19 Jan 2020 12:02 AM IST
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गुरुद्वारा गुरु का ताल में रखीं गुरु की चरण पादुकाएं
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव के साथ बैठक करते हुए आगरा में सिख धर्म के गुरुओं से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ते हुए सिख सर्किट और शोध केंद्र बनाने पर विचार किया है। योगी सरकार की इस योजना का आगरा में सिख समाज ने स्वागत किया है।
समाज के लोगों ने कहा कि आगरा की धरती पर सिख धर्म के चार गुरुओं के चरण पड़े हैं। यहां चार गुरुद्वारों का एतिहासिक महत्व है। सिख म्यूजियम और शोध केंद्र बनने से एतिहासिक महत्व के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। नई पीढ़ी सिखों की कुर्बानियों के बारे में जान सकेगी।
जिले की बात करें तो यहां 34 गुरुद्वारा हैं, इनमें चार गुरु आगरा आए थे। इनमें गुरुद्वारा लोहामंडी में पहले गुरु नानक देव जी महाराज आए थे। गुरुद्वारा दमदमा साहिब में छठे गुरु हरगोविंद साहिब, गुरुद्वारा माईथान में माता जस्सी ने नवें गुरु तेगबहादुर को कपड़े का थान दिया था, तभी से इसका नाम माईथान पड़ गया।
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समाज के लोगों ने कहा कि आगरा की धरती पर सिख धर्म के चार गुरुओं के चरण पड़े हैं। यहां चार गुरुद्वारों का एतिहासिक महत्व है। सिख म्यूजियम और शोध केंद्र बनने से एतिहासिक महत्व के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। नई पीढ़ी सिखों की कुर्बानियों के बारे में जान सकेगी।
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जिले की बात करें तो यहां 34 गुरुद्वारा हैं, इनमें चार गुरु आगरा आए थे। इनमें गुरुद्वारा लोहामंडी में पहले गुरु नानक देव जी महाराज आए थे। गुरुद्वारा दमदमा साहिब में छठे गुरु हरगोविंद साहिब, गुरुद्वारा माईथान में माता जस्सी ने नवें गुरु तेगबहादुर को कपड़े का थान दिया था, तभी से इसका नाम माईथान पड़ गया।
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गुरुद्वारा गुरु का ताल में मंजी साहिब से गुरु तेग बहादुर साहिब ने गिरफ्तारी दी थी। हाथीघाट गुरुद्वारा में दसवें गुरु गोविंद सिंह महाराज के पावन चरण पड़े। इन गुरुद्वारों का एतिहासिक और धार्मिक महत्व होने के साथ ही यहां देश-दुनिया से संगत भी मत्था टेकने आती है। सिख म्यूजियम और शोध केंद्र में सिख संगत ने सहयोग करने को कहा है।
सिखों के इतिहास के बारे में मिलेगी जानकारी
गुरुद्वारा गुरु का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह ने कहा कि सिख गुरुओं ने देश और धर्म की रक्षा के लिए कुर्बानियां दीं। आगरा में कई गुरुद्वारे हैं, जिसमें सिख गुरु आए थे। सिख म्यूजियम स्थापित होगा तो इससे आगरा का एतिहासिक महत्व और बढ़ेगा। नई पीढ़ी भी वैभवशाली इतिहास के बारे में जान सकेगी।
गुरुद्वारा माईथान के कंवलदीप सिंह ने कहा कि मुगलों का ही इतिहास अभी तक पढ़ने मिला। देश-धर्म की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा सिखों की कुर्बानी हुई। शहादत की गौरवगाथा इतिहास में चंद लाइनों तक ही सीमित कर दी, लेकिन म्यूजियम खुलने से सिखों के गौरवशाली इतिहास के बारे में लोग जानेंगे।
सिखों के इतिहास के बारे में मिलेगी जानकारी
गुरुद्वारा गुरु का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह ने कहा कि सिख गुरुओं ने देश और धर्म की रक्षा के लिए कुर्बानियां दीं। आगरा में कई गुरुद्वारे हैं, जिसमें सिख गुरु आए थे। सिख म्यूजियम स्थापित होगा तो इससे आगरा का एतिहासिक महत्व और बढ़ेगा। नई पीढ़ी भी वैभवशाली इतिहास के बारे में जान सकेगी।
गुरुद्वारा माईथान के कंवलदीप सिंह ने कहा कि मुगलों का ही इतिहास अभी तक पढ़ने मिला। देश-धर्म की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा सिखों की कुर्बानी हुई। शहादत की गौरवगाथा इतिहास में चंद लाइनों तक ही सीमित कर दी, लेकिन म्यूजियम खुलने से सिखों के गौरवशाली इतिहास के बारे में लोग जानेंगे।