कार्तिक उत्सव: यमुना के चीर घाट पर श्री राधा वृंदावन चंद्र ने किया नौका विहार, भक्तों ने बरसाए पुष्प
वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर में चल रही तीन दिवसीय कार्तिक उत्सव में इस्कॉन बेंगलुरु के विभिन्न केंद्रों से श्रद्धालु आए हैं। भक्तों ने बताया कि कार्तिक मास अन्य मासों की तुलना में अत्यंत पावन है। भगवान श्रीकृष्ण ने दामोदर लीला इसी मास में की थी। इस मास को वैष्णव भक्त दामोदर मास भी कहते हैं।
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मथुरा के वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय कार्तिक उत्सव के दूसरे दिन रविवार को श्री राधा वृंदावन चंद्र को नौका में विराजमान कर यमुना विहार कराया गया। इस दौरान श्री राधा वृंदावन चंद्र को नई पोषक धारण करा उन्हें पालकी के माध्यम से मंदिर परिसर से चीर घाट स्थित यमुना तट पर लाया गया।
यहां भक्तों द्वारा पुष्प अर्पण कर उनका भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर दिव्य पुष्पों एवं दुधिया रोशनी से युक्त नाव में विराजमान होकर राधा वृन्दावन चंद्र ने यमुना में नौका विहार किया। इस्कॉन बेंगलुरु के विभिन्न केंद्रों से आए भक्तों ने हरिनाम नाम संकीर्तन के साथ श्री राधा वृंदावन चंद्र को यमुना में नौका विहार कराया गया।
कार्तिक उत्सव के अंतिम चरण में मंदिर के भक्तों ने अपने आराध्य श्री राधा वृंदावन चंद्र के समझ दामोदर अष्टकम का गान करते हुए यमुना जी में दीपदान किया। कार्यक्रम के बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली सहित विभन्न राज्यों से आए 500 भक्तों को प्रसाद वितरण भी किया गया।
देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं ने की वृंदावन परिक्रमा
देवोत्थान एकादशी पर वृंदावन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन करने के बाद वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा शुरू की। रविवार सुबह से परिक्रमा मार्ग पर भक्तों का रेला उमड़ पड़ा, जिससे अटूट मानव श्रृंखला बन गई। पूरी नगरी राधे-राधे और बांकेबिहारी के जयकारों से गूंजती रही।
रविवार को सुबह नगर के संतों के साथ अधिकारियों ने वृंदावन की पंच कोसीय परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के तत्वावधान में 10 नवंबर से ब्रज रज महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत कार्तिक शुक्लपक्ष एकादशी पर संतों के सानिध्य में अधिकारियों ने नगर की पंच कोसीय परिक्रमा की।
प्राचीन सुदामा कुटी आश्रम से गौसेवी सन्त सुदामादास महाराज की प्रतिमा के पूजन के बाद राधे-राधे के जयकारे से परिक्रमा शुरू हुई। हरिनाम संकीर्तन करते हुए संतजन परिक्रमा की अगुआई कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह संतों का स्वागत किया। केशीघाट पर परिक्रमार्थियों द्वारा मां यमुना महारानी का विधिवत पूजन अर्चन किया।