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Taj Mahotsav: जिसने मारा है पीठ पर खंजर, दोस्त तो है मगर...दोस्ती पर बाराबंकवी का शेर, मायने हैं बहुत गहरे
Mon, 24 Feb 2025 01:40 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 24 Feb 2025 01:40 PM IST
सार
सूरसदन में आयोजित हुए हिंद मुशायरे में नामचीन शायरों ने एक के बाद एक बेहतरीन कलाम पेश कर जमकर वाहवाही लूटी। इस दौरान डॉ. अंजुम बाराबंकवी के द्वारा दोस्ती पर ऐसा कलाम पेश किया, जिसने सभी का दिल जीत लिया।
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कुल हिंद मुशायरा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
ताज महोत्सव के तहत सूरसदन प्रेक्षागृह में रविवार की शाम कुल हिंद मुशायरे में नामचीन शायरों ने अपने कलाम से वाहवाही लूटी। डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने फरमाया ‘मैं तो मामूली सा मिट्टी का दिया हूं फिर भी लोग करते हैं हवाओं से शिकायत मेरी, जिसने मारा है पीठ पर खंजर, दोस्त तो है मगर पुराना नहीं’। मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने शमा रोशन कर मुशायरे का आगाज किया।
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शायर कलीम समर ने कुछ यूं बयां किया, ‘मरने से क़ब्ल बीवियां मेरी बची थीं तीन, जो कुछ भी जायदाद थी तीनों में बांट दी’। सदारत कर रहे डॉ. हिलाल बदायूंनी ने अर्ज किया ‘मुकद्दर में हमारे कब है बिस्तर, सफर में नींद पूरी कर रहे हैं’। सलीम अमरोहवी ने पेश किया ‘उसने वादा किया है आने का, राह हम क्यों ना उम्रभर देखें’। शाहिद अंजुम ने अपने शेर से ऊंचाइयों पर पहुंचाया ‘हवा किसी की तरफ देर तक नहीं रहती, चराग़ सोच रहे हैं हवा हमारी है’। डॉ. नदीम शाद ने कुछ यूं कहा ‘ये नाक़दरी हमारी इसलिए है, तेरा होने में जल्दी कर गए हम’।
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डॉ. साबिर बेहटवी ने कलाम पढ़ा ‘भले ज़रा सा हो लेकिन ज़रूर होता है, बुलंदियों पे पहुंचकर ग़ुरूर होता है’। कुंवर जावेद ने बयां किया ‘सितम तो ये है उसी से दुआ सलाम नहीं, वो जिसके घर के बराबर में घर हमारा है’। डाॅ. सबा बलरामपुरी ने यह सुनाकर दाद पाई ‘ना सितारे फूल जुगनू ना तो आफताब आए, तेरी मुंतज़िर हैं आंखें इन्हें तेरा ख़्वाब आए’। अतुल अजनबी, दाऊद इकबाल ने भी अपनी रचनाओं से वाहवाही लूटी।
देर रात तक मुशायरा चलता रहा। संचालन शायर अमीर अहमद एडवोकेट ने किया। तरुण पाठक, कर्नल जीएम ख़ान, डॉ. त्रिमोहन तरल, अब्दुल क़ुद्दूस ख़ां, हरीश चिमटी, भरतदीप माथुर, ज़ाकिर सरदार, पूनम ज़ाकिर, डॉ. नसरीन बेगम, मोहम्मद हुसैन, समी आगाई, महमूद उज्जमा, शिवराज यादव आदि ने शायरों का इस्तकबाल किया।