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यूपी: उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ वैश्य समाज में आक्रोश, माफी की मांग; एमएलसी प्रत्याशी पर की थी टिप्पणी
Sun, 25 Oct 2026 10:53 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 25 Oct 2026 10:53 PM IST
सार
वैश्य समाज ने प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंत्री से सार्वजनिक माफी मांगने मांग की है।
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वैश्य समाज ने उच्च शिक्षा मंत्री की टिप्पणी का किया विरोध।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
शिक्षक एमएलसी एवं सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की टिप्पणी से वैश्य समाज में आक्रोश है। वैश्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने रविवार को संजय प्लेस में बैठक की। मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की।
वैश्य समाज के विभिन्न संगठनों की बैठक में टिप्पणी को मंत्री पद की गरिमा और सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध बताया। व्यापारी नेता रमन लाल गोयल ने कहा कि वैश्य समाज के स्वाभिमान को चुनौती देना और युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेना उचित नहीं है।
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युवा अग्रवाल संगठन के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल और नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के कोषाध्यक्ष विनय मित्तल ने दो टूक कहा कि वैश्य समाज किसी राजनीतिक दल का बंधुआ मजदूर नहीं है। अगर मंत्री अपनी भाषा की मर्यादा नहीं समझते, तो समाज अपनी लोकतांत्रिक शक्ति से उन्हें उनकी राजनीतिक हैसियत का अहसास कराएगा।
वैश्य एकता परिषद के गिरीश चंद गोयल और आगरा विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य मदन गर्ग ने कहा कि भाजपा आलाकमान को अनुशासनहीन नेताओं पर समय रहते लगाम कसनी चाहिए। उच्च शिक्षा जैसे विभाग के मंत्री की टिप्पणी से वैश्य समाज आहत हुआ है। मंत्री सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर खेद व्यक्त नहीं करते हैं तो आगामी चुनावों में समाज एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराएगा।
सम्मान दीजिए, सम्मान पाइए
वैश्य समाज के रवि अग्रवाल और हरिओम अग्रवाल ने कहा कि देश-प्रदेश की आर्थिक रीढ़ और रोजगार सृजन में अग्रणी वैश्य समाज किसी का बंधुआ मजदूर नहीं है। हर नागरिक अपने विवेक से राजनीतिक निर्णय लेने को स्वतंत्र है। हमारी चुप्पी को मजबूरी न समझा जाए, सम्मान दीजिए-सम्मान पाइए यही हमारा मूल मंत्र है।
तथ्य को तोड़-मरोड़कर किया जा रहा पेश
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कुछ लोग बयान को तोड़-मरोड़कर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार ने प्रश्न किया था कि सपा प्रत्याशी और अन्य पदाधिकारी आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा बूथ कैप्चर करा रही है। इस पर आपको क्या कहना है। जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि सपा के लोगों का भाजपा पर बूथ कैप्चर का आरोप लगाना वैसा ही है जैसे कोई सती पर अंगुली उठाए। इसमें किसी व्यक्ति या समाज विशेष को नहीं बल्कि सपा की संस्कृति पर चोट की गई।
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वैश्य समाज के विभिन्न संगठनों की बैठक में टिप्पणी को मंत्री पद की गरिमा और सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध बताया। व्यापारी नेता रमन लाल गोयल ने कहा कि वैश्य समाज के स्वाभिमान को चुनौती देना और युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेना उचित नहीं है।
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युवा अग्रवाल संगठन के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल और नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के कोषाध्यक्ष विनय मित्तल ने दो टूक कहा कि वैश्य समाज किसी राजनीतिक दल का बंधुआ मजदूर नहीं है। अगर मंत्री अपनी भाषा की मर्यादा नहीं समझते, तो समाज अपनी लोकतांत्रिक शक्ति से उन्हें उनकी राजनीतिक हैसियत का अहसास कराएगा।
वैश्य एकता परिषद के गिरीश चंद गोयल और आगरा विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य मदन गर्ग ने कहा कि भाजपा आलाकमान को अनुशासनहीन नेताओं पर समय रहते लगाम कसनी चाहिए। उच्च शिक्षा जैसे विभाग के मंत्री की टिप्पणी से वैश्य समाज आहत हुआ है। मंत्री सार्वजनिक रूप से अपने बयान पर खेद व्यक्त नहीं करते हैं तो आगामी चुनावों में समाज एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराएगा।
सम्मान दीजिए, सम्मान पाइए
वैश्य समाज के रवि अग्रवाल और हरिओम अग्रवाल ने कहा कि देश-प्रदेश की आर्थिक रीढ़ और रोजगार सृजन में अग्रणी वैश्य समाज किसी का बंधुआ मजदूर नहीं है। हर नागरिक अपने विवेक से राजनीतिक निर्णय लेने को स्वतंत्र है। हमारी चुप्पी को मजबूरी न समझा जाए, सम्मान दीजिए-सम्मान पाइए यही हमारा मूल मंत्र है।
तथ्य को तोड़-मरोड़कर किया जा रहा पेश
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कुछ लोग बयान को तोड़-मरोड़कर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार ने प्रश्न किया था कि सपा प्रत्याशी और अन्य पदाधिकारी आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा बूथ कैप्चर करा रही है। इस पर आपको क्या कहना है। जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि सपा के लोगों का भाजपा पर बूथ कैप्चर का आरोप लगाना वैसा ही है जैसे कोई सती पर अंगुली उठाए। इसमें किसी व्यक्ति या समाज विशेष को नहीं बल्कि सपा की संस्कृति पर चोट की गई।