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राम मंदिर न बनने से लगता है देश अभी आजाद नहीं: निश्चलानंद सरस्वती
Thu, 10 Oct 2019 12:34 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 10 Oct 2019 12:34 AM IST
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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या में यथास्थान मंदिर बनाकर उसमें भगवान राम को प्रतिष्ठित करना चाहिए। लेकिन राममंदिर की सुनवाई में जिस तरह के तर्क-वितर्क दिए जा रहे हैं, उससे लगता नहीं कि देश अभी आजाद हुआ है। यह बात पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने व्यक्त किए। वह चैतन्य विहार स्थित अपने आश्रम में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
निश्चलानंद ने कहा कि जिन लोगों ने किसी भी काल में मंदिरों को ध्वस्त किया उन्हें पराक्रमी नहीं बल्कि आतंकवादी माना जाना चाहिए, देश को संयुक्त राष्ट्र संघ से इन्हें आतंकवादी घोषित करने की मांग करनी चाहिए।
पुराणों को राम जन्म का प्रमाण न मानने को उन्होंने वेदनापूर्ण बताया और कहा कि आस्था और श्रद्धा के बिना राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा बोले कि राममंदिर न बनने देना सिद्ध करता है कि संविधान परिपूर्ण नहीं है, विदेशों की नकल से युक्त है।
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निश्चलानंद ने कहा कि जिन लोगों ने किसी भी काल में मंदिरों को ध्वस्त किया उन्हें पराक्रमी नहीं बल्कि आतंकवादी माना जाना चाहिए, देश को संयुक्त राष्ट्र संघ से इन्हें आतंकवादी घोषित करने की मांग करनी चाहिए।
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पुराणों को राम जन्म का प्रमाण न मानने को उन्होंने वेदनापूर्ण बताया और कहा कि आस्था और श्रद्धा के बिना राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा बोले कि राममंदिर न बनने देना सिद्ध करता है कि संविधान परिपूर्ण नहीं है, विदेशों की नकल से युक्त है।
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