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उग्रवादी हमले में बाह का लाल शहीद
उग्रवादी हमले में बाह का लाल शहीद
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:18 AM IST
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उग्रवादी हमले में बाह का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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असम के तिनसुखिया में शनिवार तड़के हुये उग्रवादी हमले में बाह के मुल्तान सिंह समेत तीन जवान शहीद और चार जवान घायल हो गए। शहादत की खबर लगते ही बाह क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार सुबह बाह के बिजौली गांव में शहीद को अंतिम विदाई दी जायेगी।
खेड़ा राठौर के गांव भगवानपुरा निवासी पूर्व सैनिक दिवंगत उम्मेद सिंह तोमर का परिवार अब बिजौली में रहता है। उनके दूसरे नंबर के पुत्र मुल्तान सिंह (42) असम के उग्रवाद प्रभावित तिनसुखिया में तैनात थे। 15 कुमायूं रेजीमेंट की उनकी यूनिट तिनसुखिया में ऑपरेशन पर थी। शनिवार सुबह लगभग साढे़ पांच बजे माइंस ब्लास्ट कर यूनिट पर उग्रवादियों ने हमला बोल दिया। हमले में मुल्तान सिंह समेत तीन जवान शहीद हो गये। जबकि चार जवान घायल हो गये। मुल्तान सिंह की शहादत की खबर उनके घर बिजौली में शनिवार की रात मिलते ही पत्नी सुमन देवी बेसुध हो गईं। पुत्र विनय सिंह (10), पुत्री दीक्षा (12) की आंखों में आंसू नहीं रुक रहे हैं। परिवारीजनों ने बताया कि मुल्तान सिंह 1994 में भर्ती हुये थे। अपने 23 साल के सेवाकाल में वे नागालैंड, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे। आतंकियों से लोहा लेने वाला जांबाज उग्रवादी हमले में शहीद हो गया। रविवार को बाह क्षेत्र में वीर सपूत के शहीद होने से शोक की लहर दौड़ गई। जिसने भी सुना उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। शहीद की अंत्येष्टि बिजौली में की जायेगी। तिरंगे में लिपटा उनका शव रविवार शाम आगरा पहुंचेगा। आगरा से उनके घर पहुंची पैरा मिलिट्री की टीम के सूबेदार लाखन सिंह ने अधिकारियों से बात कर परिवार की मांग पर सोमवार सुबह अंत्येष्टि करने का निर्णय लिया है।
घर आना था मुल्तान सिंह को, आ गई शहादत की खबर
बाह। शनिवार को वीर सपूत मुल्तान सिंह का घर आने का कार्यक्रम तय था। छुट्टी के साथ ही उन्होंने रिजर्वेशन भी करा लिया था। परिवार उनकी वाट जोह रहा था लेकिन उनके आने की बजाय शनिवार की रात शहादत की खबर आई तो किसी को सहज विश्वास नहीं हुआ। पुष्टि होने पर पूरा परिवार मातम में डूब गया।
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दो दिन पहले मुल्तान सिंह तोमर से फोन पर हुई बातचीत का उल्लेख करते हुये वीरनारी सुमन देवी ने बताया कि उन्होंने शनिवार को उग्रवादियों के खिलाफ चल रहा ऑपरेशन पूरा होने पर छुट्टी मिलने और रिजर्वेशन कराने की जानकारी दी थी। घर पर उनके आने की तैयारी की जा रही थी। शनिवार की शाम बच्चों के साथ आने की बात भी हुई थी। लेकिन रात में फोन कॉल से उनकी शहादत की खबर मिली। पुष्टि हुई कि 45 दिन तक चले ऑपरेशन के आखिरी लम्हें में उग्रवादियों द्वारा हमला बोला गया है। जिसमें मुल्तान सिंह समेत तीन जवान शहीद हो गए। वीरनारी सुमन फोन पर हुई बातचीत को याद कर बेसुध हो गई। रविवार शाम तक उनकी बेहोशी नहीं टूट सकी। पूरे परिवार में मातम का माहौल है। शहीद की मां राजरानी देवी, भाई बृजेश सिंह ने बताया कि परिवार उनके आने की खुशी मना रहा था। लेकिन शहादत की खबर ने खुशियों को छीन ही लिया है। शहादत की खबर पर बिजौली स्थित घर पर ढांढस बंधाने को पहुंच रहे लोग भी अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
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बेटा-बेटी बोले, सेना में भर्ती होकर लेंगे पापा की मौत का बदला
बाह। कस्बे के बीपीएस स्कूल में पढ़ाई कर रहे शहीद मुल्तान सिंह की बेटी दीक्षा और बेटा विनय सिंह की उम्र भले ही कम हो। लेकिन उनमें भरी देशभक्ति के जज्बे को सुनने वालों के रोंगटे खडे़ हो गये। दोनों बोले कि वे पापा की शहादत का बदला लेंगे। वैसे भी पूरा परिवार देशभक्ति से सराबोर है। शहीद के पिता दिवंगत उम्मेद सिंह कुमायूं रेजीमेंट में ही थे। शहीद के बडे़ भाई बृजेश सिंह राजपूत रेजीमेंट से डेढ़ साल पहले रिटायर्ड हुये हैं। जबकि छोटे भाई बहोरन सिंह सेना मिलिट्री पुलिस में इन दिनों बरेली में तैनात हैं। शहादत की खबर से दीक्षा और विनय सिंह दोनों गम और गुस्से में हैं। पिता से आखिरी बार कब बात हुई सवाल के जवाब में बोले दीवाली पर। लेकिन मां से दो दिन पहले बात हुई थी। शहादत पर बोले, अंकल हमें सेना में भर्ती करा दो। उग्रवादियों की कायराना हरकत का बदला लेना है। पापा देश के लिए कुर्बान हुये। हम भी उनके नक्से कदम पर चलना चाहते हैं।
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ग्राम पंचायत की जमीन पर दी जायेगी अंतिम विदाई, शहीद स्मारक की मांग
बाह। शहीद मुल्तान सिंह की अंतिम विदाई के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है। कैंजरा रोड पर समाजवादी अभिनव विद्यालय के पास अंत्येष्टि की जायेगी। जगह का प्रस्ताव ग्रामप्रधान के पति संजय उपाध्याय ने रखा है। वह और गांव के लोग चाहते है कि इसी स्थल पर शहीद स्मारक का निर्माण हो। ग्राम पंचायत की पहल के बाद राजस्व विभाग की टीम के साथ नायब तहसीलदार ने अंत्येष्टि स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद पैरा मिलिट्री फोर्स की टीम ने सूबेदार लाखन सिंह के नेतृत्व में स्थल देखा और परिवारीजनों से बात की।
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खेड़ा राठौर के गांव भगवानपुरा निवासी पूर्व सैनिक दिवंगत उम्मेद सिंह तोमर का परिवार अब बिजौली में रहता है। उनके दूसरे नंबर के पुत्र मुल्तान सिंह (42) असम के उग्रवाद प्रभावित तिनसुखिया में तैनात थे। 15 कुमायूं रेजीमेंट की उनकी यूनिट तिनसुखिया में ऑपरेशन पर थी। शनिवार सुबह लगभग साढे़ पांच बजे माइंस ब्लास्ट कर यूनिट पर उग्रवादियों ने हमला बोल दिया। हमले में मुल्तान सिंह समेत तीन जवान शहीद हो गये। जबकि चार जवान घायल हो गये। मुल्तान सिंह की शहादत की खबर उनके घर बिजौली में शनिवार की रात मिलते ही पत्नी सुमन देवी बेसुध हो गईं। पुत्र विनय सिंह (10), पुत्री दीक्षा (12) की आंखों में आंसू नहीं रुक रहे हैं। परिवारीजनों ने बताया कि मुल्तान सिंह 1994 में भर्ती हुये थे। अपने 23 साल के सेवाकाल में वे नागालैंड, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे। आतंकियों से लोहा लेने वाला जांबाज उग्रवादी हमले में शहीद हो गया। रविवार को बाह क्षेत्र में वीर सपूत के शहीद होने से शोक की लहर दौड़ गई। जिसने भी सुना उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। शहीद की अंत्येष्टि बिजौली में की जायेगी। तिरंगे में लिपटा उनका शव रविवार शाम आगरा पहुंचेगा। आगरा से उनके घर पहुंची पैरा मिलिट्री की टीम के सूबेदार लाखन सिंह ने अधिकारियों से बात कर परिवार की मांग पर सोमवार सुबह अंत्येष्टि करने का निर्णय लिया है।
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घर आना था मुल्तान सिंह को, आ गई शहादत की खबर
बाह। शनिवार को वीर सपूत मुल्तान सिंह का घर आने का कार्यक्रम तय था। छुट्टी के साथ ही उन्होंने रिजर्वेशन भी करा लिया था। परिवार उनकी वाट जोह रहा था लेकिन उनके आने की बजाय शनिवार की रात शहादत की खबर आई तो किसी को सहज विश्वास नहीं हुआ। पुष्टि होने पर पूरा परिवार मातम में डूब गया।
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दो दिन पहले मुल्तान सिंह तोमर से फोन पर हुई बातचीत का उल्लेख करते हुये वीरनारी सुमन देवी ने बताया कि उन्होंने शनिवार को उग्रवादियों के खिलाफ चल रहा ऑपरेशन पूरा होने पर छुट्टी मिलने और रिजर्वेशन कराने की जानकारी दी थी। घर पर उनके आने की तैयारी की जा रही थी। शनिवार की शाम बच्चों के साथ आने की बात भी हुई थी। लेकिन रात में फोन कॉल से उनकी शहादत की खबर मिली। पुष्टि हुई कि 45 दिन तक चले ऑपरेशन के आखिरी लम्हें में उग्रवादियों द्वारा हमला बोला गया है। जिसमें मुल्तान सिंह समेत तीन जवान शहीद हो गए। वीरनारी सुमन फोन पर हुई बातचीत को याद कर बेसुध हो गई। रविवार शाम तक उनकी बेहोशी नहीं टूट सकी। पूरे परिवार में मातम का माहौल है। शहीद की मां राजरानी देवी, भाई बृजेश सिंह ने बताया कि परिवार उनके आने की खुशी मना रहा था। लेकिन शहादत की खबर ने खुशियों को छीन ही लिया है। शहादत की खबर पर बिजौली स्थित घर पर ढांढस बंधाने को पहुंच रहे लोग भी अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
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बेटा-बेटी बोले, सेना में भर्ती होकर लेंगे पापा की मौत का बदला
बाह। कस्बे के बीपीएस स्कूल में पढ़ाई कर रहे शहीद मुल्तान सिंह की बेटी दीक्षा और बेटा विनय सिंह की उम्र भले ही कम हो। लेकिन उनमें भरी देशभक्ति के जज्बे को सुनने वालों के रोंगटे खडे़ हो गये। दोनों बोले कि वे पापा की शहादत का बदला लेंगे। वैसे भी पूरा परिवार देशभक्ति से सराबोर है। शहीद के पिता दिवंगत उम्मेद सिंह कुमायूं रेजीमेंट में ही थे। शहीद के बडे़ भाई बृजेश सिंह राजपूत रेजीमेंट से डेढ़ साल पहले रिटायर्ड हुये हैं। जबकि छोटे भाई बहोरन सिंह सेना मिलिट्री पुलिस में इन दिनों बरेली में तैनात हैं। शहादत की खबर से दीक्षा और विनय सिंह दोनों गम और गुस्से में हैं। पिता से आखिरी बार कब बात हुई सवाल के जवाब में बोले दीवाली पर। लेकिन मां से दो दिन पहले बात हुई थी। शहादत पर बोले, अंकल हमें सेना में भर्ती करा दो। उग्रवादियों की कायराना हरकत का बदला लेना है। पापा देश के लिए कुर्बान हुये। हम भी उनके नक्से कदम पर चलना चाहते हैं।
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ग्राम पंचायत की जमीन पर दी जायेगी अंतिम विदाई, शहीद स्मारक की मांग
बाह। शहीद मुल्तान सिंह की अंतिम विदाई के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है। कैंजरा रोड पर समाजवादी अभिनव विद्यालय के पास अंत्येष्टि की जायेगी। जगह का प्रस्ताव ग्रामप्रधान के पति संजय उपाध्याय ने रखा है। वह और गांव के लोग चाहते है कि इसी स्थल पर शहीद स्मारक का निर्माण हो। ग्राम पंचायत की पहल के बाद राजस्व विभाग की टीम के साथ नायब तहसीलदार ने अंत्येष्टि स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद पैरा मिलिट्री फोर्स की टीम ने सूबेदार लाखन सिंह के नेतृत्व में स्थल देखा और परिवारीजनों से बात की।