ट्रेनों की टाइमिंग सुधार को उठाए कदम, निकले बेदम, घंटों करना पड़ रहा इंतजार
उत्तर मध्य रेलवे में यात्री ट्रेनों की टाइमिंग में सुधार रेल प्रशासन के लाख प्रयासों के बाद भी नहीं हो सका। ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी पर लगाम कसने को
रेलवे ने ट्रेनों की समय सारणी में व्यापक बदलाव किए।
ट्रेनों के स्टापेज का समय घटाया। इसके बाद भी यात्री ट्रेनों के विलंब से चलने की समस्या बनी हुई है। रक्षाबंधन पर हालात और बिगड़ गए। सवाल यह उठता है कि इतने उपायों के बाद भी ट्रेनों की टाइमिंग में सुधार क्यों नहीं हो पा रहा है।
उत्तर मध्य रेलवे में ट्रेनों की टाइमिंग सबसे बड़ी समस्या है। कई ट्रेनें आठ से 10 घंटे की देरी से रोजाना ही चलती हैं। आगरा कैंट-लखनऊ इंटरसिटी
एक्सप्रेस के लगातार देरी से चलने के कारण इसका टर्मिनल बदला गया।
नहीं सुधरी ट्रेनों की टाइमिंग
वहीं आगरा फोर्ट अहमदाबाद एक्सप्रेस का स्टेशन भी बदलने का फैसला हो चुका है। इसके पहले टाइमिंग में सुधार के लिए इलाहाबाद से दो सुपरवाइजरों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन ट्रेनों की टाइमिंग नहीं सुधर सकी।
स्टेशन बदलने के बाद भी लखनऊ इंटरसिटी अब भी सात से आठ घंटे की देरी से चल रही है। इसके बाद रेल प्रशासन ने बड़ा बदलाव करते हुए 15 अगस्त से 140 ट्रेनों के ठहराव का समय कम कर दिया।
ट्रेनों के ओरिजनेटेड स्टेशनों से ठीक वक्त पर रवानगी के लिए निर्देश दिए। इन सभी प्रयोगों से अभी तक रेल यात्रियों को लाभ नहीं मिल सका है। टाइमिंग में बदलाव के 10 दिन बाद भी ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं।
रेल परामर्शदात्री समिति के राजकुमार शर्मा ने बताया कि टाइमिंग में बदलाव से कोई फर्क नहीं पड़ा है। लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस की लेटलतीफी में फर्क नहीं आ सका है। ऐसे में इन बदलावों से कोई कोई लाभ नहीं हो सका है।