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सीवर सफाई में मजदूरों की जान से खिलवाड़
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आश्रम रोड पर सीवर की सफाई करते कर्मचारी
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। शहर में सीवर सफाई का काम शुरू हो गया है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी सफाई में मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे कभी हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार इससे बेपरवाह हैं।
सीवर लाइन की सफाई में मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। देश भर में होने वाले हादसों से भी जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। अगर सबक लिया होता तो सीवर सफाई के लिए मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के नहीं उतारा जाता। रविवार को शहर के आश्रम रोड पर सीवर सफाई का काम चल रहा था।
यहां तैनात मजदूरों के पास न तो गैस मास्क थे और न ही सुरक्षा बेल्ट की व्यवस्था की गई थी। मजदूर ऐसे ही सीवर लाइन के मैनहोल में सफाई के लिए 15 से 20 फीट नीचे उतर रहे थे। अगर सीवर लाइन में किसी गैस से मजदूर बेहोश हो जाता तो बेल्ट न होने के चलते उसे बाहर निकालना भी असंभव था। हालांकि ये गनीमत रही कि उनके साथ कोई हादसा नहीं हुआ।
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लेकिन जिम्मेदारों ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए इस बार मैनहोल के बाहर एक ऑक्सीजन का सिलिंडर रखवा दिया था। अब उन्हें कौन समझाए कि मैनहोल में 15 फीट नीचे घुसे मजदूर के लिए ये ऑक्सीजन का सिलिंडर बेकार ही है।
इसलिए चोक हो रही सीवर लाइन
शहर में सीवर लाइन डालने का मकसद केवल सीवरेज को ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाना था, ताकि उसका शोधन किया जा सके। लेकिन लोगों ने सीवर लाइन में न केवल सेफ्टिक टैंक बल्कि नाली के पानी का भी कनेक्शन कर दिया। ऐसे में सीवर लाइन चोक हो रही है। क्योंकि सीवर लाइन की क्षमता इतनी नहीं है कि वह इतने अधिक पानी और कचरे को बहा कर ले जा सके।
सीवर में होती हैं जहरीली गैसें
सीवर लाइन में जहां सीवरेज आता है तो वहीं पूरी लाइन में पानी भी भरा रहता है। इससे लाइन में जहरीली गैसें बन जाती हैं। कहीं भी निकासी का स्थान न होने से ये गैसें लाइन में एकत्रित होती रहती हैं। जब सफाई के लिए मजदूर इसमें उतरते हैं तो इन जहरीलों गैसों की उपस्थिति के चलते ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। ऐसे में मजदूरों की मौत भी हो सकती है।
संबंधित इंस्पेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि उपकरण के सहयोग से ही सफाई कराई जाए। लापरवाही कहां हो रही है इसकी जांच कराई जाएगी।
-लालचंद्र भारतीय, ईओ नगर पालिका।
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सीवर लाइन की सफाई में मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। देश भर में होने वाले हादसों से भी जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। अगर सबक लिया होता तो सीवर सफाई के लिए मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के नहीं उतारा जाता। रविवार को शहर के आश्रम रोड पर सीवर सफाई का काम चल रहा था।
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यहां तैनात मजदूरों के पास न तो गैस मास्क थे और न ही सुरक्षा बेल्ट की व्यवस्था की गई थी। मजदूर ऐसे ही सीवर लाइन के मैनहोल में सफाई के लिए 15 से 20 फीट नीचे उतर रहे थे। अगर सीवर लाइन में किसी गैस से मजदूर बेहोश हो जाता तो बेल्ट न होने के चलते उसे बाहर निकालना भी असंभव था। हालांकि ये गनीमत रही कि उनके साथ कोई हादसा नहीं हुआ।
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लेकिन जिम्मेदारों ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए इस बार मैनहोल के बाहर एक ऑक्सीजन का सिलिंडर रखवा दिया था। अब उन्हें कौन समझाए कि मैनहोल में 15 फीट नीचे घुसे मजदूर के लिए ये ऑक्सीजन का सिलिंडर बेकार ही है।
इसलिए चोक हो रही सीवर लाइन
शहर में सीवर लाइन डालने का मकसद केवल सीवरेज को ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाना था, ताकि उसका शोधन किया जा सके। लेकिन लोगों ने सीवर लाइन में न केवल सेफ्टिक टैंक बल्कि नाली के पानी का भी कनेक्शन कर दिया। ऐसे में सीवर लाइन चोक हो रही है। क्योंकि सीवर लाइन की क्षमता इतनी नहीं है कि वह इतने अधिक पानी और कचरे को बहा कर ले जा सके।
सीवर में होती हैं जहरीली गैसें
सीवर लाइन में जहां सीवरेज आता है तो वहीं पूरी लाइन में पानी भी भरा रहता है। इससे लाइन में जहरीली गैसें बन जाती हैं। कहीं भी निकासी का स्थान न होने से ये गैसें लाइन में एकत्रित होती रहती हैं। जब सफाई के लिए मजदूर इसमें उतरते हैं तो इन जहरीलों गैसों की उपस्थिति के चलते ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। ऐसे में मजदूरों की मौत भी हो सकती है।
संबंधित इंस्पेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि उपकरण के सहयोग से ही सफाई कराई जाए। लापरवाही कहां हो रही है इसकी जांच कराई जाएगी।
-लालचंद्र भारतीय, ईओ नगर पालिका।