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New Crime Laws: राजद्रोह, आत्महत्या का प्रयास और अप्राकृतिक कृत्य की धाराएं हुईं विलुप्त, जानिए क्या थी सजा
Wed, 28 May 2025 09:42 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 28 May 2025 09:42 AM IST
सार
नए कानून में 497 जारकर्म को भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 में समायोजित कर दिया गया है। नए कानून में कई धाराएं खत्म कर दी गईं हैं। जानें क्या है इसकी वजह...
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तीन नए आपराधिक कानून
- फोटो : AMAR UJALA
विस्तार
नए कानून भारतीय न्याय संहिता में भारतीय दंड संहिता की धारा 124(ए) राजद्रोह, 309 आत्महत्या का प्रयास, 377 अप्राकृतिक कृत्य की धाराओं को विलुप्त कर दिया गया है। 497 जारकर्म को भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 में समायोजित कर दिया गया है। पहली तीन धाराओं में लोग आपसी मतभेद होने पर लाभ उठाते थे। 497 जारकर्म दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता था।
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भारतीय दंड संहिता दंड संहिता की 124(ए) के तहत कोई भी व्यक्ति शब्द, संकेतों, दृश्य या लिखित रूप ये सरकार के लिए घृणा या अवमानना के साथ असंतोष पैदा करने का प्रयास करता था। इस धारा में आरोप सिद्ध होने पर दोषी को तीन साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान था।
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309 भारतीय दंड संहिता की धारा को भारतीय न्याय संहिता में विलुप्त कर दिया गया। इसके तहत आत्महत्या के लिए प्रयास कराना था। इस धारा का पूर्व में दुरुपयोग हो रहा था। इसमें एक साल कारवास और जुर्माने की सजा का प्रावधान था।
377 भारतीय दंड संहिता दंड संहिता की इस धारा के तहत अप्राकृतिक कृत्य आता था। अप्राकृतिक कृत्य जब कभी भी किसी के साथ होता है तो वह उसकी सहमति से होता है। आपसी मनमुटाव होने पर लोग इस धारा का दुरुपयोग करते थे। नई कानून में इस धारा को कोई स्थान नहीं दिया गया है। इसमें 10 साल से आजीवन कारावास का प्रावधान था।
497 भारतीय दंड संहिता दंड संहिता इस धारा के तहत कोई भी पुरुष किसी अन्य शादीशुदा पुरुष की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता था। यह दुष्कर्म की दृष्टि में नहीं आता था। मगर जारकर्म की दृष्टि में आता था। अब इस धारा को हटाकर भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 में समायोजित कर दिया गया है। इस धारा में पांच साल कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान था।