आगरा दयालबाग प्रकरण: दस्तावेज दिखाने नहीं पहुंचे सत्संगी, एसडीएम ने जारी किए नोटिस
प्रशासन ने दो बार दीवार तोड़कर सार्वजनिक रास्ता खोला था, लेकिन सत्संगियों ने उसे फिर बंद कर दिया। इस पर प्रशासन ने सत्संगियों को उक्त जमीन के दस्तावेज दिखाने के लिए सदर तहसील में बुलाया था।
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आगरा के दयालबाग में जिस सार्वजनिक रास्ते को खुलवाने के लिए प्रशासन ने दो बार अवैध दीवार तुड़वाई, वो रास्ता फिर बंद हो गया। अब तीसरी बार आम रास्ते को खुलवाने के सवाल पर अफसर मौन हैं। इधर, विवादित रास्ते के संबंध में दस्तावेज दिखाने सोमवार को सत्संगी सदर तहसील नहीं पहुंचे। उधर, एसडीएम लक्ष्मी एन ने आरोपितों के विरुद्ध नोटिस जारी किए हैं।
मौजा जगनपुर के गाटा संख्या 335 में सरकारी रिकॉर्ड में 0.460 हेक्टेयर भूमि आम रास्ते में दर्ज है। शनिवार को थाना दिवस में आई शिकायत के बाद एसडीएम लक्ष्मी एन ने तहसीलदार व पुलिस फोर्स मौजूदगी में बंद रास्ते को खुलवाने के लिए वहां खड़ी दीवार को ध्वस्त कराया था।
जिसके बाद सत्संगी व प्रशासन आमने-सामने आ गए। उसी रात सत्संगियों ने दोबारा दीवार बना दी। प्रशासन ने रविवार को एफआईआर दर्ज कराई। एसडीएम ने रास्ते का अपना बताने वाले सत्संगियों को मालिकाना हक के संबंध में दस्तावेज दिखाने के लिए सोमवार को सुबह 11 बजे तहसील बुलाया था, परंतु दोपहर तीन बजे तक कोई नहीं पहुंचा।
तहसील में पुलिसबल रहा तैनात
इस दौरान तहसील में भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट लक्ष्मी एन सिंह ने बताया कि आरोपी पक्ष को नोटिस जारी किए हैं। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। अगर वह नोटिस का जवाब नहीं देते तो आगे प्रशासन कार्रवाई करेगा।
फिर बंद हुए आम रास्ते को दोबारा खोला जाएगा या नहीं, इस सवाल पर जिलाधिकारी ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। वह कानून हाथ में नहीं ले सकते। अगर दोबारा आरोपियों ने प्रशासनिक कार्य में व्यवधान डालने की कोशिश की, तो उनके विरुद्ध मुकदमे में आईपीसी की गंभीर धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
डीएम ने कहा कि सत्संगियों ने गलत किया है। एसडीएम को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। दूसरी बार बंद रास्ते को तीसरी बार खोलने के सवाल पर एसडीएम लक्ष्मी एन ने कहा, कानूनी कार्रवाई होगी। नोटिस का जवाब मिलने के बाद प्रशासन आगे की रणनीति का खुलासा करेगा।
2016 में माना था इसे आम रास्ता
20 दिसंबर 2016 को तत्कालीन एसडीएम व राजस्व टीम की जांच में विवादित स्थल को आम रास्ता माना गया। तब इसे प्रशासन ने अस्थाई रूप से खुलवा दिया था। जिसके बाद किसानों को अपने खेत तक जाने के लिए रास्ता मिला। अन्य ग्रामीण भी इस रास्ते का उपयोग करते थे।
आरोप है कि लॉकडाउन में रास्ते में दीवार खड़ी कर इसे बंद कर दिया। दीवार के किनारे पौधे लगाकर स्वरूप बदल दिया। जिसकी शिकायत 30 सितंबर 2020 को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह से की गई। तहसील कर्मियों की मिलीभगत के आरोप लगाए।
रास्ते खुलवाने के लिए डीएम ने क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट को आदेश दिए। परंतु मजिस्ट्रेट को मौके से भगा दिया गया। फिर मार्च 2021 में तत्कालीन एसडीएम अरुन्मोली ने रास्ता खुलवाने पहुंची, जहां उनसे अभद्रता की गई। जिसके बाद पूरा मामला सुर्खियों में आया।
प्रशासन की मंशा पर उठाए सवाल
जनप्रहरी संस्था सचिव नरोत्तम शर्मा ने कहा, प्रशासन तीन बार कोशिश करने के बाद भी आम लोगों के रास्ते से कब्जे नहीं हटा पा रहा। आम लोगों को ऐसे मामलों में प्रशासन जेल भेज देता है, जबकि यहां वह लाचार नजर आ रहा है। उन्होंने प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।