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जांच में सामने आया घोटाला: 156 टॉयलेट की सफाई में खर्च पर दिखाए 1.48 करोड़

Thu, 17 Dec 2020 11:21 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 17 Dec 2020 11:21 AM IST
सार

  • न सफाई की न फिनाइल की गोली डालीं
  • 156 टॉयलेट की सफाई, संचालन के लिए संस्था को ठेका दिया था

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Scam In Nagar Nigam Toilets Cleaning Worth One And Half Crore
नगर निगम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के चौराहों, बाजारों में बने 156 टॉयलेट की सफाई के नाम पर घोटाला हुआ है। एक साल से बंद पड़े सार्वजनिक शौचालयों में दुर्गंध के कारण लोग परेशान हैं, लेकिन इनकी सफाई और संचालन के नाम पर नगर निगम ने 1.48 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यही नहीं, नगर निगम इसके अलावा 156 टॉयलेट में पानी, फिनाइल की गोलियों समेत स्वच्छता के लिए झाडू, ब्लीचिंग पाउडर का खर्चा कर रहा है।
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नगर निगम की पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने जब इन शौचालयों का निरीक्षण किया तो टॉयलेट सफाई के नाम पर किए गए घोटाले की पोल खुल गई। पार्षदों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और ज्योति विकास संस्था, एमएस सर्विसेज, आदर्श सेवा समिति, सीएलसी, ग्राम विकास संस्था पर अर्थ दंड लगाने की मांग की है।
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पांच अधिकारियों की जांच कमेटी के सामने आया सच
नगर आयुक्त निखिल टीकाराम फुंडे के निर्देश पर शौचालयों की व्यवस्था की जांच करने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में शामिल मुख्य अभियंता (विद्युत) संजय कटियार ने ज्योति विकास संस्था की जांच की थी। इसी तरह मुख्य अभियंता बीएल गुप्ता ने एमएस सर्विसेज, अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने आदर्श सेवा समिति, सहायक नगर आयुक्त अनुपम शुक्ला ने ग्राम विकास संस्था, पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने सीएलसी और अधिशासी अभियंता आशीष शुक्ला ने सुलभ इंटरनेशनल की जांच की। इस रिपोर्ट में सुलभ इंटरनेशनल को छोड़कर अन्य सभी संस्थाओं को के कामकाज में खामियां मिली हैं।
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जिम्मेदार अधिकारी क्या देख रहे थे
नगर निगम ने 156 टॉयलेट की सफाई, संचालन के लिए संस्था को ठेका दिया था। दिन में चार बार सफाई करनी थी, लेकिन महीनों तक सफाई नहीं हो रही। अधिकारी क्या कर रहे थे। उन पर कार्रवाई जरूर हो। उनकी लापरवाही से निगम के करोड़ों रुपये बर्बाद हुए हैं। - रवि बिहारी माथुर,  पार्षद, पीपलमंडी

अफसर के वेतन से हो रिकवरी
निगम की ओर से झाड़ू, फिनायल की गोलियां, ब्लीचिंग पाउडर, कूड़ेदान का खर्च आखिर कैसे हो गया। एक दो नहीं, बल्कि 156 टॉयलेट हैं, जिनकी शिकायतें हम लोग करते रहे, पर भुगतान जारी रहा। जिस अधिकारी ने भुगतान किए, उसके वेतन से इसकी रिकवरी की जाए। - प्रकाश केशवानी, सचेतक एवं पार्षद, ट्रांसयमुना

एक साल से बंद हैं टॉयलेट
एक साल से टॉयलेट बंद हैं। नगर निगम फिर क्यों कंपनियों को प्रतिमाह भुगतान करता रहा। क्या एक साल में कोई निरीक्षण नहीं हुआ। जो सामान  नगर निगम ने उपलब्ध कराया था वह कहां जाता था। इन सभी बिंदुओं पर जांच की जाए।  - राकेश जैन, पार्षद, मोतीगंज

संस्थाओं पर अर्थदंड लगाएं
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगाया गया है। जो संस्थाएं टॉयलेट के नाम पर गड़बड़ी कर रही हैं, उनके खिलाफ अर्थदंड के अलावा जो भुगतान हुआ है, उसकी वसूली की जाए। - अनुराग चतुर्वेदी, पार्षद बेलनगंज

की जाएगी कार्रवाई
पार्षदों ने टॉयलेट का मामला रखा है। अधिकारियों ने भी निरीक्षण की रिपोर्ट रखी है। उन पर विचार करके कार्रवाई की जाएगी। - निखिल टी फुंडे, नगर आयुक्त
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