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यूपी: क्या आपको पता है? 34 साल में जीते दो विधायक, लेकिन एमएलसी चार; भाजपा के गढ़ में अखिलेश का नया रिकॉर्ड
Thu, 29 Oct 2026 09:14 AM IST
Dhirendra Singh
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 29 Oct 2026 09:14 AM IST
सार
समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद से आगरा खंड की शिक्षक-स्नातक एमएलसी सीटों पर सपा के चार नेता जीत दर्ज कर चुके हैं, जबकि आगरा जिले की विधानसभा सीटों पर पार्टी के केवल दो प्रत्याशी विधायक बने। आकाश अग्रवाल की शिक्षक सीट पर जीत ने विधान परिषद में सपा की मौजूदगी को फिर मजबूत किया है, जबकि पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
आगरा में समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार आकाश अग्रवाल एक बार फिर विधान परिषद पहुंचने में कामयाब रहे। आगरा खंड से शिक्षक-स्नातक विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड विधानसभा चुनाव से बेहतर रहा है। वर्ष 1992 में सपा की स्थापना से लेकर अब तक एमएलसी चुनाव में चार प्रत्याशी जीत चुके हैं जबकि विधानसभा चुनाव में आगरा की 9 विधानसभा सीटों में सपा की साइकिल से केवल दो उम्मीदवार ही लखनऊ पहुंच सके।
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आगरा खंड शिक्षक-स्नातक विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी से सबसे पहले वर्ष 2002 में हरनाथ सिंह यादव स्नातक सीट से चुनाव जीते। वह 1996 में निर्दलीय चुनाव जीत चुके थे, ऐसे में सपा ने उन पर दांव लगाया और वह दूसरी बार एमएलसी बनने में सपा के टिकट पर कामयाब रहे। इसके बाद असीम यादव वर्ष 2014-2020 तक आगरा खंड से एमएलसी रहे। सपा से ही दिलीप यादव ने वर्ष 2016 में विधान परिषद चुनाव जीता। उसके बाद अब एमएलसी शिक्षक सीट पर आकाश अग्रवाल ने सपा की साइकिल पर लखनऊ का रास्ता तय किया है। वह इससे पहले हरनाथ सिंह यादव की तरह निर्दलीय चुने जा चुके हैं। समाजवादी पार्टी ने जो दांव वर्ष 2002 में अपनाया था, उसी 24 साल पुराने दांव से एमएलसी जिताने में कामयाब रही।
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बाह-एत्मादपुर में ही खुला है अब तक सपा का खाता
बीते दो विधानसभा चुनाव में आगरा जिले की सभी 9 विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीतीं। बसपा भी दो बार 6-6 विधायक जिता चुकी है लेकिन समाजवादी पार्टी को अपनी स्थापना के बाद से आगरा में केवल दो बार ही प्रत्याशी जिताने का मौका मिला है। इनमें वर्ष 1993 में एत्मादपुर सीट से चंद्रभान मौर्य सपा के टिकट पर जीत सके, वहीं वर्ष 2012 में बाह से राजा अरिदमन सिंह ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव के बाद से वर्ष 2017, 2026 के चुनाव में सपा का प्रदर्शन तो बेहतर हुआ लेकिन विधायक नहीं बनवा सके। दो विधायकों के अलावा सपा ने दो बार संसद में भी आगरा से प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 1999 और 2004 में सपा के टिकट पर राज बब्बर सांसद बन चुके हैं।
बीते दो विधानसभा चुनाव में आगरा जिले की सभी 9 विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीतीं। बसपा भी दो बार 6-6 विधायक जिता चुकी है लेकिन समाजवादी पार्टी को अपनी स्थापना के बाद से आगरा में केवल दो बार ही प्रत्याशी जिताने का मौका मिला है। इनमें वर्ष 1993 में एत्मादपुर सीट से चंद्रभान मौर्य सपा के टिकट पर जीत सके, वहीं वर्ष 2012 में बाह से राजा अरिदमन सिंह ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव के बाद से वर्ष 2017, 2026 के चुनाव में सपा का प्रदर्शन तो बेहतर हुआ लेकिन विधायक नहीं बनवा सके। दो विधायकों के अलावा सपा ने दो बार संसद में भी आगरा से प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 1999 और 2004 में सपा के टिकट पर राज बब्बर सांसद बन चुके हैं।
आगरा से विधान परिषद पहुंची समाजवादी आवाज
समाजवादी पार्टी की स्थापना वर्ष 1992 में हुई लेकिन उससे पहले जनता दल के टिकट पर और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के समर्थन से आगरा के शिव प्रसाद गुप्ता एमएलसी चुने जा चुके हैं। वह वर्ष 1990 से 1992 तक मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए विधान परिषद के सभापति रहे थे। तब वह जनता दल के सदस्य रहे, वहीं खतैना, लोहामंडी निवासी अनुराग शुक्ला भी जनता दल से ही विधान परिषद सदस्य चुने गए थे।
समाजवादी पार्टी की स्थापना वर्ष 1992 में हुई लेकिन उससे पहले जनता दल के टिकट पर और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के समर्थन से आगरा के शिव प्रसाद गुप्ता एमएलसी चुने जा चुके हैं। वह वर्ष 1990 से 1992 तक मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए विधान परिषद के सभापति रहे थे। तब वह जनता दल के सदस्य रहे, वहीं खतैना, लोहामंडी निवासी अनुराग शुक्ला भी जनता दल से ही विधान परिषद सदस्य चुने गए थे।
महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने बताया कि एमएलसी चुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का ट्रेलर है। आगरा में कार्यकर्ता में उत्साह बढ़ा है और पूरे जिले की सीटों पर इसका असर नजर आएगा।
पूर्व शहर अध्यक्ष वाजिद निसार ने बताया कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच सपा ने अपनी नीति पहुंचा दी है। इस चुनाव से पहले हर गली-मोहल्ले तक कार्यकर्ता पहुंचेंगे। परिणाम इस बार बदले नजर आएंगे।