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5 अगस्त भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ेगी-ऋतंभरा
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साध्वी ऋतंभरा
- फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पुनर्निर्माण की शुभ घड़ी आ गई है। इसके लिए तय की गई 5 अगस्त की तारीख भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ जाएगी। 491 वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का स्वप्न संजोये जिन लाखों रामभक्तों ने संघर्ष करते हुए अपना बलिदान दिया, ये दिन उनकी आत्मिक शांति को समर्पित होगा।
श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में जुड़ी रहीं साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी श्रीराम जन्मभूमि न्यास के संतों की सन्निधि (जिसमें मेरे गुरुदेव भगवान युगपुरुष स्वामी परमानंद महाराज) में मंदिर निर्माण का शुभारंभ करने जा रहे हैं। अपने अतुलित-अनिर्वचनीय साहस और अगाध श्रीराम भक्ति के बल पर और हमारे पूज्य अशोक सिंघल के सत्यसंकल्प तथा सैकड़ों हुतात्माओं के बलिदान ने हमें यह शुभ अवसर प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि हमारा शौर्यपूर्ण इतिहास साक्षी है कि सत्य सनातन धर्म की रक्षा करते हुए हमारे पूर्वजों ने सब कुछ साहसपूर्वक सहन किया। यहां तक कि रणक्षेत्र में मृत्यु को भी गले लगाया था। क्रूर और लुटेरे विदेशी आक्रांताओं ने हमारे उन सभी प्रमुख देवालयों का ध्वंस किया, जो हमारी आस्था के शिखर थे। परन्तु जैसे ही अत्याचारों की वो आंधियां गुजरीं, भारतवर्ष की सात्विक शक्तियों द्वारा पुनर्निर्मित उन सभी देवालयों के शिखरों पर सनातन स्वाभिमान की पताका पुन: फहरा उठी। इनमें भारत के ऐसे कुछ प्राचीन मंदिर, विशेषकर गुजरात का सोमनाथ मंदिर भी सम्मिलित है, जिसके बर्बर ध्वंस की कथा ने सारे हिन्दू समाज को आंदोलित किया था।
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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में जुड़ी रहीं साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी श्रीराम जन्मभूमि न्यास के संतों की सन्निधि (जिसमें मेरे गुरुदेव भगवान युगपुरुष स्वामी परमानंद महाराज) में मंदिर निर्माण का शुभारंभ करने जा रहे हैं। अपने अतुलित-अनिर्वचनीय साहस और अगाध श्रीराम भक्ति के बल पर और हमारे पूज्य अशोक सिंघल के सत्यसंकल्प तथा सैकड़ों हुतात्माओं के बलिदान ने हमें यह शुभ अवसर प्रदान किया है।
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उन्होंने कहा कि हमारा शौर्यपूर्ण इतिहास साक्षी है कि सत्य सनातन धर्म की रक्षा करते हुए हमारे पूर्वजों ने सब कुछ साहसपूर्वक सहन किया। यहां तक कि रणक्षेत्र में मृत्यु को भी गले लगाया था। क्रूर और लुटेरे विदेशी आक्रांताओं ने हमारे उन सभी प्रमुख देवालयों का ध्वंस किया, जो हमारी आस्था के शिखर थे। परन्तु जैसे ही अत्याचारों की वो आंधियां गुजरीं, भारतवर्ष की सात्विक शक्तियों द्वारा पुनर्निर्मित उन सभी देवालयों के शिखरों पर सनातन स्वाभिमान की पताका पुन: फहरा उठी। इनमें भारत के ऐसे कुछ प्राचीन मंदिर, विशेषकर गुजरात का सोमनाथ मंदिर भी सम्मिलित है, जिसके बर्बर ध्वंस की कथा ने सारे हिन्दू समाज को आंदोलित किया था।
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