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जंग लगी सरिया-घटिया ईंटें: सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट का ऐसा हाल, 51 करोड़ से बन रहे तीन स्कूल; तस्वीर चौंका देगी

Mon, 24 Aug 2026 09:18 AM IST
Dhirendra Singh सलोनी पांडे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
सलोनी पांडे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 24 Aug 2026 09:18 AM IST
सार

आगरा में 51 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों के निर्माण में जंग लगी सरिया और मानकविहीन ईंटों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। बीएसए की जांच में निर्माण स्थल पर तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी और काम की धीमी रफ्तार भी मिली, जिसके बाद तकनीकी जांच की मांग की गई है।

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Rusty Steel and Substandard Bricks Found in 51 Crore School Projects
जंग लगी सरिया-घटिया ईंटें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बच्चों का भविष्य संवारने के लिए बनाए जा रहे मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों की ही नींव ही भ्रष्टाचार की जमीन पर रखी गई है। 51 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन स्कूलों के निर्माण में जंग लगी सरिया और मानकविहीन ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर तकनीकी स्टाफ भी नहीं मिला। श्रमिकों की संख्या के मुकाबले काम की रफ्तार धीमी पाई गई। ऐसे में मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रही निर्माण सामग्री और उसकी निगरानी दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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पिनाहट के राठौटी, एत्मादपुर के बिरखनी और बरौली अहीर के धमौटा में स्कूलों का निर्माण चल रहा है। राठौटी और बिरखनी में 25-25 करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल बनाए जा रहे हैं। धमौटा में एक करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय बन रहा है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स काॅर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) निर्माण करा रही है।

 
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28 जुलाई को जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक में डीएम मनीष बंसल ने निर्माणाधीन स्कूलों के निरीक्षण के निर्देश दिए थे। इसके बाद बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने टास्क फोर्स के साथ तीनों स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। निरीक्षण के बाद बीएसए ने डीएम को पत्र भेजकर तीनों स्कूलों के निर्माण की तकनीकी जांच कराने का अनुरोध किया है। बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि मैंने तीनों स्कूलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। उनसे आवश्यक निर्देश प्राप्त हुए हैं। उसके अनुरूप विभागीय कार्रवाई की जाएगी। 

 
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क्या है खास
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल में नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक की शिक्षा एक ही छत के नीचे आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं के साथ दी जाएगी। स्कूल में स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान और रोबोटिक्स लैब और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही खेल का मैदान, मिनी स्टेडियम और मल्टीपरपज हॉल बनेगा। प्रत्येक विद्यालय में 1500 से 3000 विद्यार्थियों के पढ़ने की व्यवस्था होगी।

घट जाती है भवन की उम्र
यूपी आर्किटेक्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और निर्माण विशेषज्ञ राजीव द्विवेदी ने कहा कि जंग लगने के बाद सरिये का वॉल्यूम बढ़ने लगता है। इससे कंक्रीट पर दबाव पड़ता है और आगे चलकर कंक्रीट के फटने का खतरा रहता है। इसका असर भवन की मजबूती और उसकी उम्र पर पड़ता है। 15 से 20 साल में भवन की स्थिति खराब होने होने लगती है। बड़े प्रोजेक्ट में निर्माण स्थल पर तकनीकी टीम की मौजूदगी बेहद जरूरी है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए।
 
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