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सावधान: एटा में 45 डिग्री पहुंच रहा पारा, हीट स्ट्रोक का बढ़ा खतरा, जानें कारण, लक्षण व बचाव के तरीके 

Mon, 16 May 2022 04:11 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 16 May 2022 04:11 PM IST
सार

गर्मी के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। जिले में सोमवार को पारा 45 डिग्री के पार पहुंच गया।  चिकित्सकों के मुताबिक  ऐसे में घर से कम के कम निकलें। यदि जरूरी है तो घर से बाहर निकलने से पहले पानी पी लें। इससे लू लगने की संभावना कम हो जाती है। 
 

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risk of heat stroke increases in summer season know causes symptoms and methods of prevention 
हीट स्ट्रोक - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

एटा में भीषण गर्मी के बीच दोपहर के समय अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे सीधे तौर पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। दोपहर के समय घर से बाहर बिना सावधानी निकलना आपको बीमार बना सकता है। चिकित्सकों के मुताबिक दिन में घर से बाहर निकलने से पहले पानी पी लें। इससे लू लगने की संभावना कम हो जाती है।

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मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. एस चंद्रा बताते हैं कि इस समय तापमान 45 डिग्री के आसपास है। तेज धूप के साथ लू भी चल रही है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। सीधे धूप में चलना खतरनाक साबित हो सकता है। गर्म हवा लगने से शरीर में पानी सूख जाता है। पानी की कमी होने से हीट स्ट्रोक एवं डिहाइड्रेशन हो सकता है। बचने के लिए हर घंटे पर एक गिलास पानी या फिर तरल पदार्थ लेते रहें। दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें। जाना बेहद जरूरी है तो छाता लगाकर निकलें या फिर गमछा आदि से सिर और चेहरे को पूरी तरह से ढक लें। डॉ. चंद्रा बताते हैं कि ओपीडी में आठ-दस मरीज हीट स्ट्रोक के लक्षणों वाले पहुंच रहे हैं।

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हीट स्ट्रोक के साथ ही डिहाइड्रेशन के भी आ रहे मरीज

शहर के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. निर्मल जैन बताते हैं कि गर्मी की वजह से बुखार के 15-20 मरीज रोजाना आते हैं। इनमें से चार-पांच हीट स्ट्रोक के होते हैं। इससे भी अधिक मरीज डिहाइड्रेशन के आ रहे हैं। हर दिन 20-25 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। गर्मी में सोडियम की कमी से मरीज को पैरों में जकड़न, बीपी लो और बेहोशी भी आ जाती है। ज्यादा से ज्यादा पानी पीना ही सबसे बेहतर बचाव है।

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हीट स्ट्रोक के लक्षण

- पेट एवं मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है।
- ब्लड प्रेशर कम हो सकता है।
- बेचैनी होने के साथ सोचना-समझना मुश्किल महसूस हो सकता है।
- शरीर गर्म हो जाता है, ऊर्जा की कमी और थकान महसूस होती है।
- सिरदर्द होने के साथ उल्टी हो सकती है। बेहोशी तक आ सकती है।
- सांस और दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

इस तरह करें बचाव

- गर्मी में जूस एवं तरल पदार्थ का अत्यधिक सेवन करें।
- दिन भर में कम से कम आठ से 10 गिलास पानी पीएं।
- शरीर में पानी की उचित मात्रा बनाए रखें और दोपहर में घर से निकलने से बचें।
- गर्मी में बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करने से बचें।
- धूप से बचने के लिए छाता, गमछा, हैट आदि का इस्तेमाल करें। सूरज की सीधी किरणों से बचाव हो सकें।
- अचानक ठंडे से गर्म तापमान में या गर्म से ठंडे तापमान में न जाएं।

मरीज का रखें ऐसे ख्याल

- फल एवं गन्ने का जूस, नारियल पानी का प्रयोग कराएं।
- नीबू का रस एवं चीनी-नमक का घोल बनाकर पिलाएं।
- कच्चे आम को भूनकर पना बनाकर पिलाएं। यह शरीर में खनिज तत्वों की पूर्ति करता है।
- छाछ एवं दही का प्रयोग कराएं।

बच्चे जल्द होते हैं डिहाइड्रेशन के शिकार

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल गुप्ता ने बताया कि तेज धूप और लू से बच्चों में डिहाड्रेशन जल्दी होता है। उल्टी-दस्त एवं बुखार आए तो तुरंत अस्पताल लाकर दिखाएं। दोपहर के समय धूप में न जाने दें। थोड़ी-थोड़ी देर पर पानी पिलाते रहें।

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