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ऋषभ मिठास की कैसे हुई मौत?: अदालत ने खाकी की जांच पर उठाए सवाल, एफआर हुई खारिज; फिर होगी जांच

Thu, 03 Sep 2026 09:53 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 03 Sep 2026 09:53 AM IST
सार

आगरा में यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के छात्र ऋषभ मिठास की मौत के मामले में सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर नए सिरे से विवेचना के आदेश दिए हैं। अदालत ने दोनों फोरेंसिक रिपोर्टों में विरोधाभास मिलने पर वैज्ञानिक परीक्षण के साथ सीसीटीवी, घटनास्थल और स्कूल स्टाफ की भूमिका की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं।

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Rishabh Mithas Death Case: Court Rejects Police Final Report, Orders Further Investigation
छात्र ऋषभ मिठास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के छात्र ऋषभ मिठास की मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) शारिब अली ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं। विवेचना ऐसे अधिकारी से कराने को कहा गया है, जिसका पूर्व की विवेचना से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा हो। फोरेंसिक लैब की 26 अगस्त, 2022 और 22 जून 2023 की रिपोर्टों का तुलनात्मक वैज्ञानिक परीक्षण कराए जाने के आदेश किए हैं।
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हरीपर्वत थाना क्षेत्र के गांधी नगर निवासी ब्रह्मदत्त मिठास ने अदालत में अंतिम रिपोर्ट के विरुद्ध प्रोटेस्ट पिटीशन दायर कर आरोप लगाया कि उनका पुत्र ऋषभ यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल खंदारी कैंपस में 12वीं कक्षा का छात्र था। 23 मार्च, 2022 की सुबह 9:50 बजे उन्होंने पुत्र को स्कूल छोड़ा। 11:15 बजे सौरभ नाम के व्यक्ति ने फोन कर तुरंत इमरजेंसी पहुंचने को बोला। वह परिजन संग मौके पर पहुंचे तो देखा पुत्र की मौत हो चुकी थी। इस तथ्य को स्कूल स्टाफ ने छुपाया।
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उनके पुत्र ने स्कूल में कोई अप्रत्याशित घटना देख ली थी। इस कारण योजनाबद्ध तरीके से उसके सिर में चोट पहुंचाकर हत्या कर दी। उसे दुर्घटना का रूप दे दिया। स्कूल प्रबंधन से मिलीभगत कर थाना न्यू आगरा पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा अदालत में प्रेषित कर दी। शव भूतल पर हॉस्टल और कोचिंग के भवन के बीच रास्ते पर पड़ा था, जबकि उसका बैग कोचिंग भवन की तीसरी मंजिल पर था। उसके सिर में चोट लगी थी।
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दूरी और ऊंचाई का दोबारा होगा वैज्ञानिक परीक्षण
अदालत ने पाया कि पहली वैज्ञानिक रिपोर्ट में कहा गया था कि हॉस्टल की तीसरी मंजिल की बालकनी से नीचे गिरना संभव नहीं था और किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की संभावना व्यक्त की गई थी। दूसरी रिपोर्ट में अलग निष्कर्ष सामने आया। अदालत ने माना कि इस महत्वपूर्ण विरोधाभास का पर्याप्त समाधान किए बिना विवेचना समाप्त करना उचित नहीं है। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज की पूर्णता और कवरेज क्षेत्र, घटनास्थल तक आने-जाने के रास्तों, घटना के समय मौजूद लोगों तथा स्कूल स्टाफ की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं। हॉस्टल की तीसरी मंजिल की बालकनी, प्रशासनिक भवन की छत और शव मिलने के स्थान के बीच की दूरी व ऊंचाई का दोबारा वैज्ञानिक परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं।
 
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