रूस-यूक्रेन युद्ध से परिंदे भी खतरे में: प्रवासी पक्षियों की वतन वापसी मुश्किल, बमबारी का पड़ सकता है असर
यूक्रेन में फंसे लोग तो अपने अपने देशों में लौट रहे हैं, लेकिन यूक्रेन के रास्ते हिमालय को पार कर भारत आने वाले प्रवासी पक्षियों की वतन वापसी मुश्किल हो गई है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध से उन प्रवासी पक्षियों के लिए खतरा बढ़ गया है, जो साइबेरिया और ठंडे यूरोपीय देशों से सर्दियों में प्रवास के लिए यहां आते हैं। यह समय उनकी घर वापसी का है। पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक प्रवासी पक्षी सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे के माइग्रेशन रूट से यूरोप व एशियन देशों को वापस लौटते हैं, लेकिन बमबारी, रेडिएशन और फाइटर प्लेन की उड़ान से उनकी घर वापसी में खलल पड़ रहा है।
रूस यूक्रेन के इस युद्ध क्षेत्र के वेटलैंड से प्रवासी पक्षी कुछ संख्या में भारतीय उपमहाद्वीप में आते हैं। इनकी वापसी भी इन्ही वेटलैंड पर होती है। पक्षियों के जानकार विपिन कपूर ने बताया कि इनमें डक फैमिली के ग्रेलैग गूज, कॉमन शेल्डक, रूडी शेल्डक, मलार्ड, नोर्दन पिनटेल, नोर्दन शोवलर, गार्गेनी, कॉमन पोचार्ड और रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड आदि प्रजातियां है।
यूक्रेन के पास पक्षियों के दो माइग्रेशन रूट
पक्षी विशेषज्ञ डा. केपी सिंह ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र के पास तीन फ्लाई वे हैं, जिसमें सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे, वेस्ट एशियन-ईस्ट अफ्रीकन फ्लाई-वे तथा ब्लैक सी-मेडिटेरियन फ्लाई-वे जुड़ते हैं। इनमें पहले दो से भारतीय उपमहाद्वीप में पक्षियों का माइग्रेशन होता है। भारत आने वाले प्रवासी पक्षी सेन्ट्रल एशियन फ्लाई वे के पांच माइग्रेशन रूट का प्रयोग आने और जाने के लिए करते हैं जिनमें से दो रूट यूक्रेन के आस पास के हैं जिसे ग्रीन रूट के नाम से जाना जाता है।
विषैले रेडिएशन से पक्षियों के जीवन को खतरा
युद्ध के कारण विषैले धुएं और रेडिएशन से प्रभावित वातावरण से प्रवासी पक्षियों की अपने मूल स्थानों पर वापसी जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। युद्ध क्षेत्र के वेटलैंड्स पर बैक माइग्रेशन के बाद पहुंचने वाले पक्षियों के लिए खतरा हो सकता है।
पक्षी विशेषज्ञ डा. केपी सिंह के मुताबिक सेन्ट्रल एशियन फ्लाईवे से 370 प्रजातियों के पक्षी आते हैं जिनमें से 310 प्रजातियां का जीवन वेटलैंड पर निर्भर है। सेंट्रल एशियन फ्लाईवे भारत सहित 30 देशों को कवर करता है। राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पास ऐसा कोई शोध या रिपोर्ट नहीं आई है, जिसमें प्रवासी पक्षियों को नुकसान का अंदेशा जताया गया हो।