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Agra: रजिस्ट्री दफ्तर पर सात दिन तक लटका रहा ताला, 300 करोड़ का लगा झटका
Mon, 12 May 2025 09:13 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 12 May 2025 09:13 AM IST
सार
तालाबंदी से रजिस्ट्री दफ्तर को 300 करोड़ का बड़ा झटका लगा है। वर्ष 2025-26 में 1400 करोड़ स्टांप से आय का लक्ष्य है। ऐसे में ये सात दिन हड़ताल से बड़ा नुकसान हुआ है।
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आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के रजिस्ट्री दफ्तर में सात दिन से ताला बंद है। निजीकरण के विरोध में अधिवक्ता, कातिब और स्टांप वेंडर्स हड़ताल से रजिस्ट्री दफ्तर को करीब 300 करोड़ रुपये का झटका लगा है। एक हजार से अधिक लेखपत्र पंजीयन के इंतजार में रुके हुए हैं।
सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा की वजह से सदर तहसील स्थित पांचों रजिस्ट्री दफ्तर बंद रहेंगे। मंगलवार से हड़ताल खत्म होने की उम्मीद है। बीते सोमवार से स्टांप बिक्री ठप है। वर्ष 2025-26 के लिए स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने आगरा को 1400 करोड़ रुपये की स्टांप से आय का लक्ष्य दिया है।
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सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा की वजह से सदर तहसील स्थित पांचों रजिस्ट्री दफ्तर बंद रहेंगे। मंगलवार से हड़ताल खत्म होने की उम्मीद है। बीते सोमवार से स्टांप बिक्री ठप है। वर्ष 2025-26 के लिए स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने आगरा को 1400 करोड़ रुपये की स्टांप से आय का लक्ष्य दिया है।
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हड़ताल और तालाबंदी के कारण लक्ष्य-पूर्ति प्रभावित हो रही है। सदर तहसील बार एसोसिएशन के महासचिव अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि मंगलवार को बार की बैठक बुलाई है। जिसमें आगे की रणनीति तय होगी।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है कि एडीएम व एआईजी को वार्ता कर मामले का समाधान कराने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ताओं की मांगों के संबंध में शासन को अवगत कराया जाएगा। हड़ताल से आमजन भी प्रभावित हैं।
सदर तहसील में बैनामा, वसीयत, किरायानामा आदि लेखपत्रों के पंजीयन के लिए रोज करीब 2500 दस्तावेज पहुंचते हैं। सात दिन में एक भी दस्तावेज पंजीकृत नहीं हो सका है।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है कि एडीएम व एआईजी को वार्ता कर मामले का समाधान कराने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ताओं की मांगों के संबंध में शासन को अवगत कराया जाएगा। हड़ताल से आमजन भी प्रभावित हैं।
सदर तहसील में बैनामा, वसीयत, किरायानामा आदि लेखपत्रों के पंजीयन के लिए रोज करीब 2500 दस्तावेज पहुंचते हैं। सात दिन में एक भी दस्तावेज पंजीकृत नहीं हो सका है।