{"_id":"5a5f44034f1c1b8a268b4d45","slug":"recovery-of-salary-from-suspended-teacher-of-agra-university","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड को तनख्वाह देती रही आगरा यूनिवर्सिटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड को तनख्वाह देती रही आगरा यूनिवर्सिटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 17 Jan 2018 06:15 PM IST
विज्ञापन
dr bhimrao ambedkar university agra
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा में डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षणेत्तर कर्मचार संघ के पूर्व अध्यक्ष हरीश कसाना को चार वर्ष तक गैर हाजिरी रहने के बाद भी वेतन दिया गया।
कुलसचिव ने एकाउंट विभाग से पूछा है कि वेतन किस आधार पर जारी किया गया। अब वेतन की रिकवरी करने के लिए भी लिखा है।
हरीश कसाना की तैनाती विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस के भौतिक विज्ञान विभाग में थी। एसआईटी ने उसे फर्जी मार्कशीट प्रकरण में दोषी ठहराया गया। दिसंबर 2017 मध्य में गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
कुलसचिव ने एकाउंट विभाग से पूछा है कि वेतन किस आधार पर जारी किया गया। अब वेतन की रिकवरी करने के लिए भी लिखा है।
हरीश कसाना की तैनाती विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस के भौतिक विज्ञान विभाग में थी। एसआईटी ने उसे फर्जी मार्कशीट प्रकरण में दोषी ठहराया गया। दिसंबर 2017 मध्य में गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
वहीं, वह वर्ष 2013 से अनुपस्थित रहने के कारण कुलसचिव आरपी सिंह की ओर से 27 दिसंबर 2017 को हरीश कसाना के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
मंगलवार को कुलसचिव के पास हरीश कसाना की फाइल पहुंची। उसमें हरीश को निलंबन भत्ता दिए जाने की संस्तुति की गई थी। कुलसचिव ने पूछा कि निलंबन अवधि में वह विश्वविद्यालय में पहुंच रहे है या नहीं।
पता चला कि वह अब भी उपस्थिति नहीं दर्ज करा रहा है। निलंबन भत्ता दिए जाने पर रोक लगा दी। कुलसचिव आरपी सिंह ने बताया कि एकाउंट विभाग से पूछा गया है कि चार वर्ष तक अनुपस्थित रहने के बाद भी किस आधार पर हरीश कसाना वेतन जारी किया गया। उसकी रिकवरी की जाए।
मंगलवार को कुलसचिव के पास हरीश कसाना की फाइल पहुंची। उसमें हरीश को निलंबन भत्ता दिए जाने की संस्तुति की गई थी। कुलसचिव ने पूछा कि निलंबन अवधि में वह विश्वविद्यालय में पहुंच रहे है या नहीं।
पता चला कि वह अब भी उपस्थिति नहीं दर्ज करा रहा है। निलंबन भत्ता दिए जाने पर रोक लगा दी। कुलसचिव आरपी सिंह ने बताया कि एकाउंट विभाग से पूछा गया है कि चार वर्ष तक अनुपस्थित रहने के बाद भी किस आधार पर हरीश कसाना वेतन जारी किया गया। उसकी रिकवरी की जाए।