कोरोना काल में नहीं होगा रावण-मेघनाथ के पुतलों का दहन, कासगंज में टूटी 100 साल पुरानी परंपरा
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कोरोना काल में इस बार सौ साल से अधिक पुरानी परंपरा टूट गई है। कासगंज में रामलीला का मंचन नहीं हो रहा। रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी नहीं किया जाएगा। आयोजक सांकेतिक कार्यक्रम कर औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। इससे रामलीला प्रेमी मायूस हैं। उधर, कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष दुष्यंत वशिष्ठ ने बताया कि हमने रामलीला मंचन और रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतले के दहन के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। अब हमने सिर्फ राजगद्दी के लिए सीमित अनुमति मांगी है।
रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष विवेक राजपूत ने बताया कि सांकेतिक कार्यक्रमों की औपचारिकता धूपड़ धर्मशाला में की जा रही है। धार्मिक अनुष्ठान सीमित संख्या में किए जा रहे हैं। कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। रामलीला मंचन न होने से मायूसी है।
पुतला बनाने वाले कारीगर गंगा सिंह पहलवान ने बताया कि हर साल रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाते थे, लेकिन इस बार कोरोना के कारण रामलीला का मंचन नहीं हो रहा है। इसलिए रामलीला कमेटी ने पुतले बनाने का ऑर्डर नहीं दिया है। इससे मन उदास है।
जिलाधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि इस बार कोरोना गाइडलाइन के मद्देनजर रामलीला का मंचन नहीं हो रहा है। हालांकि रामकथा, रामचरित मानसपाठ सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। इस बार रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले नहीं जलाए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक मनोज सोनकर ने कहा कि पूरी तरह गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा। कहीं भी सामूहिक रूप से आयोजन नहीं होने दिए जाएंगे। पुलिस दशहरा पर्व को लेकर सतर्क है। मेलों की अनुमति नहीं है।