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लॉकडाउन में रमजानः व्हाट्सएप पर मिलेगा सहरी व इफ्तार का वक्त

Fri, 17 Apr 2020 12:22 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 17 Apr 2020 12:22 AM IST
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Ramadan 2020 Time Of Sahri And Iftar Will Be Sent On Whatsapp In   Lockdown
ramadan - फोटो : ramadan
रमजान का मुकद्दस महीना संभवत: 25 अप्रैल से शुरू हो जाएगा। लॉकडाउन के कारण इस बार रोजे के लिए सहरी और इफ्तार के वक्त को बताने वाले कैलेंडर नहीं छपवाए जा सके हैं।
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इन कैलेंडरों का वितरण कई इस्लामिक संस्थाएं और समाजसेवी भी मस्जिदों पर करते हैं। इनका वितरण शुक्रवार यानी 17 अप्रैल से होना था मगर अब इनके स्थान पर लोगों को व्हाट्सएप पर सहरी व इफ्तार का टाइम टेबल भेजा जाएगा।
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एक दूसरे तक ऑनलाइन पहुंचाएं कैलेंडर
इस्लामिया लोकल एजेंसी के चेयरमैन हाजी असलम कुरैशी ने बताया कि रमजान का चांद दिखने से पहले ही रोजे के लिए सहरी व इफ्तार का कैलेंडर छपवाए जाते हैं।

इस दफा लॉकडाउन के कारण कैलेंडर का वितरण शाही जामा मस्जिद पर नहीं करवाया जाएगा। अन्य संस्थाओं से भी कहा गया है कि वह व्हाट्सएप पर कैलेंडर को रोजेदारों तक पहुंचाएं, ताकि मुसलमान सही वक्त पर सहरी कर सकें और रोजा खोल सकें।
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बंदिशों के बीच रोजा एक इम्तिहान
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी ने बताया कि लॉकडाउन में रोजेदारों का असल इम्तिहान होगा। तमाम बंदिशों के बीच रोजा रखना होगा। खाने-पीने की चीजों की किल्लत चल रही है।

ऐसे में सहरी और इफ्तार का वक्त भी सभी लोगों को मोबाइल पर दिया जाएगा। मस्जिदों से भी इमाम दोनों वक्त अजान देकर इत्तिला कर देंगे। पहले भी मस्जिदों से ही इत्तिला दी जाती थी। 

घरों में रहकर करें इबादत
भारतीय मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई का कहना है कि रोजा इफ्तार के कैलेंडर की छपाई का वक्त गुजर चुका है। अब लोगों को मस्जिदों की जगह घरों में ही नमाज और तरावीह पढ़नी है। ऐसे में सहरी और इफ्तार का सही वक्त मुकर्रर होने के बाद इसे व्हाट्सएप के जरिए ही लोगों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है।

घर में सूरह-ए-तरावीह पढ़ें : उजैर आलम
उलमा-ए-इकराम ने कहा है कि इस बार घरों में ही तरावीह पढ़ी जानी है। जिन घरों में हाफिज होंगे, वह तरावीह पढ़ा देंगे, लेकिन जहां हाफिज उपलब्ध नहीं होंगे, वहां सूरह-ए-तरावीह के साथ नमाज पढ़ी जाती है, जिसे सून्नत तरावीह भी कहते हैं। इसे पढ़ा जा सकता है। इसमें पूरा कुरान नहीं होता है। उसके सहारे ही तरावीह को रमजान में पूरा सकते हैं।  - मौलाना मोहम्मद उजैर आलम, नायब काजी, आगरा
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