Raksha bandhan 2020: 558 साल बाद रक्षाबंधन पर दुर्लभ योग, भद्रा के बाद ही भाई को बांधें राखी
- गुरु अपनी राशि धनु में और शनि मकर में वक्रीय रहेंगे, चंद्रमा भी शनि के साथ मकर राशि में
- सुबह 9:30 बजे तक रहेगी भद्रा, उसके बाद राखी बांध सकेंगी बहनें
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रक्षाबंधन का पर्व पर सोमवार को 558 साल बाद गुरु और शनि अपनी राशि में वक्रीय होंगे। गुरु अपनी राशि धनु में और शनि मकर में वक्रीय रहेंगे । चंद्रमा भी शनि के साथ मकर राशि में रहेगा। ऐसा योग 558 साल पहले 22 जुलाई 1462 में बना था। सोमवार को सुबह 9.30 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
बाह के ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि सोमवार और पूर्णिमा एक साथ होने से आनंद योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, श्रवण योग बन रहा है। सोमवार को सुबह 9.30 से 10.30 बजे से शुभ, दोपहर 1.30 से 3 बजे तक चर, 3 से 4.30 बजे तक लाभ, शाम 4.30 से 6 बजे तक अमृत, 6 से 7.30 बजे तक चर का चौघड़िया मुहूर्त रहेगा । सोमवार के दिन रक्षाबंधन होने की वजह से अन्न एवं धन धान्य के लिए अच्छे अवसर पैदा होंगे ।
आगरा की ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए । कहते हैं कि रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांध दी थी । इस कारण रावण का विनाश हो गया। इस बार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस संयोग में सभी मनोकामना पूरी होतीं हैं। साथ ही आयुष्मान और दीर्घायु प्राप्त होती है।
सोमवार के दिन पूर्णिमा पड़ने का संयोग भी अच्छा है। ऐसा कम ही देखने को मिलता है। इसके अलावा तीन अगस्त को चंद्रमा का ही श्रवण नक्षत्र पड़ रहा है। मकर राशि का स्वामी शनि और सूर्य समसप्तक योग बना रहे हैं। शनि और सूर्य दोनों ही आयु बढ़ाते हैं। ऐसा संयोग 29 साल बाद आया है।
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