फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Rajouri encounter Martyr Captain Shubham Gupta left law studies and chose army

कैप्टन शुभम गुप्ता:  27 साल की उम्र में आसमानी हौसले, तेरी मिट्टी में मिल जावां... ये बोल बन गए हकीकत

Fri, 24 Nov 2023 10:02 AM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 24 Nov 2023 10:02 AM IST
सार

बचपन के सपने को पूरा करने के लिए वकालत की पढ़ाई छोड़ शुभम गुप्ता ने सेना की वर्दी को चुना। सिग्नलिंग भी रास न आया, जिसके बाद कमांडो ट्रेनिंग ली। भाइयों और दोस्तों से कहते थे एक दिन दुनिया सलाम करेगी।

विज्ञापन
Rajouri encounter Martyr Captain Shubham Gupta left law studies and chose army
शहीद कैप्टन शुभम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उम्र 27 साल जरूर थी, पर हौसले आसमानी थे। जज्बा ऐसा कि राह कभी आसान चुनी ही नहीं। तभी तो बचपन के सपने को पूरा करने के लिए वकालत की पढ़ाई छोड़, सेना की वर्दी चुनी। गाने का शौक था और अक्सर तेरी मिट्टी में मिल जावां... गाना गुनगुनाते थे। गीत के बोल अब हकीकत बन गए और सच में शुभम पावन माटी बन गया। ये बताते हुए भाई और दोस्तों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
विज्ञापन


प्रतीक एन्क्लेव स्थित आवास पर गमगीन बैठे नरेश गुप्ता (शुभम के ताऊ के बेटे) से शुभम का जिक्र छेड़ने पर वो भावुक हो गए। बोले, उन्हें चुनौतियां स्वीकार थीं। चाचाजी (पिता बसंत गुप्ता) के वकील होने के कारण शुभम ने विधि की पढ़ाई जरूर की, लेकिन मन सेना में लगा था। सेना में उन्हें सिग्नलिंग सेल में जिम्मेदारी मिली, लेकिन ये भी रास नहीं आया। दो-तीन महीने बाद ही सेना की ओर से कमांडो के लिए ट्रेनिंग के लिए फाॅर्म भरवाए गए। शुभम को इसी का इंतजार था और फॉर्म भर दिया।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें -  यूपी: शेरदिल था मेरा बेटा... व्यर्थ नहीं जाएगा बलिदान, ये कहते-कहते बिलख पड़े कैप्टन शुभम के पिता
 

नरेश ने कहा कि ट्रेनिंग के बाद जब शुभम ने कमांडो बनने की बात बताई तो मैंने कहा कि इसमें खतरा अधिक रहता है। तो बोला, भइया आसान गोल करना ही किसे है। देखना एक दिन पूरा देश सलाम करेगा। ये कहते हुए नरेश फफक पड़े। खुद को संभालते हुए बोले...देखो, आज उसने ऐसा ही कर दिखाया। ऐसे लोग भी नमन करने आ रहे हैं, जिनसे हमारा रिश्ता भी नहीं है।
 

हाथ-पैरों में ठेक देख जाना कमांडो बन गए : ऋषभ
शुभम के छोटे भाई ऋषभ गुप्ता ने बताया कि भैया ने अपनी जिंदगी के लक्ष्य तय कर रखे थे। पूरा होने के बाद ही वह किसी को बताते थे। सेना में कमांडो की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद घर आए तो काफी पतले नजर आए। हाथ-पैरों में ठेक बन गई थीं। ये देख मम्मी-पापा ने पूछ लिया। तब उन्होंने बताया कि वह कमांडो बन गए हैं। वो मुझसे भी कहते थे कि मन में जो है उसे पूरा करने के लिए मेहनत करो।

ये भी पढ़ें -   यूपी: दिवाली बाद छुट्टी पर आऊंगा...फिर आई शहादत की खबर और बिलख पड़े कैप्टन शुभम गुप्ता के दोस्त
 

सेना और देशभक्ति की करते थे बातें : रिंकू
चचेरे भाई रिंकू गुप्ता ने बताया कि शुभम ऑलराउंडर और हंसमुख थे। गाने का बहुत शौक था और ऋषभ के साथ मिलकर गाते थे। देशभक्ति गीत अधिक गाते थे। पियानो और वायलिन भी बजाते थे। इंटरमीडिएट के बाद उनके कई दोस्त व्यापार और अन्य पढ़ाई में रम गए, लेकिन उनको सेना में जाकर देश के लिए कुछ कर गुजरना था। देश, सेना की बातें कर हमें भी प्रेरित करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed