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एक्सपायर दवाओं के सौदागर: राजौरा बंधुओं ने बिना बिल के बेच दीं चार करोड़ रुपये की दवाएं

Thu, 11 Feb 2021 01:54 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 11 Feb 2021 01:54 PM IST
सार

  • एक-एक जिले में 50-50 लाख रुपये तक की दवाओं की बिक्री
  • औषधि विभाग की शुरुआती जांच में मिली चौंकाने वाली जानकारी

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Rajaura brothers sold medicines worth four crore rupees without bills in agra
पुलिस की गिरफ्त में नकली और एक्सपायर दवा बेचने के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में नकली और एक्सपायर दवाओं के सौदागर राजौरा बंधुओं ने एक साल में चार करोड़ रुपये की दवाएं तो बगैर बिल के ही बेच दीं। ये आठ जिलों के देहात के झोलाछापों और मेडिकल स्टोरों को बेची गईं। औषधि विभाग की प्रारंभिक जांच में इसकी जानकारी मिली है। अब उन झोलाछापों और मेडिकल स्टोर संचालकों के बारे में जानकारी की जा रही जो उनसे दवाएं खरीदते थे।

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औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रदीप राजौरा और धीरज राजौरा एक्सपायर और नकली दवाओं को आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, हाथरस, कासगंज और अलीगढ़ में सप्लाई करने की जानकारी मिली है। हर जिले में लगभग 50 लाख तक की दवाएं बेची हैं। 
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इसका पता इनकी फर्म से मिले दस्तावेज से मिला है। ये लोग इसका हिसाब तो रखते थे कि किसे कितनी दवाएं बेची गई लेकिन इसके बिल नहीं बनाते थे। पुलिस से कहा गया है कि इनके मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई जाए तो दवा खरीदने वाले झोलाछापों के नाम और पते मिल सकते हैं।

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गूगल तक नहीं बता पाया किन तत्वों से बनाईं नकली दवाएं
राजौरा बंधु नकली दवाओं के जो रैपर तैयार कराते थे, उन पर साल्ट के नाम अपनी मर्जी से कुछ भी लिखवा लेते थे। औषधि विभाग ने नकली दवाओं की सूची तैयार की तो इसका पता चला। आठ नकली दवाएं ऐसी थीं जिनके तत्व (सॉल्ट) की औषधि निरीक्षकों को भी जानकारी नहीं थी। मालूम करने के लिए पहले किताबें देखी गई, इनमें भी नहीं मिले तो गूगल पर खोजा गया लेकिन यहां भी इन नाम के सॉल्ट नहीं मिले।

औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि राजौरा बंधुओं की कंपनी लाइफ रेमेडीज को गूगल और आठ दवाओं के अलग-अलग तत्वों को खोजा गया तो कोई जानकारी नहीं मिली है। इससे लगता है कि दवाओं के पत्ते पर फर्जी तत्व अंकित किए हैं। इसके यहां से मिलीं मस्तिष्क रोग, पेट रोग, स्त्री रोग, मानसिक रोग, एंटीबॉडीज और दर्द निवारक दवाओं के नमूनों की जांच कराई जा रही है। नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद इसके खिलाफ धाराएं और बढ़ा दी जाएंगी।

मोनोपॉली कंपनियों से खरीदते थे एक्सपायर दवाएं
आगरा। राजौरा बंधु एकाधिकार (मोनोपॉली) कंपनियों के यहां से एक्सपायर हो चुकी दवाओं की खरीद कर इनको दोबारा पैक कर बाजार में सप्लाई करता था। खुद की कंपनी की एक्सपायर दवाओं को भी ऐसे ही ठिकाने लगा रहा था।

औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि मोनोपॉली कंपनी की एक्सपायर दवाओं को एकत्रित कर इनको दोबारा पैक करता था। इसके लिए यह मथुरा, गाजियाबाद से इनकी खरीद की जानकारी मिली है। इसकी पूरी जानकारी नहीं बता रहा है। यह कहां-कहां से इनकी खरीद कर रहा था, इसकी जांच की जा रही है। 

खुद की कंपनी की एक्सपायर हो चुकी दवाओं को यह दोबारा पैक नहीं करता था, उसके लिए यह रैपर से रसायन का उपयोग कर एक्सपायर तिथि को मिटाकर डाई के जरिये नई तारीख अंकित कर देता था। डाई समेत अन्य सामान इसके यहां से जब्त भी हुआ है। रैपर की छपाई मथुरा में ही कराने की जानकारी मिली है, एक प्रिंटिंग मशीन का सुराग मिला है, इसके खिलाफ अभी और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

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