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आगराः घड़ियालों की इन आदतों और व्यवहारों के बदलावों का पता लगाएगा ये ट्रांसमीटर

Fri, 02 Nov 2018 10:31 AM IST
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 02 Nov 2018 10:31 AM IST
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radio telemetry transmitter fitted on crocodile
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

आगरा के चंबल नदी में घड़ियालों की आदत और उनका व्यवहार कितना बदल रहा है, यह रेडियो टेलीमेटरी ट्रांसमीटर के जरिए पता चलेगा। चंबल नदी में नदगवां घाट के पास अमेरिकी विशेषज्ञ विलियम जैफरी लेंग और मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट के सहयोग से वन्य जीव विभाग ने घड़ियालों पर रेडियो टेलीमेटरी ट्रांसमीटर लगाए। 

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इस क्षेत्र के दस घड़ियालों पर इसे लगाया जा रहा है। इन ट्रांसमीटरों के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि नदगवां से डाउन स्ट्रीम में चंबल के घड़ियाल मानसूनी सीजन में 200 किमी तक की दूरी तय कर रहे हैं। 
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राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी क्षेत्र के डीएफओ आनंद कुमार के साथ अमेरिकी विशेषज्ञ विलियम जैफरी लेंग और एमसीबीटी के जेलाब्दीन महमूद ने नदगवा घाट पर रेडियो टेलीमेटरी ट्रांसमीटर लगाया। दो साल तक इन ट्रांसमीटर की बैटरी काम करती है। चार साल से बड़ी उम्र के घड़ियालों की पूंछ में यह फिट किए गए ताकि उनकी लोकेशन की जानकारी रहे। 
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2007-08 में इस क्षेत्र में एक साथ 100 घड़ियालों के मरने के बाद यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत ट्रांसमीटर की योजना विलियम जैफरी लेंग के निर्देशन में बनाई गई थी। यह घड़ियाल कितने क्षेत्र में और कहां-कहां तक घूम रहे हैं, इसकी जानकारी इन ट्रांसमीटर से हो रही है। अमूमन यह 14-16 किमी के क्षेत्र में तैरते हैं और वापस अपने क्षेत्र में लौट आते हैं।

60 ग्राम वजनी है ट्रांसमीटर

हर हरकत पर नजर के लिए घड़ियालों में बांधे जाने वाला ट्रांसमीटर महज 60 ग्राम वजन का है। यह 18×10×8 सेमी. का है। इसकी बैटरी चंबल में ढाई साल तक चलती है और 0.5 से 3 किमी तक की रेंज में इससे घड़ियाल की हरकतों की जानकारी रहती है।

यमुना, चंबल के संगम इटावा के पचनदा तक यह पहुंच चुके हैं। कभी रेड लिस्ट में शामिल रहे शिड्यूल वन के वन्य जीव घड़ियालों की 80 फीसदी संख्या चंबल नदी में पाई जाती है। रेडियो टेलीमेटरी से मिले आंकड़ों से इनके संरक्षण में मदद मिलेगी। 

- इस क्षेत्र में दस घड़ियालों को रेडियो टेलीमेटरी ट्रांसमीटर लगाया जा रहा है, जिससे नदी में इनके व्यवहार, ईकोलोजी में बदलाव का अध्ययन किया जा सकेगा। अपस्ट्रीम में यह कितना सफर तय करते हैं, यह भी पता चल सकेगा
आनंद कुमार, डीएफओ, नेशनल चंबल सेंक्चुरी

ये है आंकड़ा

428 किमी स्ट्रेच में है चंबल सेंक्चुरी
115 किमी स्ट्रेच में घड़ियाल पर नजर
1800 से ज्यादा हैं अब घड़ियाल
1976 में महज दो सौ ही बचे थे घड़ियाल
100 घड़ियाल 2007 में चंबल में एक साथ मरे
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