फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Protected with Taj but lost the guru ka taal agra

Agra: ताज के साथ संरक्षित हुआ, पर गुम हो गया गुरु का ताल, जानें क्या है पूरा मामला

Sun, 07 May 2023 11:32 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 07 May 2023 11:32 AM IST
सार

मुगल बादशाह जहांगीर के काल में बनवाए गए बारादरी और ताल दोनों अब मूलरूप में नहीं हैं। इनमें गुरु का ताल केंद्रीय सरकार यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षित है, लेकिन अब यहां पानी की जगह खेती हो रही है।

विज्ञापन
Protected with Taj but lost the guru ka taal agra
गुरुद्वारा गुरु का ताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ताजमहल के साथ ही गुरु के ताल स्मारक को भी संरक्षित किया गया। ताज तो यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल हो गया लेकिन गुरु का ताल गायब हो गया। जहांगीर कालीन लाल पत्थर की बारादरी, बगीचा व ताल भी लापता है। कहा जा रहा है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 22 दिसंबर 1920 को संरक्षित गुरु के ताल के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया। जहांगीर काल में सिकंदरा-ककरैठा क्षेत्र का यह सबसे बड़ा लाल पत्थर का तालाब था।

विज्ञापन


मुगल बादशाह जहांगीर के काल में बनवाए गए बारादरी और ताल दोनों अब मूलरूप में नहीं हैं। इनमें गुरु का ताल केंद्रीय सरकार यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षित है, लेकिन अब यहां पानी की जगह खेती हो रही है। साल 1675 में गुरु तेग बहादुर इस बारादरी और ताल पर 9 दिन रुके थे, जिसके बाद यह गुरु के ताल के नाम से चर्चित हो गया। इसी नाम से एएसआई ने इसका संरक्षण किया है।
विज्ञापन

तीन आर्च का बरामदा, 12 खंभों वाली बारादरी

इतिहासकार प्रो. रामनाथ की पुस्तक आगरा एंड इट्स मॉन्यूमेंट में प्रो. रामनाथ ने लिखा है कि जहांगीर के आगरा सूबा के गवर्नर एतबार खां के परिसर में बारादरी और ताल था, जिसे गुरु का ताल नाम दिया गया। लाल पत्थर के 12 खंभों वाले तिवारा दालान के इस स्मारक को बारादरी कहा गया। तीन आर्च के गुंबद थे, जिसके दोनों किनारों पर छोटी छतरियां थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


भूतल से दक्षिण दिशा की ओर लाल पत्थर की चौड़ी सीढ़ी ऊपरी मंजिल तक जाती थी, जहां बारादरी 9 खंडों में बंटी थी। आगरा गजेटियर में इसका पूरा ब्योरा है। यह अकबर के 9 रत्नों पर आधारित बारादरी की संरचना थी, जिसके पश्चिम में गुरु का ताल था। यह ताल ईंट और लाल पत्थर से बना हुआ था, जिसमें रैंप और चारों ओर छतरियों के साथ घाट बने थे। अष्टकोणीय टावर अब भी ताल के कोनों पर हैं, पर ताल की जमीन पर मिट्टी भरकर खेती की जा रही है।

ये भी पढ़ें छात्राओं से ब्लैकमेलिंग मामला: साइबर सेल ने शुरू की जांच, व्हाट्सएप हैक कर भेजे थे अश्लील मैसेज

दक्षिण पूर्वी कोने पर रुकता था पानी

प्रो. नाथ की पुस्तक के मुताबिक ककरैठा क्षेत्र के बारिश के पानी को इसी ताल में एकत्र किया जाता था। इस जलाशय के दक्षिण पूर्वी कोने में तीन आर्च में सैल्यूस गेट लगा था, जिससे पानी ज्यादा आने पर नहर में बहा दिया जाता था। मुगलों की पानी के संरक्षण की यह उत्कृष्ट वास्तुकला मानी गई। 6 हजार मनसब वाले आगरा सूबे के गवर्नर एतबार खां की ओर से बनवाए गए परिसर में बारादरी, मस्जिद और पत्थर घोड़ा है। अब गुरु के ताल और पत्थर घोड़ा के बीच नेशनल हाईवे और पुराना आगरा-दिल्ली रोड है।

प्रवेश नहीं करने दे रहा प्रबंधन

अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल ने बताया कि जैसे बुढि़या का ताल को हम पुराने मूल स्वरूप में ला रहे हैं, वैसे ही गुरु के ताल को लाने की योजना बनाई थी, पर गुरुद्वारा प्रबंधन हमें प्रवेश नहीं करने देता। इस वजह से ताल का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। अमृत मिशन में डीईआई के साथ सर्वे कर योजना बनाई थी, पर हमें प्रवेश तो मिले। हम पहले की तरह पानी से भरा ताल बना देंगे, जो गुरु तेग बहादुर की याद और यहां के इतिहास को बरकरार रखेगा।
 

नहर बंद होने से सूख गया ताल

गुरुद्वारा गुरु का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि यहां नहर से पानी आता था, नहर बंद हो गई तो ताल सूख गया। पुराना ताल काफी जगह में था, पर हम छोटी जगह में बनाएंगे। एएसआई का यहां कोई स्थान नहीं है। जो भी करेगा, हमारा समाज करेगा। एएसआई वाले आए थे, हमने उन्हें पानी उपलब्ध कराने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed