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अनुज धर बोले, देश जानना चाहता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का वो सच जो आज भी है राज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 19 Mar 2018 10:50 AM IST
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कार्यक्रम की हुई शुरुआत
- फोटो : अमर उजाला
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जब हमारे देश में किसी राजनैतिक केस पर किसी महिला की अस्थियों का अमेरिका में डीएनए जांच हो सकती है तो देश पर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर चुके महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों का डीएनए की जांच क्यों नहीं?
यह सवाल उठाया है विचारक अनुज धर ने। वह रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नेहरू नगर की विजय साप्ताहिक मिलन व विजय नगर कॉलोनी की नव विजय साप्ताहिक मिलन की ओर से आयोजित सेमिनार में सुभाष चंद बोस पर व्याख्यान दे रहे थे।
विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस स्थित जेपी सभागार में कहा भारत की स्वतंत्रता के लिए आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करने वाले सुभाष चंद्र बोस की मौत एक रहस्य बनी हुई है। देश जानना चाहता है कि आखिर नेताजी सुभाष बोस किन परिस्थितियों में गायब हुए या फिर उनकी मौत हुई?
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यह सवाल उठाया है विचारक अनुज धर ने। वह रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नेहरू नगर की विजय साप्ताहिक मिलन व विजय नगर कॉलोनी की नव विजय साप्ताहिक मिलन की ओर से आयोजित सेमिनार में सुभाष चंद बोस पर व्याख्यान दे रहे थे।
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विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस स्थित जेपी सभागार में कहा भारत की स्वतंत्रता के लिए आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करने वाले सुभाष चंद्र बोस की मौत एक रहस्य बनी हुई है। देश जानना चाहता है कि आखिर नेताजी सुभाष बोस किन परिस्थितियों में गायब हुए या फिर उनकी मौत हुई?
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कार्यक्रम में मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि जब हादसे के बारे में इंटेलीजेंस एजेंसी ने हबीब-उर-रहमान से बातचीत की तो उनका कहना रहा कि 17 अगस्त 1945 को वह विमान से नेताजी के साथ सिंगापुर से बैंकाक होते हुए टोक्यो जा रहे थे। विमान जापान में भोजन आदि के लिए रुका था, उसके बाद उड़ान भरने पर वह रनवे के पास क्रेश हो गया।
जब नेताजी ने आग से घिरे दरवाजे से निकलने की कोशिश की तो उनके शरीर में आग लग गई थी। आग बुझाने के प्रयास में हबीब के हाथ भी बुरी तरह जल गए थे। अस्पताल में रात लगभग नौ बजे नेताजी ने अंतिम सांस ली थी।
अंतिम संस्कार के 25 दिन बाद हबीब नेताजी की अस्थियों को लेकर जापान पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भी माना जाता है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी, वे गुमनामी बाबा के रूप में जीवन जीते रहे। गुमनामी बाबा की मौत 1985 में हुई थी।
जब नेताजी ने आग से घिरे दरवाजे से निकलने की कोशिश की तो उनके शरीर में आग लग गई थी। आग बुझाने के प्रयास में हबीब के हाथ भी बुरी तरह जल गए थे। अस्पताल में रात लगभग नौ बजे नेताजी ने अंतिम सांस ली थी।
अंतिम संस्कार के 25 दिन बाद हबीब नेताजी की अस्थियों को लेकर जापान पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भी माना जाता है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी, वे गुमनामी बाबा के रूप में जीवन जीते रहे। गुमनामी बाबा की मौत 1985 में हुई थी।
पीएमओ ने कहा ये
अनुज धर
- फोटो : अमर उजाला
अनुज धर ने बताया कि उन्होंने 2005-06 में प्रधानमंत्री कार्यालय से मांग की थी कि उन्हें वह दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, जिसमें सोवियत संघ में सुभाष बोस के होने की जांच की गई। पीएमओ ने यह कहकर दस्तावेज देने से इंकार कर दिया कि इससे विदेशी ताकतों से हमारे संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
सरकार ने एक आरटीआई के जवाब में इस राज पर से पर्दा उठाया है। आरटीआई के जवाब के अनुसार 18 अगस्त 1945 को नेताजी की मौत ताइवान में हुए विमान हादसे में हुई थी।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि शहनवाज कमेटी की रिपोर्ट, जस्टिस जीडी खोसला कमीशन और जस्टिस मुखर्जी कमीशन की जांच से सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है।
सरकार ने एक आरटीआई के जवाब में इस राज पर से पर्दा उठाया है। आरटीआई के जवाब के अनुसार 18 अगस्त 1945 को नेताजी की मौत ताइवान में हुए विमान हादसे में हुई थी।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि शहनवाज कमेटी की रिपोर्ट, जस्टिस जीडी खोसला कमीशन और जस्टिस मुखर्जी कमीशन की जांच से सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है।