Agra News: जेल में रिहाई के आदेश से पहले पहुंची मौत, बंदी के सीने में हुआ दर्द और चली गई जान
बीएसएनएल के सेवानिवृत्त एसडीओ 62 लाख रुपये के गबन के आरोप में जेल में बंद थे। उनकी हाईकोर्ट से जमानत हुई थी, जिसके बाद रिहाई का परवाना जेल पहुंचा था, लेकिन उसकी वक्त उनकी मौत हो गई।
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आगरा जिला जेल में धोखाधड़ी और गबन के मामले में बीएसएनएल के सेवानिवृत्त एसडीओ शिव नरायन सेहरा डेढ़ महीने से निरुद्ध थे। इधर, जेल में उनकी रिहाई का परवाना पहुंचा उधर, उनकी मौत हो गई। उनकी हाईकोर्ट से जमानत हुई थी। परिजन ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बताया कि जगदीशपुरा स्थित आंबेडकर पार्क के पास रहने वाले शिव नरायन सेहरा (72) पांच सितंबर 2022 से जेल में निरुद्ध थे। वह मोहल्ला सुधार कमेटी के सरपंच भी थे। उनके खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज थे। एक मुकदमा धोखाधड़ी, गबन सहित अन्य धारा में दर्ज था। इसी मामले में उन्हें जेल भेजा गया था। दो मामलों में उनकी पूर्व में जमानत हो गई थी। धोखाधड़ी के मामले में परिजन ने हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। उनकी जमानत हो गई। शुक्रवार शाम पांच बजे बंदी को सीने में दर्द की समस्या होने लगी। इस पर जेल कर्मी एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी लेकर गए, वहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह था मामला
मामले में सात अप्रैल 2019 को थाना जगदीशपुरा में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें बलवा, गालीगलौज, जान से मारने की धमकी, धोखाधड़ी और गबन की धारा लगी थीं। वादी भीम नगर निवासी नंद किशोर थे। इसमें सत्य नगर निवासी बहादुर सिंह, नगला बेर निवासी जगदीश बाबू पिप्पल, शिव नरायन सेहरा, प्रेम सिंह उर्फ भोलू, निहाल सिंह नामजद थे। नंद किशोर वर्ष 2018 की भीमनगरी आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। आयोजन में बहादुर सिंह सचिव, जगदीश बाबू महामंत्री, शिव नरायन सेहरा संयोजक, प्रेम सिंह उपाध्यक्ष और निहाल सिंह मंच व्यवस्थापक थे। आरोप था कि दस रसीद से 62 लाख का चंदा जुटाया गया, जो जमा नहीं किया गया। इसका गबन किया गया।
जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
भाई अमीर चंद सेहरा ने बताया कि मामले में बहादुर सिंह और जगदीश की 15 दिन पहले जमानत हो गई थी। भाई शिव नरायन और प्रेम सिंह की हाईकोर्ट से जमानत हुई थी। रिहाई से पहले सुबह 11 बजे वो भाई से मिलने गए थे। भाई की पत्नी प्रेमवती भी साथ थीं। भाई को चार लोग मुलाकात के लिए लेकर आए थे। तब तबीयत खराब होने के बारे में पता चला था। जेल कर्मियों से उन्हें अस्पताल में भर्ती करने के लिए कहा। मगर, सुनवाई नहंी हुई। वह जेल पहुंचे तब मौत का पता चला। जेल प्रशासन ने लापरवाही की है।