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फर्जीवाड़े की न्यायिक जांच की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jul 2016 01:39 AM IST
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डा. बीआर अंबेडकर विवि अफसरों के झूठ पर भड़की विधान सभा की आश्वासन समिति
- फोटो : अमर उजाला
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डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में मूल्यांकन में गड़बड़ी से लेकर फर्जी मार्कशीट बेचे जाने तक के मामलों की न्यायिक जांच हो सकती है। बुधवार को विश्वविद्यालय अफसरों का झूठ सामने आने पर विधानसभा की आश्वासन समिति ने इसकी संस्तुति करने की बात कही है।
बुधवार को सर्किट हाउस में यूनिवर्सिटी के मामलों की समीक्षा की गई। इसमें समिति से मनीष असीजा संयोजक, दीनदयाल त्रिपाठी अधिकारी, नीरज पांडेय प्रतिवेदक और चौथे सदस्य दलवीर सिंह के अलावा प्रभारी डीएम नगेंद्र प्रताप, यूनिवर्सिटी से कुलसचिव केएन सिंह, डिप्टी रजिस्ट्रार विश्वेश्वर प्रसाद मौजूद थे।
समित ने सवाल किया, आनलाइन रिजल्ट में फर्जीवाड़ा, मार्कशीट के आवेदन डस्टबिन में फेंके जाने, फर्जी मार्कशीट बेचे जाने, मार्कशीट सत्यापन में उगाही करने की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? विवि अफसरों ने कहा, सभी में थाना हरीपर्वत में एफआईआर कराई गई है। समिति ने वहीं पर थाना हरीपर्वत के इंस्पेक्टर को बुलाकर पूछा तो पता चला कि एक भी मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है। यह सुनते ही समिति के सदस्य भड़क गए।
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समिति संयोजक विधायक मनीष असीजा ने कहा, शिकायतें गंभीर हैं। विवि अधिकारी झूठी जानकारी देकर जांच प्रभावित कर रहे हैं। दलवीर सिंह ने कहा कि यहां भ्रष्टाचार नाक तक आ पहुंचा है। छात्रों का भविष्य तो चौपट हुआ ही विश्वविद्यालय की छवि भी धूमिल की है। समिति इसकी रिटायर्ड जज के नेतृत्व में न्यायिक जांच कराने की संस्तुति करेगी।
समिति के निर्देश
- 2013, 2014, 2015 की मार्कशीट-डिग्री कालेज भेजकर बांटी जाएं
- इन वर्षों के लिए हेल्प डेस्क बने, महीने भर में शिकायतों का निस्तारण हो
- बीएड सत्यापन में उगाही करने वाले कर्मियों को चिह्नित कर एफआईआर दर्ज कराई जाए।
- रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के चयन का आधार, मानक और शर्तें तय की जाएं।
इन पर मांगी रिपोर्ट:
. रिजल्ट में आनलाइन फर्जीवाड़ा करके 49 के 61 फीसदी अंक कैसे हुए?
. 2014 की 1.80 लाख डिग्री प्रिंट हुईं तो कहां हैं, नहीं हुई तो क्यों?
. इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की फर्जी मार्कशीट में कराई गई एफआईआर कहां हैं?
. डिग्री-मार्कशीट के लिए आए दिन प्रदर्शन, कचरे के ढेर में कैसे पहुंचे?
. एमबीबीएस के चार्ट गायब, एमबीबीएस का मूल्यांकन निजी कालेज में क्यों कराया?
. प्रैक्टिकल में प्राइवेट शिक्षकों को 100-100 कालेज दिए, सरकारी क्यों नहीं लिए?
. सामूहिक नकल में पकड़े कालेजों को कैसे क्लीन चिट दी गई?
कमिश्नर बनाएंगे लंबित मार्कशीट की सूची
बीते सत्रों की कितनी मार्कशीट-डिग्री लंबित हैं, इसकी जांच कमिश्नर तैयार करेंगे। कुलसचिव से कालेज की सूची, प्राचार्य-प्रबंधक का नाम, फोन नंबर देने को कहा है। इनसे पूछकर मार्कशीट-डिग्री की सूची तैयार कर समिति और विश्वविद्यालय को सौंपा जाएगा।
‘ताउम्र कचहरी के चक्कर काटोगे’
अफसरों के झूठ पर समिति के सदस्य भड़क गए। बोले, रजिस्ट्रार साहब गलत जानकारी दे रहे हो, ताउम्र कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते रहोगे।
24 घंटे में देनी होगी रिपोर्ट
समिति ने फर्जीवाड़ों की सूची विवि अधिकारियों को देते हुए इन पर अब तक हुई कार्रवाई की 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। यह विधानसभा में भी रखी जाएगी।
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बुधवार को सर्किट हाउस में यूनिवर्सिटी के मामलों की समीक्षा की गई। इसमें समिति से मनीष असीजा संयोजक, दीनदयाल त्रिपाठी अधिकारी, नीरज पांडेय प्रतिवेदक और चौथे सदस्य दलवीर सिंह के अलावा प्रभारी डीएम नगेंद्र प्रताप, यूनिवर्सिटी से कुलसचिव केएन सिंह, डिप्टी रजिस्ट्रार विश्वेश्वर प्रसाद मौजूद थे।
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समित ने सवाल किया, आनलाइन रिजल्ट में फर्जीवाड़ा, मार्कशीट के आवेदन डस्टबिन में फेंके जाने, फर्जी मार्कशीट बेचे जाने, मार्कशीट सत्यापन में उगाही करने की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? विवि अफसरों ने कहा, सभी में थाना हरीपर्वत में एफआईआर कराई गई है। समिति ने वहीं पर थाना हरीपर्वत के इंस्पेक्टर को बुलाकर पूछा तो पता चला कि एक भी मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है। यह सुनते ही समिति के सदस्य भड़क गए।
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समिति संयोजक विधायक मनीष असीजा ने कहा, शिकायतें गंभीर हैं। विवि अधिकारी झूठी जानकारी देकर जांच प्रभावित कर रहे हैं। दलवीर सिंह ने कहा कि यहां भ्रष्टाचार नाक तक आ पहुंचा है। छात्रों का भविष्य तो चौपट हुआ ही विश्वविद्यालय की छवि भी धूमिल की है। समिति इसकी रिटायर्ड जज के नेतृत्व में न्यायिक जांच कराने की संस्तुति करेगी।
समिति के निर्देश
- 2013, 2014, 2015 की मार्कशीट-डिग्री कालेज भेजकर बांटी जाएं
- इन वर्षों के लिए हेल्प डेस्क बने, महीने भर में शिकायतों का निस्तारण हो
- बीएड सत्यापन में उगाही करने वाले कर्मियों को चिह्नित कर एफआईआर दर्ज कराई जाए।
- रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के चयन का आधार, मानक और शर्तें तय की जाएं।
इन पर मांगी रिपोर्ट:
. रिजल्ट में आनलाइन फर्जीवाड़ा करके 49 के 61 फीसदी अंक कैसे हुए?
. 2014 की 1.80 लाख डिग्री प्रिंट हुईं तो कहां हैं, नहीं हुई तो क्यों?
. इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की फर्जी मार्कशीट में कराई गई एफआईआर कहां हैं?
. डिग्री-मार्कशीट के लिए आए दिन प्रदर्शन, कचरे के ढेर में कैसे पहुंचे?
. एमबीबीएस के चार्ट गायब, एमबीबीएस का मूल्यांकन निजी कालेज में क्यों कराया?
. प्रैक्टिकल में प्राइवेट शिक्षकों को 100-100 कालेज दिए, सरकारी क्यों नहीं लिए?
. सामूहिक नकल में पकड़े कालेजों को कैसे क्लीन चिट दी गई?
कमिश्नर बनाएंगे लंबित मार्कशीट की सूची
बीते सत्रों की कितनी मार्कशीट-डिग्री लंबित हैं, इसकी जांच कमिश्नर तैयार करेंगे। कुलसचिव से कालेज की सूची, प्राचार्य-प्रबंधक का नाम, फोन नंबर देने को कहा है। इनसे पूछकर मार्कशीट-डिग्री की सूची तैयार कर समिति और विश्वविद्यालय को सौंपा जाएगा।
‘ताउम्र कचहरी के चक्कर काटोगे’
अफसरों के झूठ पर समिति के सदस्य भड़क गए। बोले, रजिस्ट्रार साहब गलत जानकारी दे रहे हो, ताउम्र कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते रहोगे।
24 घंटे में देनी होगी रिपोर्ट
समिति ने फर्जीवाड़ों की सूची विवि अधिकारियों को देते हुए इन पर अब तक हुई कार्रवाई की 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। यह विधानसभा में भी रखी जाएगी।