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प्रकाश पर्व : आगरा में पौने दो महीने रहे थे गुरु गोविंद सिंह, गुरुद्वारों में सजा कीर्तन दरबार
Wed, 20 Jan 2021 10:52 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 20 Jan 2021 10:52 AM IST
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गुरुद्वारा गुरु का ताल का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। गुरुद्वारों में कीर्तन दरबार सजे हैं भव्य सजावट है। केंद्रीय संस्था श्री गुरु सिंह सभा माईथान में कीर्तन दरबार सजाया गया। गुरुद्वारा में श्री सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह, हजूरी रागी बृजेंद्र सिंह और ज्ञानी कुलविंदर सिंह कथा और कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
इसी मौके पर फतेहगण साहिब यात्रा निकालने वालों को भी सम्मानित किया। गुरुद्वारा देशमेश दरबार शहीद नगर और गुरुद्वारा साहिब शाहगंज में भी प्रकाश पर्व का उल्लास है। दशमेश दरबार के प्रधान नरेंद्र सिंह सेठी और शाहगंज गुरुद्वारा प्रधान बॉबी आनंद ने कहा कि गुरुद्वारे की भव्य सजावट भी की गई है।
आगरा में पौने दो महीने रहे गुरु गोविंद सिंह
गुरुद्वारा गुरु के ताल के मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया कि सूरज प्रकाश ग्रंथ के अनुसार गुरु गोविंद सिंह आगरा में बहादुर शाह की मदद के लिए 1706 से 1707 के बीच आए थे। उन्होंने पौने दो महीने यहां बिताया। राजगद्दी के लिए जाजू की गढ़ी धौलपुर में बहादुर शाह और तारा आजम के बीच युद्ध में उन्होंने सिख सेना के साथ बहादुर शाह की मदद की और उन्हें फतह दिलाई। उनके तीर से ही तारा आजम की मौत हुई। यमुना किनारे पर हाथी को मगरमच्छ से बचाने पर ही उस घाट का नाम हाथी घाट पड़ा।
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इसी मौके पर फतेहगण साहिब यात्रा निकालने वालों को भी सम्मानित किया। गुरुद्वारा देशमेश दरबार शहीद नगर और गुरुद्वारा साहिब शाहगंज में भी प्रकाश पर्व का उल्लास है। दशमेश दरबार के प्रधान नरेंद्र सिंह सेठी और शाहगंज गुरुद्वारा प्रधान बॉबी आनंद ने कहा कि गुरुद्वारे की भव्य सजावट भी की गई है।
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आगरा में पौने दो महीने रहे गुरु गोविंद सिंह
गुरुद्वारा गुरु के ताल के मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया कि सूरज प्रकाश ग्रंथ के अनुसार गुरु गोविंद सिंह आगरा में बहादुर शाह की मदद के लिए 1706 से 1707 के बीच आए थे। उन्होंने पौने दो महीने यहां बिताया। राजगद्दी के लिए जाजू की गढ़ी धौलपुर में बहादुर शाह और तारा आजम के बीच युद्ध में उन्होंने सिख सेना के साथ बहादुर शाह की मदद की और उन्हें फतह दिलाई। उनके तीर से ही तारा आजम की मौत हुई। यमुना किनारे पर हाथी को मगरमच्छ से बचाने पर ही उस घाट का नाम हाथी घाट पड़ा।
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गुरुग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेका
- प्रकाश पर्व के लिए घर में सजावट की है। गुरुग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेका। परिवार में प्रकाश पर्व के लिए उल्लास है। - बलजीत कौर, बल्देव अपार्टमेंट
- गुरु महाराज का प्रकाश पर्व सभी उमंग और उल्लास के साथ मना रहे हैं। इसके लिए पहले से ही तैयारियां भी कर रखी हैं। - हरजोत सिंह, महर्षिपुरम
घर में ही जपेंगे वाहेगुरु का नाम
- गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व का दिन पावन है, मन में अपार श्रद्धा है। कोरोना वायरस के कारण घर पर वाहेगुरु का नाम जपेंगे। - अरविंद सिंह चावला, इंद्रापुरम
- प्रकाश पर्व के लिए घर में सजावट की है। गुरुग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेका। परिवार में प्रकाश पर्व के लिए उल्लास है। - बलजीत कौर, बल्देव अपार्टमेंट
- गुरु महाराज का प्रकाश पर्व सभी उमंग और उल्लास के साथ मना रहे हैं। इसके लिए पहले से ही तैयारियां भी कर रखी हैं। - हरजोत सिंह, महर्षिपुरम
घर में ही जपेंगे वाहेगुरु का नाम
- गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व का दिन पावन है, मन में अपार श्रद्धा है। कोरोना वायरस के कारण घर पर वाहेगुरु का नाम जपेंगे। - अरविंद सिंह चावला, इंद्रापुरम