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मैनपुरी में गहराया बिजली संकट, 33 प्रतिशत आपूर्ति घटी
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मैनपुरी में गहराया बिजली संकट, 33 प्रतिशत आपूर्ति घटी
-उपकेंद्रों से हो रही इमरजेंसी रोस्टिंग ने छीना लोगों का सुकून
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। बीते एक सप्ताह से जिले में बिजली संकट गहरा गया है। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक सभी जगह इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। विद्युत निगम के अधिकारी उपकेंद्रों को ही बिजली न मिलने की बात कह रहे हैं। ये समस्या कब तक रहेगी इस बारे में भी अधिकारी कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
जिले में आधा सैकड़ा से अधिक विद्युत उपकेंद्रों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। शहरी क्षेत्र में 20 से 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में औसतन 14 घंटे की विद्युत आपूर्ति की जाती है। बीते सात दिनों से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र कर बिजली की इमरजेंसी रोस्टिंग ने मुसीबत बढ़ा दी है। हाल ये है कि शहरी क्षेत्र में जहां आपूर्ति तीन घंटे तक कम हो गई है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र में सात घंटे तक बिजली आपूर्ति कम हो गई है। गर्मी से राहत न मिलने के चलते बिजली कटौती लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन रही है। रात में होने वाली कटौती लोगों की नींद में खलल डाल रही है। वहीं विद्युत निगम ऊपर से ही उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति न होने की बात कह रहा है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि विद्युत उत्पादन केंद्रों पर कोयला गीला हो जाने और कोयले की कमी के चलते विद्युत उत्पादन कम हो रहा है। ऐसे में आपूर्ति भी कम मिल रही है। इसी के चलते पहले उन उपकेंद्रों की बिजली काटी जा रही है, जहां बकाया अधिक है। वहीं अगर इसके बाद भी कमी होने पर अन्य उपकेंद्रों पर भी कटौती की जा रही ळै।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जागकर बीत रही राहत
सबसे अधिक कटौती का दंश ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग झेल रहे हैं। घिरोर, दन्नाहार, कोसमा, जागीर, बिछवां, सुल्तानगंज, बरनाहल समेत अन्य क्षेत्रों में सात-सात घंटे की इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। ये रोस्टिंग रात में ही की जा रही है। इसके चलते पूरी रात गांवों में बिजली के लिए लोग परेशान होते हैं। रात को गई बिजली सुबह चार बजे आती है जो दोबारा सुबह पांच बजे चली जाती है। विद्युत निगम के अधिकारी भी ग्रामीणों की शिकायतों का जवाब नहीं देते हैं।
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सहारा के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
बिछवां। बिजली कटौती से परेशान गांव सहारा के ग्रामीणों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। उगांव निवासी अवधेश सिंह चौहान का कहना है कि शाम होते ही बिजली चली जाती है। ऐसे में शाम को काम में परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि गांव में महज आठ से दस घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मनमानी कटौती रोकने की मांग की है। मांग करने वालों में आदेश सिंह चौहान, शिवम वर्मा, रामवीर सिंह, अजय प्रताप, हरेंद्र सिंह, विमल कुमार, बंटू चौहान, विनोद सिंह चौहान, ओम प्रताप भदोरिया, मिंटू चौहान, शिव वर्धन सिंह चौहान, अमित चौहान, रामवीर सिंह चौहान, राजू चौहान, प्रबल प्रताप सिंह चौहान आदि शामिल हैं।
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लोगों की बात
बीते एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति का हाल बहुत खराब है। रात में तो बिजली आती ही नहीं है। वहीं दिन में भी मनमानी कटौती की जा रही है। इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
सौरभ यादव, नीली कोठी।
दिन में भले ही एक बार बिजली कटौती हो जाए, लेकिन रात में लोगों को आपूर्ति मिलनी चाहिए। लेकिन यहां तो विद्युत निगम पूरी-पूरी रात के लिए कटौती कर देता है।
शिवम चौहान, भटानी।
विद्युत निगम की लापरवाह कार्यशैली उपभोक्ताओं की परेशानी का कारण बनती है। इमरजेंसी रोस्टिंग के नाम पर बिजली विभाग अपनी मनमानी करने पर उतारू है।
अनूप सिंह, नगला मढ़ा।
जब भी बिजली कटौती होती है तो ऊपर से ही आपूर्ति न मिलने की बात कही जाती है। विद्युत निगम के अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए बात टाल देते हैं।
विद्याराम, सीतापुर।
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वर्जन
वर्तमान में बिजली की समस्या चल रही है। बिजली की उपलब्धता के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। कुछ उपकेंद्रों पर तीन घंटे तो कुछ पर अधिक समय की इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। एक सप्ताह में हालात सामान्य होने की उम्मीद है।
-अतुल कुमार अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता।
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मैनपुरी में गहराया बिजली संकट, 33 प्रतिशत आपूर्ति घटी
-उपकेंद्रों से हो रही इमरजेंसी रोस्टिंग ने छीना लोगों का सुकून
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। बीते एक सप्ताह से जिले में बिजली संकट गहरा गया है। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक सभी जगह इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। विद्युत निगम के अधिकारी उपकेंद्रों को ही बिजली न मिलने की बात कह रहे हैं। ये समस्या कब तक रहेगी इस बारे में भी अधिकारी कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
जिले में आधा सैकड़ा से अधिक विद्युत उपकेंद्रों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। शहरी क्षेत्र में 20 से 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में औसतन 14 घंटे की विद्युत आपूर्ति की जाती है। बीते सात दिनों से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र कर बिजली की इमरजेंसी रोस्टिंग ने मुसीबत बढ़ा दी है। हाल ये है कि शहरी क्षेत्र में जहां आपूर्ति तीन घंटे तक कम हो गई है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र में सात घंटे तक बिजली आपूर्ति कम हो गई है। गर्मी से राहत न मिलने के चलते बिजली कटौती लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन रही है। रात में होने वाली कटौती लोगों की नींद में खलल डाल रही है। वहीं विद्युत निगम ऊपर से ही उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति न होने की बात कह रहा है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि विद्युत उत्पादन केंद्रों पर कोयला गीला हो जाने और कोयले की कमी के चलते विद्युत उत्पादन कम हो रहा है। ऐसे में आपूर्ति भी कम मिल रही है। इसी के चलते पहले उन उपकेंद्रों की बिजली काटी जा रही है, जहां बकाया अधिक है। वहीं अगर इसके बाद भी कमी होने पर अन्य उपकेंद्रों पर भी कटौती की जा रही ळै।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जागकर बीत रही राहत
सबसे अधिक कटौती का दंश ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग झेल रहे हैं। घिरोर, दन्नाहार, कोसमा, जागीर, बिछवां, सुल्तानगंज, बरनाहल समेत अन्य क्षेत्रों में सात-सात घंटे की इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। ये रोस्टिंग रात में ही की जा रही है। इसके चलते पूरी रात गांवों में बिजली के लिए लोग परेशान होते हैं। रात को गई बिजली सुबह चार बजे आती है जो दोबारा सुबह पांच बजे चली जाती है। विद्युत निगम के अधिकारी भी ग्रामीणों की शिकायतों का जवाब नहीं देते हैं।
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सहारा के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
बिछवां। बिजली कटौती से परेशान गांव सहारा के ग्रामीणों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। उगांव निवासी अवधेश सिंह चौहान का कहना है कि शाम होते ही बिजली चली जाती है। ऐसे में शाम को काम में परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि गांव में महज आठ से दस घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मनमानी कटौती रोकने की मांग की है। मांग करने वालों में आदेश सिंह चौहान, शिवम वर्मा, रामवीर सिंह, अजय प्रताप, हरेंद्र सिंह, विमल कुमार, बंटू चौहान, विनोद सिंह चौहान, ओम प्रताप भदोरिया, मिंटू चौहान, शिव वर्धन सिंह चौहान, अमित चौहान, रामवीर सिंह चौहान, राजू चौहान, प्रबल प्रताप सिंह चौहान आदि शामिल हैं।
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लोगों की बात
बीते एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति का हाल बहुत खराब है। रात में तो बिजली आती ही नहीं है। वहीं दिन में भी मनमानी कटौती की जा रही है। इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
सौरभ यादव, नीली कोठी।
दिन में भले ही एक बार बिजली कटौती हो जाए, लेकिन रात में लोगों को आपूर्ति मिलनी चाहिए। लेकिन यहां तो विद्युत निगम पूरी-पूरी रात के लिए कटौती कर देता है।
शिवम चौहान, भटानी।
विद्युत निगम की लापरवाह कार्यशैली उपभोक्ताओं की परेशानी का कारण बनती है। इमरजेंसी रोस्टिंग के नाम पर बिजली विभाग अपनी मनमानी करने पर उतारू है।
अनूप सिंह, नगला मढ़ा।
जब भी बिजली कटौती होती है तो ऊपर से ही आपूर्ति न मिलने की बात कही जाती है। विद्युत निगम के अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए बात टाल देते हैं।
विद्याराम, सीतापुर।
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वर्जन
वर्तमान में बिजली की समस्या चल रही है। बिजली की उपलब्धता के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। कुछ उपकेंद्रों पर तीन घंटे तो कुछ पर अधिक समय की इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। एक सप्ताह में हालात सामान्य होने की उम्मीद है।
-अतुल कुमार अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता।