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यूपीः आलू सड़क पर फेंकने को मजबूर किसान, मिट्टी के बराबर भी नहीं मिल रहा दाम

Fri, 15 Dec 2017 06:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा Updated Fri, 15 Dec 2017 06:24 PM IST
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potato farmer is forced to waste their crop in uttar pradesh
अालू - फोटो : अमर उजाला
50 किलो आलू के दाम 10 रुपये। मतलब 20 पैसे में एक किलो आलू। यह सुनकर आप दंग रह गए, लेकिन हकीकत है। आगरा की मंडी में आलू की तीसरी क्वालिटी के किर्री आलू के यही दाम हैं। दूसरे नंबर के आलू गुल्ला 30-40 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) है। 
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इस पैसे में तो किसानों का डीजल का खर्च तक नहीं निकल रहा। पहले नंबर की क्वालिटी छट्टा के भले ही 150-300 रुपये प्रति पैकेट मिल रहे हैं, लेकिन लागत फिर भी नहीं निकल रही। 
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प्रति पैकेट खर्च की बात करें तो करीब 900 रुपये पड़ता है। इससे आहत होकर बुधवार को खंदौली के आबिदगढ़, पुरा गोवर्धन गांवों में कई किसानों ने आलू के सैकड़ों पैकेट खेत में फेंक दिए। 
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potato farmer is forced to waste their crop in uttar pradesh
अालू - फोटो : अमर उजाला
शीतगृह में अभी भी 70 लाख पैकेट जमा हैं। निकासी की मियाद नवंबर में खत्म हो गई है। शीतगृह स्वामियों ने 31 दिसंबर तक किसानों को राहत दी है। इसके बाद मरम्मत कार्य के लिए शीतगृह बंद कर दिए जाएंगे। ऐसे में 30-40 लाख पैकेट फेंकने पड़ जाएंगे। 

आलू फेंकने वाले किसान देवेंद्र सिंह ने बताया कि आलू को मंडी में लेकर गए, लेकिन वहां कोई खरीदार नहीं मिला। 10 रुपये पैकेट दे रहे थे, इससे भला तो खेतों में फेंकना उचित समझा। 

आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदर्शन सिंघल ने बताया कि अभी भी कोल्ड में 60-70 लाख पैकेट जमा है। 30 दिसंबर के बाद कोल्ड स्टोरेज बंद कर दिए जाएंगे। 50 फीसदी आलू फेंकना पड़ सकता है।

समर्थन मूल्य न बने खरीद केंद्र

potato farmer is forced to waste their crop in uttar pradesh
अालू - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य 487 रुपये घोषित किया, लेकिन इसकी खरीद के लिए कोई केंद्र नहीं बनाए। किसान अशोक कुमार का कहना है कि भले ही शासन ने समर्थन मूल्य लागत से भी कम घोषित किया, लेकिन खरीद कर लेती तो इतना नुकसान नहीं होता। 


बाजार में नया आलू आने से पुराने आलू की और मिट्टी खराब हो गई। पंजाब, हरियाणा से नया आलू बाजार में 10 रुपये किलो मिल रहा है। ऐसे में लोग खाने में अब नए आलू को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे में अब पुराने आलू के बिक्री की संभावना बेहद कम हो गई है। 


270: कोल्ड स्टोर हैं आगरा में 
2.59: लाख आलू किसान हैं 
75: हजार हेक्टेयर हुई आलू की खेती
21.03: लाख मीट्रिक टन हुआ उत्पादन
5.50: करोड़ आलू पैकेट कोल्ड स्टोर में हुए जमा 
70: लाख आलू पैकेट अभी भी हैं जमा 

सड़ा आलू खुले स्थान पर न फेंका जाए

potato farmer is forced to waste their crop in uttar pradesh
अालू - फोटो : अमर उजाला
उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के सदस्यों की बैठक हुई। इसमें अधिकारियों ने सदस्यों को शीतगृह अधिनियम के बारे में जानकारी दी। भंडारित आलू को कानून के दायरे में निस्तारित करने की सलाह दी। 

पर्यावरण की सुरक्षा एवं स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए सड़े-गले आलू को कोल्ड स्टोरेज के बाहर खुले स्थान पर न फेंका जाए। बैठक में निर्णय लिया गया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में जल्द विभिन्न विभागों के साथ बैठक की जाए। इसमें तय किया जाएगा कि कोल्ड स्टोरेज से निकलने वाला सड़ा-गला आलू कहां फेंका जाए। 
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