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मौत के बाद वसीयत: फर्जीवाड़े के खेल में फंसे उप निबंधक, निलंबन की लटकी तलवार; DM की जांच में सामने आया सच

Fri, 20 Feb 2026 06:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 20 Feb 2026 06:00 AM IST
सार

आगरा में मरणोपरांच वसीयतों का खेल हुआ। जिलाधिकारी के जांच के बाद इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया है। इस मामले में उप निबंधक तृतीय बुरी तरह फंस गए हैं। 

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Posthumous Will Registration Scam: Agra Sub-Registrar Faces Suspension After DM Probe Finds Him Guilty
आगरा जिलाधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मरणोपरांत वसीयतों के पंजीकरण में हुए खेल पर प्रशासन की जांच ने मुहर लगा दी है। उप निबंधक तृतीय (सब रजिस्ट्रार) राकेश यादव संयुक्त समिति की जांच में दोषी पाए गए हैं। जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन को पत्र लिखकर उनके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और निलंबन की संस्तुति की जाएगी।
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अमर उजाला ने मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण में गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया था। संज्ञान लेकर डीएम ने पहले सहायक महानिरीक्षक योगेश कुमार और फिर एडीएम (वित्त) शुभांगी शुक्ला और एसडीएम सदर सचिन राजपूत की संयुक्त टीम से मामले की गहराई से जांच कराई। जांच में सामने आया कि राकेश यादव ने रजिस्ट्रेशन एक्ट और स्पष्ट शासनादेशों को ताक पर रखकर मरणोपरांत वसीयतों का पंजीकरण किया। सहायक महानिरीक्षक योगेश कुमार की जांच में उप निबंधक के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति की गई।


 
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डीएम को भेजी गई संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई की संस्तुति की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि उप निबंधक ने शासनादेश का उल्लंघन कर पद का दुरुपयोग किया है। न्यायिक विवादों को जन्म दिया है। उप निबंधक के विरुद्ध विभागीय जांच कराई जाएगी। जांच में चार वसीयतों के पंजीकरण में शासनादेश उल्लंघन के आरोप साबित हुए हैं।


 
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बाबू से अफसर बने, शिकायतों का लगा अंबार
राकेश यादव मूल रूप से लिपिक संवर्ग से पदोन्नत होकर तीन साल पहले उप निबंधक बने थे। उनका तीन वर्षों का कार्यकाल विवादों और शिकायतों से भरा रहा है। उनके खिलाफ 10 से अधिक शिकायतें डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचीं। भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग तक के आरोप लगे। कई बार शिकायत सही पाए जाने के बावजूद वे रसूख के कारण कार्रवाई से बचते रहे। आरोप हैं कि उन्होंने जानबूझकर संवेदनशील मामलों में नियमों की अनदेखी की और भूमि हस्तांतरण में जटिलताएं पैदा कीं।


 

इन वसीयतों में मिला उल्लंघन
विलेख संख्या पंजीकरण तिथि विवरण

117/2025 27/02/2025 सत्यनारायण शर्मा व भरत लाल शर्मा (नरहौली, बाह) की मरणोपरांत वसीयत।
148/2024 21/03/2024 सुनील शर्मा (लाजपत कुंज, आगरा) की मरणोपरांत वसीयत।
326/2024 15/06/2024 दिनेश कुमार (लकावली, आगरा) की मरणोपरांत वसीयत।
327/2024 15/06/2024 दिनेश कुमार (लकावली, आगरा) की एक अन्य वसीयत का पंजीकरण।
 
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