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'बीमार' व्यवस्था: एसएन मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर नहीं हुए ठीक, खुद ही दे रहे बच्चों को भाप

Tue, 14 Jan 2020 12:56 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 14 Jan 2020 12:56 AM IST
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poor health services in SN Medical College Agra
बीमार बच्चे को भाप देती मां - फोटो : अमर उजाला
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के हालातों में अभी कोई सुधार नहीं हुआ। दो वेंटीलेटर अभी ठीक नहीं हुए हैं। इससे गंभीर रूप से बीमार बच्चों की जान पर बन सकती है।
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बीते साल नवंबर-दिसंबर में बाल रोग विभाग में 403 शिशु भर्ती हुए। इनमें से 24 की मौत हो गई। चिकित्सक इसकी वजह संक्रमण, गंभीर निमोनिया समेत अन्य वजह बता रहे हैं। ऐसे गंभीर मरीजों के इलाज के लिए एनआइसीयू में सात वेंटीलेटर में से तीन पिछले दो सप्ताह से खराब हैं। 
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इनमें से एक ही ठीक हुआ है। इससे गंभीर बच्चों को अंबू बैग से ऑक्सीजन देनी पड़ रही है। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने बताया कि वेंटीलेटर ठीक करने के लिए दिल्ली गए हैं। दो दिन में ठीक हो जाएंगे। 10 वार्मर और बढ़ाए जा रहे हैं।
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2019 के नवंबर-दिसंबर की स्थिति
9261: शिशुओं का जिले भर में हुए पैदा
1588: शिशुओं का जन्म लेडी लॉयल में हुआ
17: शिशुओं की हुई उपचार के दौरान मौत 
403: बच्चे एसएन के बाल रोग के एनआईसीयू में हुए भर्ती
24: नवजात की हुई इलाज के दौरान मौत

निमोनिया पीड़ित बच्चों को अभिभावक दे रहे भाप

निमोनिया पीड़ित बच्चों को भाप देने के लिए स्टाफ मदद नहीं करता। तीमारदारों को ही मशीन से भाप देनी पड़ रही हैं। इसकी दवाएं भी बाजार से खरीदनी पड़ रही। अपने बच्चे को भाप दे रही मुन्नी ने बताया कि डॉक्टर स्टाफ को बता देते हैं, लेकिन वह सुनवाई नहीं करते हैं। 

सुविधा न सुनवाई, बार-बार कहने पर बदलते हैं ड्रिप
बच्चे को ऑक्सीजन खुद ही देनी पड़ती है, डर लगा रहता है कि कहीं परेशानी न बढ़ जाए। स्टाफ भी कोई सुनवाई नहीं करता है। - शकीला बेगम
रुपये न होने के कारण इलाज के लिए बच्चे यहां भर्ती करते हैं। सुविधाएं ठीक न होने से परेशानी होती है, प्राइवेट में इलाज के लिए रुपये नहीं हैं। - नरेश कुमार
बाल रोग विभाग में सुविधाओं की स्थिति खराब है। नर्सिंग स्टाफ भी नहीं आता है, कई बार बुलाने पर ही ड्रिप बदली जाती हैं। -राहुल कुमार
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